
एंटीमार्टम के बिना शहर में बिक रहा मीट
मंडला. शासन के निर्देशों के बाद भी शहर में जगह-जगह खुले में मांस विक्रय किया जा रहा है। कुछ दिनों की कार्रवाई के बाद एक बार फिर कई स्थानों में बगैर सुरक्षा इंतजामों के मांस-अंडे आदि बेचे जा रहे हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ तौर पर अपने आदेश में कहा है कि कहीं भी मांस सामग्री खुले में नहीं बेची जानी चाहिए, इन्हें बंद दुकान या सुरक्षित रूप से टीन शेड में ही बेचा जाए लेकिन मंडला जिले में मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है।
नहीं की जाती जांच
खाद्य एवं औषधि विभाग से मिली जानकारी अनुसार जिले में मीट-मटन, अंडे की करीब 250 से 300 दुकानों के रजिस्ट्रेशन हैं। जबकि वास्तविकता में इससे कई गुना संख्या में दुकानें संचालित हो रही है इसका यही मतलब निकाला जा सकता है कि अधिकांश दुकानें नियमत: रजिस्ट्रेशन के नहीं संचालित हो रही हैं। जानकारों का कहना है कि मांस विक्रय जहां होता है वहां स्लाटर हाउस होना चाहिए ताकि किसी पशु के वध के पहले उसकी पूरी तरह जांच हो सके लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
ऐसे में इन दुकानों से मिलने वाला मीट-मटन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है ऐसी संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता। निरीक्षक गीता टांडेकर का कहना है कि समय-समय में सेम्पल जांच के लिए भेजे जाते हैं। कच्चे मीट की जगह हॉटलों से मिलने वाले बने हुए मीट के सेम्पल ज्यादातर लिए जाते हैं। वहीं शिकायत होने पर कच्चे मीट की भी जांच के लिए सेम्पल लेने की सुविधा है।
मिलावटी मीट की बढ़ी आशंका
कुछ नागरिकों ने बताया कि बाजार में जो मीट-मटन बेचा जाता है, खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा कभी उसकी जांच नहीं की जाती है। जिसका फायदा मीट बेचने वाले व्यापारी या व्यापारियों को मीट पहुंचाने वालों द्वारा उठाया जाता है। जिसमें कई बार बीमार मवेशियों का भी मीट की सप्लाई कर दी जाती है। जानकारी के अनुसार जानवर काटने से पहले उनका एंटीमार्टम कराना जरूरी है। ताकि कोई बीमार जानवर काटकर उसका मीट बाजार में न बेचा जाए। ऐसा मीट खाने से लोग फूड पायजनिंग सहित अन्य गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं लेकिन नगरपालिका ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई न कर हाथ पर हाथ धरा बैठा है। बीमार जानवरों के मीट के सेवन से लोगों को पेट में कीड़े, डायरिया, टीबी, कोलाइटिस, पीलिया आदि रोग हो सकते हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों को जूनोटिक डिसीज जानवरों में होने वाली बीमारी होती है। ये सभी बीमारियां उसका मीट खाने वाले इंसान को हो सकती हैं। इसलिए जानवरों का एंटीमार्टम जरूरी है। जिला प्रशासन को चाहिए कि शहर में इस तरह की दुकानें सुनिश्चित की जाएं जहां एंटीमार्टम के बाद निकला मांस ही बिके।
Published on:
08 Jan 2024 12:38 pm
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