मंडला. आसफ खां के मकबरे में असामाजिक तत्वों की नजर पड़ गई है। यहां मकबरे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिसकी सुरक्षा के लिए पुरातत्व विभाग ने सुरक्षा कर्मी नियुक्त किया है। हालांकि यह सुरक्षा कर्मी सप्ताह के कुछ दिन ही यहां उपस्थित रहेगा। शेष दिन सिमरिया गढ़ी में स्थित प्राचीन इमारतों की सुरक्षा भी इसे करनी होगी। आसफ खां के मकबरे में पहले से ही अतिक्रमण के कारण पर्यटक व नागरिकों की पहुंच से दूर है। यहां तक मार्ग ना होने से कोई भी यहां जाना पंसद नहीं करता है। जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं। प्राचीन धरोहर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार मंडला-जबलपुर मार्ग पर ग्राम पंचायत बिंझिंया के अंतर्गत आसफ खां का मकबरा अतिक्रमण की चपेट में है। बताया गया कि आसफ खां एक उपाधि है जो मुगलकाल में मुगल सेना के सेनापतियों को दी जाती थी। पुरातत्व संग्रहालय से मिली जानकारी के अनुसार सन 1564 में मुगल सम्राट ने अपने प्रमुख सेनापति अब्दुल मजीद को आसफ खां प्रथम की उपाधि से नवाजा था और उसे गोंडवाना राज्य मंडला पर आक्रमण के लिए भेजा था। उस वक्त मंडला पर रानी दुर्गावती का शासन था। युद्ध में रानी दुर्गावती को शहादत मिली। गौंड राजाओं ने अपना राज्य बचाने के लिए अकबर से यह समझौता कर लिया कि वो हर साल अकबर को अपने राज्य से कर वसूल कर देंगे। इस शर्त पर सम्राट अकबर राजी हो गया और उसने अपने सेनापति आसफ खां प्रथम को मंडला में रहने का आदेश दे दिया। आसफ हर साल गौंड राजाओं से कर वसूल कर अकबर को पहुंचाने लगा। लम्बे समय बाद आसफ खां की मौत हो गई और अकबर ने अपने सेनापति को दफनाकर वहां उसके नाम का मकबरा बनवा दिया। जिला प्रशासन की पहल के बाद ग्राम पंचायत बिंझिया अंतर्गत आसफ खां के मकबरे का जीर्णोद्धार हाल ही में किया गया। जीर्णोद्धार पुरातत्व विभाग द्वारा कराया गया। मकबरा के आसपास बाउंड्रीवॉल बनाई गई है और रैलिंग लगाई गई है। इसके बाद मकबरा में जहां सुधार कार्य की जरूरत थी टूटफूट हुई है वहां मरम्मतीकरण कराया गया। नीचे चीप भी लगाए गए। लेकिन देखरेख के अभाव में असामाजिक तत्वों ने बाउंड्रीवॉल की रैलिंग व मकबरे में लगी चीप को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। जिसकी शिकायत कोतवाली थाना में भी की गई है। पिेट्रोल पंप के पास पर्यटन विभाग ने मुख्य मार्ग में बोर्ड लगा था उसे भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। मकबरे तक उचित मार्ग नहीं होने के कारण सैलानियों का पहुंचना मुश्किल है। यहां तक कि बहुत से शहरवासियों को इस बात की जानकारी भी नहीं कि यहां मुगलकालीन सेनापति का मकबरा भी है जिसका ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्व है।