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मौसम की बेरूखी से रोपा के साथ मुरझाने लगे किसानों के चेहरे, खेतों में सूख गया बारिश का पानी

धान के खेत में जगह-जगह दरारें पडऩे लगी है

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Rain water dried in field

मौसम की बेरूखी से रोपा के साथ मुरझाने लगे किसानों के चेहरे, खेतों में सूख गया बारिश का पानी

मंडला। पिछले एक हफ्ते से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं होने से धान की फसल पर संकट खड़ा हो गया है। धान के खेत सूखने की कगार पर हैं। जानकार किसानों का कहना है कि यदि यही हालात कुछ दिन और रहे तो धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। कई जगह फसल को नुकसान भी होने लगा है। कम बारिश होने की वजह से हालात ये हैं कि ट्यूबवेल भी पानी कम दे रहे हैं। इसके चलते धान के खेत बगैर पानी के हैं और जगह-जगह दरारें पडऩे लगी हैं।


अब तक 326 मिमी बारिश हुई है
जिले में ज्यादातर हिस्से में धान की फसल बोई जाती है। इस साल अब तक जिले में अब तक 326 मिमी. औसत बारिश दर्ज की है। बारिश नहीं होने से किसान की चिंताएं बढ़ गई हैं। किसानों के मुताबिक 8 से 10 हजार रुपए प्रति एकड़ खर्च धान लगाने में होता है। धान के अलावा किसानों ने सोयाबीन, मक्का, उड़द आदि भी लगाई है। हालांकि सोयाबीन और उड़द की तुलना में धान का रकबा ज्यादा है। जबकि इसी अवधि तक पिछले वर्ष 377 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई थी। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 51 मिलीमीटर कम वर्षा दर्ज की गई है। जहां धान की बोवनी पहले हो गई थी वहां अब आवारा मवेशी नुकसान पहुंचा रहे हैं।


उतर गया भूजल स्तर
ग्राम खगुआ के किसान अमर सिंह ने बताया कि धान की रोप लगा दी है, लेकिन खेतों में पानी नहीं है। बारिश में ट्यूबवेल चला रहे हैं। हाल ये है कि अब ट्यूबवेल में भी पानी कम आ रहा है। इसके चलते धान के खेतों में दरारें पडऩे लगी हैं। बारिश के पानी की भरपाई ट्यूबवेल नहीं कर सकते है। धान की फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। बारिश नहीं होने से किसानों के खेत अब सूखने लगे है, 4-5 दिन और पानी नहीं गिरा तो फसल खेतों में ही सूख जाएगी।


बोवनी भी पिछड़ी
10 दिन पहले हुई बारिश के बाद अब जिले में बारिश एकदम से रुक गई है। इससे बोनी का काम पिछड़ गया है। वहां जिन किसानों ने बारिश के भरोसे पहले बुआई कर दी थी, अब उन्हें बीज खराब होने का डर सताने लगा है। बारिश इस बार जिले के किसानों को धोखा दे रही है। कई जगहों पर किसानों ने 15 दिन पहले ही बारिश होने पर बुआई कर दी थी। इसके बाद अचानक से बारिश बंद हो गई। ऐसे में जो बीज डाले गए थे, उनके खराब होने का अंदेशा खड़ा हो गया है। बूंदाबांदी होती है तो उसे खेत सोख लेता है। पठार क्षेत्र के खेतों में नमी नहीं होने से अंकुरण नहीं होने की भी समस्या आ रही है। वहीं जिन किसानों ने बारिश के बाद मचाई करके बोनी करने की योजना बनाई थी, वे अब भी आसमान को ही ताक रहे हैं। मचाई के लायक खेत में पानी नहीं भरने से उनकी बुआई पिछड़ गई है।


रुकी बारिश, बढ़ा तापमान
मंगलवार को अधिकतम पारा 31 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री दर्ज किया गया है। जबकि एक सप्ताह के पहले 6 जुलाई को बारिश होने से दिन का पारा 26 डिग्री तक आ गया था। जिले में इस वर्ष 16 जुलाई के दौरान 326 मिमी. औसत वर्षा दर्ज की गई है जबकि इसी अवधि तक पिछले वर्ष 377 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई थी। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 51 मिलीमीटर कम वर्षा दर्ज की गई है। अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष मंडला तहसील में 410.4 मिमी., नैनपुर में 393.1, बिछिया में 372, निवास में 309.6, घुघरी में 273.5 तथा नारायणगंज में 198.1 मिमी. कुल वर्षा दर्ज की गई।