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ट्रांसपोर्ट नगर के लिए नहीं हुई पहल, शहर में गाड़ियों के आने से यातायात होता है बाधित

बारिश के दौरान लोडिंग-अनलोडिंग में होती है दिक्कत

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ट्रांसपोर्ट नगर के लिए नहीं हुई पहल, शहर में गाड़ियों के आने से यातायात होता है बाधित

ट्रांसपोर्ट नगर के लिए नहीं हुई पहल, शहर में गाड़ियों के आने से यातायात होता है बाधित

मंडला. शहर में ट्रांसपोर्ट नगर की मांग पिछले कई सालों से की जा रही है लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। यहां तक कि जनप्रतिनिधियों ने ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना के लिए भी कोई खासी पहल नहीं की। फिलहाल नगरपालिका कार्यालय के बाजू में खाली मैदान में बाहर से ट्रांसपोर्टरों के ट्रक यहां खड़े किए जा रहे हैं और यहां छोटे वाहनों से सामान को संबंधित व्यापारी की दुकान तक पहुंचाया जाता है। कुछ ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि खुले मौसम में तो कोई परेशानी नहीं होती लेकिन बारिश के समय काफी परेशानी होती है ऐसा सामान जो हल्की बारिश में खराब हो सकता है। इसे सुरक्षित व्यापारी तक पहुंचाना कठिन हो जाता है। माल की लोडिंग अनलोडिंग का कोई स्थायी इंतजाम नहीं है। इससे व्यापार पर काफी असर पड़ता है। ट्रांसपोर्टर अपने ट्रक और मेटाडोर को सड़क किनारे खड़ा करने पर मजबूर हैं। इससे अन्य समस्याएं खड़ी हो रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जिले में ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना के लिए कई बार व्यापारियों व ट्रांसपोर्टरों ने आवाज भी उठाई, लेकिन यह आवाज अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। अगर यहां ट्रांसपोर्ट के लिए कोई स्थल बन जाए जहां तो ट्रक से माल उतारने में काफी सहूलियत होगी। इससे ट्रांसपोर्ट के बिजनस में भी काफी वृद्धि होगी।

बगैर ई-वे बिल हो रहा सामान का परिवहन

शहर से आवागमन के साधन बढ़ने के कारण व्यापार के लिए भी कई रास्ते खुल गए हैं। दूसरे जिलों से लेकर प्रदेश के बाहर से भी बड़ी मात्रा में तरह-तरह का सामान शहर में ट्रांसपोर्ट के जरिये पहुंच रहे हैं। सूत्रों की माने तो इसमें बड़ी मात्रा में कच्चे में सामान का ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है जिससे राजस्व का रोजाना हजारों से लेकर लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। इसका बड़ा कारण यह बताया जा रहा है जो वाहन दूसरे जिलों से सामग्री लेकर पहुंचते है उनकी जांच बीच रास्ते में नहीं होती है जिसका फायदा व्यापारियों द्वारा उठाया जा रहा है। 50 किमी से अधिक दूरी और 50 हजार से अधिक का सामान ट्रांसपोर्ट करने के लिए ई-वे बिल जनरेट करना होता है। यह बिल सामान देने वाला व्यापारी ऑन लाइन पोर्टल के माध्यम से जनरेट करते हैं। जिसकी एक कॉपी ट्रांसपोर्ट करने वाले वाहन चालक के पास भी होना चाहिए ताकि बीच रास्ते में जांच होने पर उसे दिखा सके लेकिन जांच नहीं होने से जहां बगैर ई-वे बिल से रोजाना लाखों का सामान का परिवहन हो रहा है। दवाई-मेडिकल उपकरणों को छोड़कर शेष सभी वस्तुओं को एक जिले से दूसरे जिले में भेजने के लिए ई-वे बिल अनिवार्य कर दिया गया है। ई-वे बिल जारी करने की जिम्मेदारी वस्तु को भेजने वाले की है यदि किसी वजह से माल भेजने वाले के पास जीएसटीएन का पंजीयन न हो तो माल खरीदने वाले को ई-वे बिल जारी करना होगा।