24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस दीवाली गोबर के दीपक से सैकड़ों परिवार करेंगे रोशनी

गौउत्पाद निर्माण और विपणन से मिलेगा रोजगार, कला दीर्घा में विक्रय के लिए उपलब्ध

2 min read
Google source verification
इस दीवाली गोबर के दीपक से सैकड़ों परिवार करेंगे रोशनी

इस दीवाली गोबर के दीपक से सैकड़ों परिवार करेंगे रोशनी

इस दीवाली गोबर के दीपक से सैकड़ों परिवार करेंगे रोशनी
मंडला. गाय के गोबर से खाद और बायो गैसे बनने के बारे में तो सभी ने सुना होगा, लेकिन इस दिवाली गोबर के बने दीपक से 4 नबंवर को जिले घरों में रोशनी होगी। इस दीपावली पर अनोखी पहल देखने को मिलेगी। कुछ समाजसेवियों द्वारा इस वर्ष गोबर के दीये बनाने की पहल की है। इस वर्ष शुरूआती तौर पर करीब एक हजार गोबर के दिए बनाने का लक्ष्य रखा है। आने वाले दिनों में गोबर से अनेक प्रकार के उत्पाद बनाने की योजना भी बनाई गई है। जिसके क्रियान्वयन के लिए सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट कार्ड प्रयासरत है।
जानकारी अनुसार कार्ड संस्था के तत्वाधान में एनआरएलएम व मनरेगा के साथ सीएफटी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत गोबर के दीए से इस बार लोगों के घर आंगन को रोशन करने की तैयारी है। पर्यावरण संरक्षण और महिला स्वसहायता समूहों को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में गोबर से बने दीए को अहम माना जा रहा है। रंग-बिरंगे गोबर के ये दीये बाजार में संस्था द्वारा उपलब्ध करा दिए गए है।
संस्था द्वारा गौ पंच गव्य से अनेक उत्पाद बनाने की योजना है। गोबर से बने दीये शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और एक अच्छी पहल भी है। यहां के लोग पशुपालन भी करते हैं जो गाय का गोबर एकत्रित होता है उसे उपयोग में लाकर अन्य चीज बनाई जा सकती हैं और उन पर हल्के रंगों से रंगाई कर उन्हें आकर्षक भी बनाया जा सकता है।
प्लास्टिक का उपयोग होगा कम :
बता दे कि दीए को दीपावली में उपयोग करने के बाद जैविक खाद बनाने में भी उपयोग किया जा सकता है। दीये के अवशेष को गमला या किचन गार्डन में भी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही गोबर के दिये पानी में तैरते है जिसे नर्मदा जी में दीप दान करने के उपयोग में लाया जा सकता है। इन गोबर के दीये के उपयोग से प्लास्टिक के दिए में कमी लाकर नर्मदा को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।

बनाई जाएगी कलात्मक चीजें:
गोबर के दीये के उपयोग से मिट्टी के दीए बनाने और पकाने में पर्यावरण को होने वाले नुकसान के स्थान पर गोबर के दीए को इको फ्रेंडली माना जा रहा है। गांव के स्वसहायता समूह की महिलायें इस काम में सलंग्न हैं और ये गोबर से आकर्षक दीए बनाने के साथ-साथ कई तरह की कलात्मक चीजें बना रही हैं। जिसमें गोबर आधारित दीये, धूपबत्ती, अगरबत्ती, शुभ-लाभ, स्वास्तिक, पेपर-वेट, हवन सामग्री, पंचगव्य साबुन, नेम प्लेट, गमले समेत मूर्तियों का निर्माण किया जाएगा।
व्यवसाय के अवसर बढ़ेगे :
गोबर के उत्पाद से पर्यावरण के साथ ग्राम की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकेगी। इसके लिए कार्ड संस्था प्रयासरत है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में संस्था उनकी मदद कर रही है। साथ ही गायों से संबंधित उद्यमियों, किसानों, महिला उद्यमियों के लिये व्यवसाय के अवसर पैदा करने के अलावा, गाय के गोबर से बने उत्पादों के उपयोग से स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण भी मिलेगा। चीन निर्मित दीयों का पर्यावरण अनुकूल विकल्प प्रदान करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया की परिकल्पना और अभियान को बढ़ावा देगा और पर्यावरणीय क्षति को कम करते हुए 'स्वदेशी आंदोलनÓ को भी प्रोत्साहन देगा।

इनका कहना है
इस गतिविधि से समूह की महिलाओं को अतिरिक्त आय की प्राप्ति होगी एवं नए प्रकार के दीयों को पर्व में शामिल करने से रोचकता आएगी, इसके साथ पर्यावरण पर वितरित प्रभाव नहीं पड़ेगा।
बीडी भैंसारे, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एसआरएलएम, मंडला