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दीदीयों की भर्ती के विरोध में उतरीं आशाएं

कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने निकाली रैली, दिया धरना

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Hopes of opposing recruitment of sisters

Hopes of opposing recruitment of sisters

मंडला। एकेडमिक एजुकेशन में पिछड़े होने के बावजूद दीदीयों की भर्ती किए जाने के विरोध में जिले की सभी आंगनबाडिय़ों की कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में जबर्दस्त रोष पनप रहा है। अपना विरोध प्रकट करने के लिए शुक्रवार को जिले भर की आंगनबाडिय़ों से कार्यकर्ता-सहायिका एकजुट हुर्ई और शासन की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए रैली निकाली। बंजर क्लब चौराहा स्थित धरना स्थल से शुरु हुई रैली तहसील तिराहा, चिलमन चौक, बस स्टैंड, लालीपुर होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची। इस दौरान शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे ४० वर्षों से अपनी सेवाएं महिला बाल विकास विभाग में दे रही हैं। ज्यादातर कार्यकर्ताएं गे्रजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हंै। ये न केवल आंगनबाडिय़ों में बच्चों को उचित शिक्षा दे रही हैं, बल्कि उनकी नियमानुसार देखभाल करते हुए व्यक्तित्व विकास में योगदान भी दे रही हैं। इसके बावजूद शासन द्वारा १२वीं पास दीदीयों की नियुक्ति की जा रही है। कार्यकर्ताओं सहायिकाओं ने ज्ञापन सांैपते हुए मांग की है कि दीदीयों की नियुक्ति को निरस्त किया जाए और सभी कार्यकर्ताओं को प्री नर्सरी स्कूल अध्यापक बनाया जाए। कार्यकर्ता को एजुकेशन और सीनीयरटी के आधार पर समन्वयक और सुपरवाइजर के पद पर पदोन्नत किया जाए और दीदीयों की सीधी भर्ती पर रोक लगाई जाए। कार्यकर्ता और सहायिकाओं का न्यूनतम वेतनमान के तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएं।

मिड-डे-मील के भुगतान लटका
मण्डला। मिड-डे-मील के समूहों को और स्कूल में भोजन पकाने वाले रसोईयों को समय पर भुगतान नहीं दिया जा रहा है। कई माह का भुगतान अटका हुआ है इसी तरह स्व सहायता समूहों का भुगतान भी नहीं मिल पाया है। रसोईयों के खातों में और समूहों के खातों में राशि प्रतिमाह जमा नहीं की जा रही है। कई-कई माह की राशि तीन-चार माह बीत जाने के बाद जमा की जाती है। रसोईयों और समूहों ने मांग की है कि अनिवार्य रूप से शीघ्र ही लंबित भुगतान की राशि प्रदान की जावे।