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आग धधकने का आया मौसम

लगातार हो रही आगजनि की दुर्घाटनाएं

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आग धधकने का आया मौसम

आग धधकने का आया मौसम

मंडला । जिले में रवि फसल पक कर तैयार हो गई है। जिले के कुछ स्थान ऐसे भी है जहां गेहुं की फसल खेतों से कटकर खलिहान तक पहुंचने भी लगी है, ऐसे में किसानों की गाड़ी मेहनत से उगाई गई फसलों पर बीते वर्षो की भांति इस बार भी आग लगने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में हालातों पर अंकुश लगाने या फसलों को नुकसान से बचाने के लिए जिले के दमकल वाहन पूरी तरह से मुस्तैद नजर नहीं आ रहे हैं उल्लेखनीय है कि नगर पालिका मंडला में 6 अग्निशामक वाहन है जो कई वर्ष पुराने हो चुके हैं गर्मी आने से पूर्व नपा द्वारा इनकी फिटनेस भी जांच नहीं की जाती है नगर पालिका की यह अनदेखी का खामियाजा किसानों तथा आम जनों को आगजनी में माली तौर पर नुकसान के रूप में चुकाना पड़ता है गौरतलब है कि पिछले पांच वर्षों में फसलों में आग लगने के साथ ही घरों एवं अन्य जगहों पर आग लगने की 417 घटनाएं सामने आई हैं प्रतिवर्ष औसतन खेत तथा खलिहान में आग से फसलों के खाक होने के दर्जनों हादसे होते आ रहे हैं बावजूद ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए प्रशासन पहले से तैयारी करने में कोताही बरत रहा है।
सकरी गलियों में नहीं पहुंच पाती अतिआवश्यक सेवा
जिला मुख्यालय में कई क्षेत्र ऐसे है जहां किसी दुर्घटना होने पर अतिआवश्यक सेवा जैसे फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस की गाडिय़ा मौके पर नहीं पहुंच पाती है। ऐसी स्थिति में कई बार हालात भयंकर साबित होते है और जान, माल का नुकसान बड़ पैमाने पर उठाना पड़ता है। ऐसे मे शहर के अंदर रिहायशी इलाके मे है जिनसे आमजन को खतरा है। शहर में ऐसे संवेदनशील स्थानो की पड़ताल में सर्वाधिक खतरा तीन पेट्रोल पंपों से है। एक शहर के लालीपुर और स्टेट बैक के पास तो तीसरा शासकीय बंगलो के बीचो बीच पुलिस विभाग का पेट्रोल पम्प स्थित है। गौरतलब है कि शहर के कई इलाके तो आग की दहलीज में हैं परंतु किसी ने भी स्वंय से अपने गोदाम व होटलों का रजिस्ट्रेशन या पंजीयन नहीं कराया है और न ही कोई जानकारी नगर पालिका को दी है। जानकारी के अनुसार शहर के कई इलाके आगजनी की घटना के मद्देनजर काफी खतरनाक है। ऐसे इलाकों में अगर आगजनी होती है तो न तो दमकल वहां पहुंच पाएगी और न ही कोई सुविधा लोगों को मौंके पर मिल पाएगी। ऐसे में इन क्षेत्रों में कभी भी कोई बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। जानकारी के मुताबिक नगर के श्रीराम वार्ड, डॉ राधाकृष्णनन वार्ड, इंद्रा जी वार्ड एवं नर्मदा जी वार्ड सहित आज भी कई ऐसी बस्तियां है जहां दमकल वाहन तो क्या एक छोटा चार पहिऐ का वाहन निकलने मे काफी दिक्कते होती है कई इलाके ऐसे हें जो संकरे है या हेवी ट्रेफिक के कारण दमकल के वाहनों को हादसा हो जाने से भारी मशक्कत करनी पड़ सकती है। इसी तरह शहर के अंदर ही अवैध रूप से कई गोदाम व फैक्ट्री संचालित हैं। जहां दमकल के वाहन का पहुंचना मुमकिन नहीं है। ऐसे में कहा जा सकता है कि शहर के कई इलाके आग की दहलीज पर हैं और कभी भी आगजनी में ऐसे जगहों पर लोगों को बचा पाना किसी मुश्किल समस्या से कम नहीं हैं।
घनी बस्ती में पेट्रोल पम्प
शहर के अंदर रिहायसी क्षेत्रों व घनी बस्तियों के बीच तीन पेट्रोल पम्प संचालित हैं। कोतवाली के पास, लालीपुर और स्टेट बैक के पास स्थित है। नियम के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में पेट्रोल पम्पों का संचालन गैर कानूनी है, परंतु सारे नियमों को धता बताते हुए उन्हें पेट्रोल पम्प का लाईसेंस दिया गया है। कभी भी इन पेट्रोल पम्प में कोई बड़ा हादसा होता है तो आसपास के कई घर तबाह व बर्बाद हो सकते हैं। प्रशासन द्वारा नगर के निवासियों की सुरक्षा के लिए किसी प्रकार का कदम नहीं उठाना लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है।
बॉक्स
पिछले ५ साल में 417 आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई है। जानकारी अनुसार नगर पालिका मण्डला द्वारा दमकल वाहन की सेवा नगर पालिका क्षेत्रांतर्गत 24 वार्डो में फ्री दी जाती है। नगर पालिका मंडला में कुल 6 वाहन है जिसमें से ५ बडे वाहन एवं 1 छोटा वाहन है जिसके भरोसे पूरे क्षेत्र की घटनाओं पर नियंत्रण का दावा किया जाता है। नगर पालिका क्षेत्र के बाहर दमकल वाहन भेजने पर सीमा शुल्क नगर पालिका किलोमीटर के हिसाब से लिया जाता है।