
अवैध ईंट भट्टा खत्म कर रहे नदी के तटों का अस्तित्व
मंडला. जिले के उपतहसील बम्हनी व तहसील अंजनियां के अंतर्गत कई स्थानों पर अवैध रूप से ईंट भट्टों का व्यवसाय किया जा रहा है। यह भट्टे न केवल पर्यावरण प्रदूषित कर रहे है, बल्कि इससे मिट्टी का अवैध उत्खनन भी हो रहा है। जहां भट्टे हैं वहां आसपास रहने वाले लोग भी धुआं निकलने के कारण काफी परेशान होते हैं। इधर जिम्मेदार इस तरफ कोई ध्यान नही देते और लगातार इन ईंट भट्टों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। बम्हनी क्षेत्र के टिकरवारा, हिरदेनगर, ठरका, देवगांव आदि ग्रामों में जमकर ईंट भट्टा लगाए जा रह हैं। बंजर नदी, मटियारी नदी, सुरपन नदी के आसपास यह ईंट भट्टा संचालित हो किए जा रहे हैं। जिससे नदी का कटाव भी बढ़ता जा रहा है। अधिक समस्या जिले से लगभग 7 किलो मीटर दूर स्थित टिकरवारा में यहां बंजर नदी के किनारे ईंट, भट्टे का निर्माण कार्य बहुत समय से चल रहा है। जिसके कारण से मिट्टी का बहुत मात्रा में कटाव हो रहा है। बरसात के दिनों में नदी में नदी में उफान आता है तो नदी का पानी घर में घूसने लगता है। यह स्थिति नदी के किनारों के कटने के कारण कुछ वर्षांे में हुई है। ईट भट्टे को पकाने के लिए आग जलाई जाती है जिससे ऊठने वाला जहरीला धुएं से गांव का वातावरण भी दूषित हो रहा है।
इन अवैध ईंट भट्टों का संचालन करने वाले लोगो ने नदी और नाले किनारे स्थित मिट्टी की खदानों में मशीनों से इस कदर खुदाई कर दी गई है कि जगह-जगह गहरी खाईयां साफ दिखाई दे रही हैं। नदी किनारे खुदाई करने से नदी के तटों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। यहां जानना जरूरी होगा कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 के तहत अवैध रूप से ईंट भट्टे लगाना गंभीर अपराध है तथा भू-राजस्व संहिता का भी उल्लंघन है।
ईट-भट्टा संचालन के लिए यह हैं जरूरी शर्तें
ईट भट्टा लगाने के लिए स्थान नगरीय क्षेत्र तथा ग्रामीण बस्ती से दूर होना चाहिए।
पर्यावरण विभाग की मंजूरी होना आवश्यक है।
मिट्टी उत्खनन के लिए खनिज, राजस्व तथा वन विभाग की स्वीकृति लेना पड़ती है।
Published on:
02 Jan 2020 11:53 am
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