
सायबर ठगबाजों का नया फंडा, शिकारियों को कर रहे गुमहार,सायबर ठगबाजों का नया फंडा, शिकारियों को कर रहे गुमहार,सायबर ठगबाजों का नया फंडा, शिकारियों को कर रहे गुमहार
मंडला. साइबर ठगों ने ठगी के नए नए-नए तरीके खोज निकाले हैं। कभी ठग लिंक भेजकर लोगों के अकाउंट से रुपए उड़ा देते है तो कभी मोबाइल लोन एप के माध्यम से शिकार बनाते है। अब साइबर ठगों ने एक और नया तरीका निकाल लिया है। वे आरोग्य सेतु या बीएसएनएल अधिकारी बनकर अपने शिकार को फोन कर रहे हैं और बातों में उलझाकर पूरी जानकारी लेकर उसे चूना लगा देते हैं। इसके अलावा नौकरी का झांसा देकर भी रुपए ऐंठ लेते हैं। इसलिए यदि आपके पास किसी अनजान नंबर से कोई कॉल आए और टू-कॉलर पर नंबर किसी बैंक से जुड़ा हुआ दिखे तो अलर्ट रहिए क्योंकि कई लोग इस गैंग का शिकार हो चुके है। पहले तो यह गेंग लोगों को अपने झांसे में लेती है। इसके बाद बहला फुसलाकर उनके बैंक खातो से संबंधित सभी जानकारी एकत्रित करती है। इसके बाद वह उनके एकाउंट से पैसे पार कर देती है। आए दिन ऐसे मामले थानाें में पहुंच रहे हैं।
ऐसे बना रहे शिकार
जिले में बीते सात वर्ष में इस तरह से ठगी के तीन दर्जन से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं। बहुत से मामले में तो लोग पुलिस तक पहुंच भी नहीं पाते हैं। ऑनलाइन बिजनेस के चक्कर में फंसाकर ठगी की घटना तो अच्छे खासे पढ़े लिखे लोगों के साथ भी हो चुकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शातिर ठग किसी को भी शीशे में उतार कर चूना लगा सकते हैं। जानकारों की मानें तो लोगों को इस संबंध में जागरूक करने की बहुत जरूरत है। क्योंकि आमजन तकनीक के फायदे तो जानते हैं। मगर यह उनके लिए किस कदर नुकसानदेह साबित हो सकती है, इससे वह अनजान हैं। इसी का फायदा उठाकर ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दिया जाता है। ठगी का शिकार होने वाले कुछ लोग लालच, आसान तरीके से पैसे प्राप्त करने आदि के चलते ठगों के जाल में फंस जाते हैं। किसी को डेबिट कार्ड अपडेट कराने को तो किसी को बैंक खाता वेरिफिकेशन कराने का झांसा देकर ठगा गया है। ठग वारदात में इस्तेमाल मोबाइल नंबर भी फर्जी तरीके से लेते हैं।
चिकित्सा अधिकारी से लाखों की ठगी
कुछ माह पूर्व ही सेवानिवृत चिकित्सा अधिकारी के बैंक खाते से ठगों ने लगभग 35 लाख रुपए पार कर दिए। इस घटना से पीड़ित के जिन्दगी भर की कमाई चली गई है। जानकारी के अनुसार जिले के सरकारी अस्पताल से प्रथम वर्ग चिकित्सा अधिकारी पद से सेवा निवृत्त हुए डॉ जीएस कोरी के जीवन की पूरी कमाई स्थानीय स्टेट बैंक आफ इंडिया के खाते में सुरक्षित रखी हुई थी। लेकिन एक अनजान फोन काल से उनके खाते की राशि महज चार दिन में इंटरनेट बेंकिंग के जरिये निकाल ली गई है। बताया गया कि एसबीआई बैंक के नाम से पीड़ित के पास मैसेज आया था। जिसमें केवाइसी अपडेट करने की बात कही गई। टोल फ्री नंबर भी दिया गया। कोरोना काल का बहाना बताकर एक मात्र ऑनलाइन अपडेट कराने का विकल्प बताया गया। डॉक्टर ने बैंक मैनेजर समझकर सायबर ठग को केवाइसी अपडेट करने के लिए ओटीपी दे दिया। जिसके बाद बचत खाते से 33 लाख 61 हजार 354 रुपए निकल गए।
कहा मोबाइल सिम ब्लॉक हो जाएगा
मंडला शहर निवासी अधिवक्ता नवनीत बैरागी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले उनके मोबाइल पर 9425328382 से फोन आया और कहा गया कि कुछ समय बाद आपका सिम ब्लॉक हो जाएगा। क्योंकि सिम पुराना हो चुका है। आपके मोबाइल पर एक ओटीपी नंबर आएगा उसे बताएं। जिसके बाद आपकी सिम रेगुलर रहेगी, वरना बंद हो जाएगी। सिम पुरानी हो चुकी है, चूंकि अधिवक्ता समझदार थे, उन्होनें अपने छोटे भाई से बातचीत कराई। जिस पर उससे नाम पूछा गया तो उसने स्वयं को भोपाल बीएसएनल अधिकारी होना बताया ओटीपी नहीं देने पर अभ्रद भाषा का प्रयोग कर धमकाने लगा।
ये बरते सावधानियां
अनजान नंबर से आई कॉल को रिसीव न करें।
अनजान नंबर से कॉल करने वाले को कोई जानकारी न दें।
मोबाइल पर आए किसी मैसेज के लिंक को क्लिक न करें।
झांसे में आकर किसी को अपने एकाउंट, आईएफएससी कोड न शेयर करें।
बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने वाले को अपने एटीएम पिन या सीयूवी कोड न बताएं।
यदि ठगी का शिकार हो जाएं तो तुरंत अपने बैंक और पुलिस को सूचना दें। दूसरे जिले के साथ अपने जिले में भी विभिन्न मोबाइल एप और विभागों के अधिकारी बनकर ठगी करने के मामले सामने आ रहे हैं। लोगो को सतर्क रहने की आवश्यकता है। अंजान एप और मोबाइल नंबर पर ओटीपी व बैंक से संबंधित जानकारी शेयर न करें। अगर ठगी का शिकार होते हैं तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
यशपाल सिंह राजपूत, पुलिस अधीक्षक मंडला
मंडला स्वामी सीता राम वार्ड निवासी एडवोकेट अवनीत बैरागी एडवोकेट हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास 13 जुलाई को एक युवक मोबाइल नंबर 9528962967 से फोन आया। उसने स्वयं को आरोग्य सेतु अधिकारी बताते हुए पूछा कि आपको बूस्टर डोज लग गया है। उन्होंने बताया कि लग गया है, तो कहां लगा है। निजी अस्पताल में 350 रुपए देकर लगवाया है। फिर वह कहता है कि इसका सर्टिफिकेट आ गया है में आरोग्य सेतु से बोल रहा हूं। उन्होंने बोला कि नहीं तो कहने लगा कि सरकारी अस्पताल में टीका लगवाने पर हाथों हाथ सर्टिफिकेट मिलता है प्राइवेट अस्पताल में टीका लगवाया है तो सर्टिफिकेट के लिए ओटीपी नंबर देना होगा। वह ओटीपी मांगने लगा। इंकार करने पर अभद्रता से बोलना शुरू कर दिया।
Published on:
21 Jul 2022 03:28 pm
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