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अनाहत नाद को सुनने की पद्धति है क्रिया योग

ध्यान के निकट तीव्र गति से पहुंचने की विधि सिखा रहे शिविर में

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Kriya yoga is the method of listening to Anahata nad

Kriya yoga is the method of listening to Anahata nad

मंडला. आपका हृदय आपके शरीर के अंदर है, प्रति पल धड़कता है, जीवन भर धड़कता है, लेकिन आप उसकी आवाज कब सुन पाते हैं? जब किसी वजह से चौंक उठने पर आपका हृदय तेजी से धड़क उठता है तब, अन्यथा कभी नहीं। या फिर तब, जब आप किसी के सीने पर अपना कान रखते हैं तब उसके हृदय की धड़कन सुन पाते हैं, या फिर मेडिकल उपकरण स्टेथोस्कोप के माध्यम से। हृदय की आवाज अनाहत नाद नहीं है लेकिन फिर भी आप उसे विशेष परिस्थितियों में ही सुन पाते हैं। ऐसे ही आपके अंदर 12 प्रकार के अनाहत नाद गूंजते रहते हैं जिन्हें सुन पाने की क्षमता विकसित करता है क्रिया योग। इसी क्रिया योग की पद्धति सिखाई जा रही है इस शिविर में। उक्ताशय के विचार रखे प्रज्ञान मिशन के स्वामी परिपूर्णानंद महाराज ने। स्थानीय हनुमान घाट प्रांगण मे क्रिया योग एवं ध्यान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें परिपूर्णानंद महाराज द्वारा क्रिया योग से ध्यान करने की पद्धति सिखाई जा रही है। 14 अक्टूबर से शुरु हुआ आयोजन 16 अक्टूबर तक जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि घंटानाद, शंखनाद, वीणा ध्वनि, मृदंग ध्वनि, झिंगुर की आवाज, समुद्र की लहरों की आवाज, हवा की आवाज, मेघ गर्जना ऐसे कई प्रकार के नाद है जिन्हें अनाहत नाद कहते हैं और जब व्यक्ति ध्यान की अवस्था में आगे बढ़ता जाता है तो उसे ये नाद अपने आप सुनाई देते हैं, जिससे चित्त आनंदित होता है, मन प्रसन्न होता है, आपमें नई ऊर्जा का संचार होता है और किसी भी तरह के सकारात्मक कार्य, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो, उसे कर पाने की प्राकृतिक और आध्यात्मिक क्षमता का आपमें धीरे धीरे विकास होता है।
शरीर में सात तरह की अग्नि
स्वामी परिपूर्णानंद ने बताया कि जीवित व्यक्ति का शरीर गर्म होता है क्योंकि शरीर के सातों चक्रों में से प्रत्येक में एक-एक अग्नि होती है। मूलाधार चक्र में दक्षिणा अग्नि, स्वाधिष्ठान में गृहपति, मणिपुर में वैश्वानरण अग्नि, हृदय में आवाह्न अग्नि, कंठ या विशुद्ध चक्र में समिधाभवनाम अग्नि, आज्ञा चक्र में ब्रह्मा अग्नि और सहस्रार चक्र में महाविश्व रूप अग्नि होती है। इनमें से किसी भी चक्र की अग्नि मंद पडऩे पर शरीर में दोष अथवा विकार उत्पन्न होते हैं। सामान्य जन पेट की अग्नि अथवा मणिपुर की अग्नि से ही परिचित हैं। जब पेट की अग्नि मंद हो जाती है तो पेट संबंधी विकार या बीमारियां उत्पन्न होती है। क्रिया योग के माध्यम से शरीर के सभी प्रकार की अग्नि को प्रज्जवलित रखने में मदद मिलती है। पांच प्रकार के तत्व भी शरीर में उपस्थित होते हैं- मूलाधार में पृथ्वी तत्व, स्वाधिष्ठान में जल, मणिपुर में अग्नि, हृदय में वायु और विशुद्ध चक्र में आकाश तत्व उपस्थित होता है। यही कारण है कि शरीर को पांच तत्वों से बना हुआ कहा जाता है।
आज होगी मंत्र दीक्षा
स्वामी परिपूर्णानंद ने शिविर में बताया कि क्रिया योग सीखने से पहले दीक्षा लेना आवश्यक है। इसलिए 15 अक्टूबर की सुबह 7.30 बजे से मंत्र दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। दीक्षा कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद दीक्षित युवक-युवतियों, महिला-पुरुषों को क्रिया योग पद्धति सिखाई जाएगी। उन्होंने कहा कि क्रिया योग भौतिक जीवन को भी सामथ्र्यवान बनाता है क्योंकि इस पद्धति से आपमें क्षमताओं का विकास होता है। यह एक आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक पद्धति भी है जो आपके शरीर में सुप्तावस्था में उपस्थित शक्तियों को जागृत करता है। जो भारतीय विदेशों में निवास करते हैं वे उक्त शिविर में विश्व के विभिन्न देशों जैसे यूएसए, कनाडा, दक्षिण अमेरिका, यूरोप के देशों में फैले अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के बारे में जानकारी ले सकते हैं जहां कई दशकों से क्रिया योग पद्धति सिखाई जा रही है।