रोहित चौकसे
निवास. जवानी में जब जी जान चल रहा था… तो खुब मजदूरी की, पैसे कमाए अपने बच्चों का पालन पोषण भी किया। तीन बेटियों की शादी के बाद सोचा था आराम से जीवन कटेगा। लेकिन जब छोटे बेटे का निधन हुआ और बड़े बेटे ने भी साथ छोड़ दिया तो खुले आसमान के नीचे बेचैनी में रातें कट रही है। शासन से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। पंचायत में दस्तावेज मांगते हैं लेकिन इस उम्र में दस्तावेज बनवा पाना भी मुश्किल है। जैसे तैसे जिंदगी कट रही है। यह कहना है वृद्ध दंपत्ति का जो निवास की सड़कों में भटकते हुए देखे जा सकते हैं। जिसमें वृद्धा पैदल चलने में भी समर्थ नहीं है। ये वृद्ध दंपत्ति शासकीय योजनाओं का लाभ न मिल पाने से दर दर भटकने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं कभी सुविधा घर तो कभी खूले आसमान के नीचे रात कट रही हैं। मामला निवास तहसील के ग्राम कंदवा निवासी वृद्ध दंपत्ति का है। जो तमाम योजनाओं से बेखबर अति गरीबी में जीने विवश है। बढ़ती उम्र की थकान, पत्नी की नि:शक्तता, दरिद्र जीवन किसी दया के इंतजार में है। वर्तमान में निवास नगर परिषद के अनुउपयोगी सुविधाघर में शेष दिनों को व्यतीत करने वाले परिवार की परेशानी ने उसे सड़क किनारे सोने विवश कर दिया है। प्रकृति की बेरुखी, बेमौसम बारिश इसकी नींद ओर जीवन में खलल का काम कर रही है।
नगर में एक वृद्ध दंपति पिछले कुछ सालों से नगर में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बताया गया की यह दंपत्ति कभी नगर परिषद के पास बने एक खंडहर में देखे जाते हैं तो कभी कोर्ट परिसर और तहसील परिसर के सामने एक पेड़ के नीचे डेरा जमाए हुए हैं। यहां वहां मांग कर और उसे बनाकर खाना खाते हैं।
जमीन है लेकिन घर नहीं
वृद्ध का नाम बुद्धू सिंह वरकड़े पिता चमरू हैं जिनकी उम्र 70 वर्ष हैं वही इनके साथ इनकी पत्नी सम्मो बाई जिनकी उम्र 62 वर्ष हैं। बुद्धू सिंह ने बताया की वह निवास जनपद के ग्राम पंचायत कोहका के पोषक ग्राम कंदवा का रहने वाले हैं और उनका वहां पर एक छोटा सा कच्चा मकान भी था। मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण किया। इनकी तीन बेटी हैं तीनों की शादी हो गई और इनके दो बेटे थे जिसमे एक बेटा का निधन कुछ वर्षों पूर्व हो गया है। वर्तमान में एक बेटा भाग सिंह नाम का हैं वह अब उनके साथ नहीं रहता। उन्होंने बताया की सब कुछ ठीक चल रहा था थोड़ी जमीन भी है लेकिन अचानक कुछ वर्षों पूर्व मकान गिर गया। उन्होंने मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। वही वृद्ध दंपति और उनका बेटा कुछ वर्ष पूर्व ही अपना ग्राम छोड़कर निवास नगर में आकर एक झोपड़ी में बस गए और यहां वहां से मांग कर अपना गुजारा चलाने लगे। समय बीतता गया और लॉकडाउन के बाद स्थिति और भी खराब हो गई। जिसके बाद यह परिवार नगर परिषद के पास एक खंडहर जगह गंदगी के बीच रहने लगा और इसके बाद अब वृद्ध और उसकी पत्नी सम्मो बाई कोर्ट तहसील परिसर के सामने खुले आसमान के नीचे अपना गुजारा कर रहे हैं। कितने अधिकारी, कितने जनप्रतिनिधि यहां से गुजरते हैं पर कोई इनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। न ही कोई सुध ले रहा हैं वही बताया गया की वृद्ध दंपत्ति को निशुल्क राशन, वृद्धावस्था पेंशन सहित शासकीय अन्य कोई मदद नहीं मिलती है। इतना ही नहीं आधार नंबर तक इनके पास नहीं हैं।
इनका कहना
उक्त दंपत्ति का पीएम आवास सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए पंचायत के कर्मियों ने दस्तावेज मांगे थे। ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ मिल सके। इनके पास कोई भी दस्तावेज नहीं हैं। आधार कार्ड, न ही कोई पोर्टल में नाम, खाता नंबर कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज न होने के चलते योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल सका है।
दीप्ति यादव, जनपद सीईओ निवास
एक आदिवासी उम्रदराज वृद्ध दंपति किस कदर परेशानी में जी रहा है उसके जीवन की वास्तविक सच्चाई रूह कपा देने वाली है। आदिवासी संस्कृति के नाम से जिले की पहचान है। सरकार अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं से आर्थिक एवं सामाजिक स्तर हद तक सुधार पर है पर आज भी अनेक आदिवासी ऐसे लाभ से वंचित हैं।
राजीव जायसवाल, समाज सेवी निवास
आपके माध्यम से जानकारी लगी है कि ऐसा कोई परिवार खुले आसमान के नीचे रह रहा है। सीईओ व तहसीलदार से परिवार के संबंध में जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
क्षमा सराफ, निवास एसडीएम