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पेयजल संकट: एक हैंडपंप के भरोसे दर्जनों परिवार

ग्राम पंचायत सकवाह रैयत में दिक्कत, हैंडपंप से भी नहीं निकलता पर्याप्त पानी

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पेयजल संकट: एक हैंडपंप के भरोसे दर्जनों परिवार

पेयजल संकट: एक हैंडपंप के भरोसे दर्जनों परिवार

मंडला. गर्मी का सीजन शुरू हो गया है और प्राकृतिक जल स्त्रोत में जल स्तर कम हो रहा है। इस वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के लिए परेशानी हो रही है। जनपद पंचायत मवई की ग्राम पंचायत सकवाह रैयत में एक हैंडपंप के भरोसे आधा सैकड़ा परिवार बमुश्किल से पेयजल जुटा पा रहे है। हैंडपंप में पानी कम है। जिसमें काफी इंतजार के बाद पानी निकल रहा है। पेयजल की समस्या को लेकर ग्रामीण शिकायत कर रहे है लेकिन पीएचई विभाग के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बताया गया है कि जनपद पंचायत मवई नक्सल प्रभावित क्षेत्र है यहां विकास कार्य और मूलभूत सुविधा संसाधनो का अभाव है। हर एक गांव में समस्या खड़ी है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों की भी अधिकारी नहीं सुन रहे है। ग्राम पंचायत सकवाह रैयत के वार्ड क्रमांक चार और पांच में पेयजल की समस्या है।

ग्रामीणों को यहा हैंडपंप के भरोसे ही पेयजल मिलता रहा है लेकिन गर्मी की तपन से भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। जिससे हैंडपंप का पानी कम हो गया है। कई पंप मारने के बाद बमुश्किल पानी निकल रहा है। हैंडपंप में लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। यहां तक काफी इंतजार के बाद भी ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि काफी समय पानी के इंतजाम में लग जाता है जिससे कृषि व मजदूरी के कार्य भी प्रभावित हो रहे है।

जल्द लाई जाए योजना

बताया गया है कि सकवाह की 1600 से अधिक आबादी है। यहां के ग्रामीण हैंडपंप और कुंआ से ही पेयजल लेते आ रहे है। गर्मी के दिनो में ये दोनो स्त्रोत सूख जाते है। यहां नल जल योजना नहीं है और ना ही जल जीवन मिशन से इस गांव को शामिल किया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि घर घर जल का नारा दिया गया है लेकिन उनके गांव को छोड़ दिया गया है। मांग है कि इस गांव में भी नलजल योजना संचालित किया जाए। जिससे ग्रामीणो की वर्षों से बनी पेयजल की समस्या का निराकरण हो सके।

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