
मुख्यमंत्री से मिलेंगे अतिथि शिक्षक
मंडला। जिले के अतिथि शिक्षकों की बैठक मुख्यालय मंडला में आयोजित की गई। बैठक में सभी विकासखंड के अतिथि शिक्षक संगठन पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान अपनी स्थानीय समस्याओं का स्थाई समाधान एवं नियमितीकरण के मुख्य मुद्दे के निराकरण के लिए आगामी रूपरेखा पर विचार विमर्श किया गया। अतिथि शिक्षक पीडी खैरवार ने जानकारी देते हुए बताया है कि अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के मुद्दे को लेकर जिले के अतिथि शिक्षक मुख्यमंत्री कमलनाथ से भेंट कर अपनी बात रखना चाहते हैं। 9 नवंबर शनिवार को मुख्यमंत्री का मंडला आगमन हो रहा है। इस अवसर पर उनसे भेंट कर नियमितीकरण के मुद्दे पर जल्द से जल्द गाइडलाइन बनाए जाने की बात करेंगे। इस दौरान अतिथि शिक्षकों द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री से भेंट की तैयारियों के चलते सभी विकास खंडों से भारी संख्या में अतिथि शिक्षक मंडला पहुंचेंगे। स्थानीय समस्याओं के हल नहीं हो पाने के विषय पर चर्चा करते हुए बताया गया है, कि अतिथि शिक्षकों की स्थानीय समस्याओं का समाधान अभी भी शिक्षा प्रशासन के द्वारा नहीं निकाला जा सका है। अतिथि शिक्षकों की मानदेय की समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है़। उनके मानदेय का भुगतान दीपावली के पर्व तक तो किया ही नहीं जा सका था। जिसके कारण सैकड़ों परिवारों में दीये भी नहीं जल सके हैं। जिसके चलते विवश होकर भूखे-प्यासे, आंख बंद धरना प्रदर्शन तक गुजरना पड़ा। यह धरना समस्याओं के स्थाई समाधान या आमरण अनशन तक जारी रखे जाने की जिद थी। बावजूद इसके संबंधित विभाग अभी भी अपनी लापरवाही से बाज नहीं आ रहा है। आज भी अतिथि शिक्षक अपने बैंक खाते चेक कर करके परेशान हो रहे हैं। कर्ज उधारी वसूलने वाले उनके घरों का चक्कर काट रहे हैं। जिले में ऐसे भी सैकड़ों अतिथि शिक्षक हैं। बैठक में शामिल हुए अतिथि शिक्षक घुघरी से रविशंकर परस्ते, युवराज साहू, अनुज मरकाम, चिरोंजी यादव, दुर्गेश नंदिनी यादव, पूर्णिमा धुर्वे, संजू झरिया, उपासना सिंह, महेंद्र सोनी, विकासखंड बीजाडांडी से भागवत यादव के खाते में एक भी माह का मानदेय जमा नहीं कराया गया है। इसी तरह जिले भर में सैकड़ों अतिथि शिक्षकों की यही स्थिति बनी हुई है। जुलाई से वर्तमान तक का मानदेय अधिकतर अतिथि शिक्षकों को अप्राप्त है। सरकार भी इतना कम मानदेय देती है, कि आज के इस मंहगाई के दौर में परिवार के लिए दो जून का भोजन जुटा पाना संभव नहीं होता। वह भी शिक्षा प्रशासन तंत्र की उदासीनता के चलते समय पर भुगतान नहीं कराया रहा है। जिससे अतिथि शिक्षकों के परिवार को आज भी दाने दाने के लिए तरसना पड़ रहा है।
25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर यानी पूरे दीपावली पर्व में पांच दिनो़ तक रात दिन की भूख हड़ताल की गई। जिसके पीछे पूरा-पूरा मानदेय तत्काल भुगतान कराये जाने की जिद मात्र थी। अनशन के दौरान प्रति दिन सुबह से लेकर देर रात तक शासन-प्रशासन के नुमाइंदों के द्वारा मान मनौव्वल के चलते 29 अक्टूबर को अनशन स्थिगित करना पड़ा था। इस दौरान जिला शिक्षा प्रशासन के द्वारा पूर्ण आश्वस्त भी कराया गया था, कि अतिथि शिक्षकों के मानदेय से संबंधित विसंगतियां खत्म कर दी गई हैं। जिनकी पुनरावृत्ति अब नहीं होगी। इसके साथ ही यह भी कहा गया था, कि मानदेय की राशि सभी के बैंक खातों में जमा की जा चुकी है। दीपावली के चलते शासकीय अवकाश समाप्त होते ही बैंकों के द्वारा राशि रिलीज कर दी जाएगी, परंतु ऐसा आज तक भी संभव नहीं हो सका। इस भरोसे को स्वीकार करते हुए अतिथि शिक्षकों ने शिक्षकीय मर्यादा में रहकर अनशन को स्थगित कर 10 दिन के अल्टीमेटम के साथ समझौता किया था। कि आगामी 10 दिवस के अंदर मानदेय से संबंधित सारी समस्याओं के समाधान नहीं किये जा सकने की स्थिति में अतिथि शिक्षक जिला मुख्यालय में आर पार का संघर्ष करेंगे। जिसकी पूरी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी। बैठक में मुख्य रूप से महेंद्र परस्ते, तुलाराम परस्ते, अशोक यादव, युवराज साहू, संजय बरमैया, गन्ना पंद्रो, दुर्गेश भांवरे, राजाराम झरिया, रंजना पटेल, राजेश बेंद्रे, संजय सिसोदिया, हेमंत जंघेला, प्रदीप चक्रवर्ती, चिरौंजी यादव, दुर्गा श्रीवास, सुनीता कुशराम, पूर्णिमा धुर्वे, शिव पूषाम, मोहन मरावी, भागवत यादव, संजू झरिया, नर्मदा झारिया, अनुभव झारिया, प्रहलाद झरिया, प्रेमलता पट्टा, यशवंत झरिया, उपासना सिंह, दुर्गेश नंदनी यादव, रेणु तिवारी, उदय झारिया शामिल रहे।
Published on:
07 Nov 2019 01:00 am
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