
रेशम की साड़ियों पर गोंडी पेंटिंग ने बढ़ाई ग्रामीण महिलाओं की आमदनी
मंडला. रेशम की साड़ियों पर गोंडी पेंटिंग ने जहां उत्पाद पर चार चांद लगा दिए हैें वहीं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की आमदानी भी बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार गोंडी कला गोंडवाना काल की प्रसिद्ध चित्र कला है, जो मंडला एवं डिंडोरी जिले में गोंड जनजाति द्वारा बनाई जाती है। गोंडी पेंटिंग जिले के लिए एक जिला एक उत्पाद में भी चयनित की गई है। गोंडी कला एवं रेशम को प्रोत्साहित करने की पहल 2020 में कलेक्टर हर्षिका सिंह द्वारा की गई और रेशम की साड़ियों पर पेंटिंग का नवाचार चालू किया गया। इन साड़ियों की मंडला से बाहर के मार्केट में अच्छी प्रतिक्रिया मिली और रेशम बुनकर एवं गोंडी कलाकारों को आय का स्त्रोत मिला। अगस्त में कलेक्टर हर्षिका सिंह के मार्गदर्शन में जिले में पदस्थ महात्मा गांधी नेशनल फेलो, कृति सिंघई द्वारा नवाचार चालू किया गया, जिसमें व्यापार और पर्यटकों की दृष्टि से गोंडी पेंटिंग से छोटे-छोटे आइटम डिजाइन किए गए, जो सस्ते एवं आकर्षक हों। प्रोडक्ट प्रमोशन के लिए शहर के प्रमुख स्थान जैसे कलेक्ट्रेट रोड, रपटा घाट, कलादीर्घा एवं विभिन्न कार्यक्रम जैसे मप्र गौरव दिवस, जिला गौरव दिवस इत्यादि में स्टॉल लगाए गए। नवम्बर माह में जबलपुर में नाबार्ड द्वारा आयोजित 15-दिवसीय प्रदर्शनी में भाग लिया गया। स्टॉल को प्रेजेंटेशन और बिक्री के लिए पुरस्कृत किया गया। समूह द्वारा ऑनलाइन ऑर्डर व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के माध्यम से भी लिए जा रहे हैं। हाल ही में भोपाल, नोएडा, जोधपुर, पटना, श्रीनगर जैसे महानगरों में ऑर्डर पोस्ट द्वारा भेजे गए हैं। जनवरी से एजीएनएफ के माध्यम से आईआईएम अहमदाबाद में इन कलाकृतियों का विक्रय किया जाना प्रस्तावित है। पिछले महीने समूह द्वारा 70 से 80 हजार तक का सामान विक्रय किया जा चुका है एवं इस प्रकार के आइटम की प्रसिद्धि देखकर मंडला के अन्य क्षेत्रों के गोंडी कलाकारों ने इसमें जुड़ने की इच्छा जाहिर की है, जिसमें ग्राम औरई एवं दुधारी से कलाकार पोस्टकार्ड इत्यादि आइटम बनाना प्रारंभ कर चुके हैं। इन कलाकृतियों को ऑनलाइन विक्रय के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर लिस्ट करवाने कि प्रक्रिया भी प्रगतिरत है।
Published on:
13 Dec 2022 07:59 pm
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