
कटरा पंचायत ने शुरू कराया बावली का जीर्णोद्धार, 25 फिट की गहराई में निकल रहा है मीठा पानी
मंडला. जिला मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत कटरा अंतर्गत अति प्राचीन बावली का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। पिछले करीब एक पखवाड़े से यहां काम शुरू हो गया था पहले आसपास उग आई कटीली झाडिय़ों की साफ-सफाई कराई गई, जिसके बाद अब बावली का जीर्णोद्धार शुरू करा दिया गया है। बताया गया कि जीर्णोद्धार का काम इस तरह किया जा रहा है ताकि इस बावली के मूल स्वरूप में कोई अंतर न आए। ग्राम पंचायत कटरा की सरपंच प्रीति मरावी ने बताया कि पिछले कई दिनों से इस बावली के जीर्णोद्धार के लिए प्रयास किए जा रहे थे, इस संबंध में सबसे पहले ग्रामवासियों से चर्चा की गई इसके बाद ग्रामवासियों की सहमति मिलने के बाद पंचायत में प्रस्ताव पास कर इसे स्वीकृति के लिए भेजा गया। स्वीकृति मिलते ही अब जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है।
मनरेगा से लाया जा रहा नए स्वरूप में
बावली का जीर्णोद्धार का काम शासन की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा के तहत किया जा रहा है। पंचायत द्वारा बताया गया कि इस कार्य में करीब 6 लाख 50 हजार का खर्च होगा। यदि जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त राशि की भी मांग की जाएगी। ताकि बावली के जीर्णोद्धार के बाद आने वाले समय में भी यह पूरी तरह सुरक्षित रहे। ग्राम पंचायत कटरा की सरपंच प्रीति मरावी ने बताया कि पंचायत के वार्ड क्रमांक 03 पिछले कई सालों से इस बावली में आसपास के लोगों द्वारा अपने घरों से निकला कचरा डाला जा रहा था इसी के साथ आसपास लगातार अतिक्रमण हो रहे थे। जिसे देखते हुए पंचायत ने निर्णय लिया कि बावली का जीर्णोद्धार कराया जाए, बावली के आसपास जिन लोगों के कच्चे-पक्के अतिक्रमण हैं, उनसे अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया तो उन्होंने बगैर विरोध किए स्वेच्छा से अपने अतिक्रमण हटा लिए गए।
जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गई जल संरचनाएं
मंडला में आज से कुछ साल पहले इस तरह की कई जल संरचनाएं थे कई अति प्राचीन कई कुएं थे जो समय के साथ इन्हें सुरक्षित करने की जगह इन्हें पूर दिया गया इसी के साथ जो प्राचीन इस तरह बावलियां थी उन्हें कूड़ेदान में तब्दील कर दिया गया। ग्राम पंचायत कचरा के ही पूर्व सरपंच हरि शंकर मरावी ने बताया कि गोंडवाना साम्राज्य के वैभव और समृद्धि से जुड़ा इतिहास आज भी अपनी गौरवशाली विरासत को बयां करता है। जिले भर में तत्कालीन परिस्थिति अनुसार जल संरक्षण की अनेक संरचनाएं देखने को मिलती है, लेकिन समय के साथ ये जल संरचनाएं जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। गोंडवाना शासकों ने क्षेत्र में कई बावलियों का निर्माण कराया था। सरपंच प्रीति मरावी ने बताया कि लोगों की जल आपूर्ति के लिए बनाई गई ये बावलियां अब दो प्रकार से लोगों की मदद करेंगी। इनको को जल संरक्षण कर आपूर्ति की जाएगी। इसके साथ ही कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन को लेकर उपजी परिस्थिति में मजदूरों को रोजगार भी मिल रहा है। बावली के विकास के बाद यहां आसपास भूजल स्तर बढऩे की पूरी उम्मीद है।
महज 25 फिट की गहराई में निकल रहा है मीठा पानी
बताया गया कि यह प्राचीन बावली का करीब 25 बाई 25 फिट की लंबाई-चौड़ाई में है इसी के साथ इसकी गहराई भी करीब 20 से 25 फिट बताई जा रही है। इतनी कम गहराई के बाद भी बावली में पानी की झिर निकल रही है, जिर्णोद्धार कार्य के दौरा पंप लगाकर पानी अलग कराया जा रहा है ताकि यहां जमा कापू- मिट्टी को हटाया जा सके। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इस बावली के जल ग्रहण क्षेत्र से जमा पानी बावली के आसपास के भूजल स्तर को उपर उठाएगा। लगातार दो-तीन वर्ष तक भूजल स्तर ऊपर की ओर आने के बाद उम्मीद है। ग्रामवासियों ने बताया कि बावली के अंदर बीच में कुछ मिट्टी हटाते ही पानी की झिर निकलने लगी। यह पानी जहां पूरी तरह साफ दिखाई दे रहा है वहीं यह पानी काफी मीठा भी है।
इनका कहना है।
एतिहासिक धरोहर को सहेजने के प्रयास के तहत बावली का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। जल्द यह बावली अपने पुराने स्वरूप में लौट आएगी।
प्रीति मरावी, सरपंच ग्राम पंचायत कटरा
Published on:
14 Mar 2022 11:45 am
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