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पशुपालकों ने परंपरागत तरीके से की गोवर्धन पूजा

गायों को सजाया विभिन्न रंगो से

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पशुपालकों ने परंपरागत तरीके से की गोवर्धन पूजा

पशुपालकों ने परंपरागत तरीके से की गोवर्धन पूजा

पशुपालकों ने परंपरागत तरीके से की गोवर्धन पूजा
मंडला. दीपावली के दूसरे दिन शुक्रवार को गोवर्धन पूजा विधि विधान से की गई। गऊ माता को नहला धुलाकर तरह तरह के रंगो से सजाया गया और उन्हें अनाज व पानी का भोग लगाकर उनकी पूजा की गई। कहा जाता है कि गौ में समस्त देवी देवताओं का वास होता है और यह विश्व पालक कहलाती है। यह पूजा शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से की जाती है। जिनके यहां पशु पाले जाते है। वे इस पूजन को विशेष रूप से करते है।
सुबह से ही घर के सभी पशु गाय, बैल, भैंस को स्नान कराने के बाद उन्हें विभिन्न रंगो से रंगा जाता है। घर में उनके लिए विशेष पकवान बनाए जाते है। घर आंगन में गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा की जाती है। जिसके बाद पशुओं को विशेष पकवान खिलाए जाते है। इस दिन के बारे में मान्यता है कि इन्द्र भगवान ने जब कुपित होकर अत्याधिक वर्षा मथुरा वृंदावन में की थी तो पूरा शहर जल मग्न होने लगा। दोनों ही जगह के लोग कृष्ण जी के पास पहुंचे और बचाने के लिए आग्रह किया। तब कृष्ण जी गोवर्धन पर्वत को उठाकर लोगों की रक्षा की। तब से ही दीपावली के दूसरे दिन से गोवर्धन पूजा प्रारंभ की।
नहीं आए दूधिए :
गोवर्धन पूजा पर पशुओं की पूजा होती है। इस दिन दूध देने वाले पशु का दूध नहीं दुहा जाता। केवल पूजा की जाती है। जिस वजह से घरो में, हॉटलों में दूधिए दूध लेकर नहीं पहुंचे। सभी होटले इसी वजह से बंद रही।