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स्वीकृति मिलने के बाद भी सब्जी विक्रेता मुख्य मार्ग में लगा रहे दुकान

आज भी नही बन सका बाजार शेड

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स्वीकृति मिलने के बाद भी सब्जी विक्रेता मुख्य मार्ग में लगा रहे दुकान

स्वीकृति मिलने के बाद भी सब्जी विक्रेता मुख्य मार्ग में लगा रहे दुकान

मंडला. करीब डेढ़ दशक से महाराजपुर मुख्य मार्ग पुराना हाइवे पर फुटकर सब्जी की दुकानों को व्यवस्थित करने की कवायद कागज तक सिमट कर रह गई। सब्जी बाजार शेड के लिए नगर पालिका ने जमीन भी चिन्हित कर ली लेकिन काम शुरू नहीं कराया है। इसके चलते अभी सब्जी विक्रेता मुख्य मार्ग पर ही बैठते है। भारी वाहनो की आवाजाही से कभी बड़ा हादसा हो सकता है। इस ओर नगर पलिका का ध्यान नहीं है। महाराजपुर क्षेत्र स्थानीय पार्षदो की पहल पर नगर परिषद मंडला ने आधा सैकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों से सब्जी लाकर विक्रय करने वाले विक्रेताओ के लिए बाजार को विकसित करने का निर्णय लिया था। इसको लेकर जमीन भी जून 2020 में तय कर ली गई और जल्द काम शुरू करने की तैयारी थी लेकिन साल गुजर जाने के बाद भी प्रस्ताव को कागज तक सीमित कर रखा है। इस वजह से सब्जी विक्रेता मुख्य मार्ग पर काबिज है इससे आवाजाही में राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका परिषद उपनगरीय महाराजपुर क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। यहां भले ही आमजनों की सुविधा के लिए पहले से नगर पलिका का उप कार्यालय खोला गया। जिसका निर्माण प्रगति पर है लेकिन यहां व्यवस्था नाकाफी रही है। सबसे बड़ी समस्या महाराजपुर से गुजरे पुराने हाइवे के किनारे लगने वाली सब्जी की दुकानों की है। जहां नो एंट्री खुलते ही भारी वाहनों के साथ छोटे वाहनो की आवाजाही होती है। जिससे बड़ा हादसे होने का अंदेशा बना रहता है। जाम जैसी समस्या से लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ता है। करीब डेढ़ दशक पुराना सब्जी बाजार में नर्मदा कछार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से ताजी सब्जियां मिलती है, जिसे खरीदने के लिए मंडला से भी लोग महाराजपुर पहुंचते है। सुबह से लेकर दोपहर तक अच्छी खासी भीड़ देखी जाती है। इसी दौरान भारी वाहनों की आवाजाही होती है। आंगन तिराहा से लेकर बजरंग चौराहा तक का मार्ग अव्यवस्था का शिकार हो जाता है। गौरतलब है कि इसके पहले भी यहां नियमित रूप से सब्जी विक्रय करने वाले को अलग कर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था लेकिन वहां उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है। व्यवस्था नहीं होने के कारण कोई वहां सब्जी लेने गया ही नहीं है।

सब्जी विक्रेताओं की संख्या अधिक

बताया गया है कि महाराजपुर में अधिकांश सब्जी नर्मदा के कछार लगाई जाती है। जिसकी अलग ही मांग है। कछार क्षेत्र महाराजपुर में अधिक है। इसके चलते ताजी सब्जियां सुबह के समय मिलती है। यहां स्थानीय समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से सीजनेवल सब्जी लाकर दुकाने लगाने वाले करीब एक सैंकड़ा विक्रेता है। जो वर्तमान में अस्थायी दखल दे रहे है। इन्हें व्यवस्थित करने के लिए योजना बनाई गई है लेकिन परिषद सदस्यों की बेरूखी के कारण अभी तक काम नहीं हुए। परिषद में मनमानी से निर्माण कार्य हो रहे जो सीधे जनता से नहीं जुड़े है।
बाजार के शेड का निर्माण

बताया गया है कि स्थानीय पार्षदो और नपाधिकारी के प्रयास से सब्जी विक्रताओ को एक सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी। महाराजपुर में ही पहन 34, खसरा नं 360/2 रकबा 0.478 हैक्टेयर जो शासकीय अभिलेखों में चारागाह मद में दर्ज है। उस स्थान को उपसब्जी मंडी के रूप विकसित किया जाना था। जहां विक्रेताओ के लिए शेड बनाकर छांव की व्यवस्था रहती । इसके साथ बैठने के लिए कांक्रीट डालकर निर्माण भी किया जाता। यहां मंडी स्थापित होने से लोगों को शौचालय के साथ पेयजल की सुविधा मिलती।