
मंडला. अभी तक निजी चिकित्सकों को यह अनुमति नहीं थी कि वे किसी टीबी मरीज का इलाज कर सकें। लेकिन टीबी रोग उन्मूलन कार्यक्रम में किए जा रहे फेरबदल के अनुसार, निजी चिकित्सको को टीबी मरीज के इलाज की अनुमति दे दी गई है। सिर्फ अनुमति ही नहीं, इसके लिए निजी चिकित्सकों को 100 रुपए की राशि का भुगतान भी किया जाएगा। यह राशि डायरेक्ट बेनीफिट ट्रंासफर के माध्यम से प्रदान की जाएगी। जानकारी के अनुसार, पूरे देश को २०२५ तक टीबी से मुक्त किया जाना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को टीबी उन्मूलन का लक्ष्य दिया गया है। इसी कवायद में अब समस्त निजी चिकित्सकों व नर्सिंग होम को टीबी रोग के लिए इलाज की अनुमति दे दी गई है। उक्त कार्यक्रम में तेजी लाने के लिए निजी चिकित्सकों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
जिला अस्पताल स्थित क्षय रोग नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह राशि प्राप्त करने के लिए निजी चिकित्सकों को नए टीबी रोगियों की सूचना जिला क्षय अधिकारी को देनी होगी। ऐसे सभी निजी चिकित्सकों को डायरेक्ट बेनीफि ट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 100 रुपए दिए जाएंगे। यह योजना 1 अप्रैल 2018 से लागू हो रही है।
आंकड़े बताते हैं कि प्रति एक लाख में 210 क्षय रोगी होते हैं। भारत में दुनिया के एक चौथाई क्षय रोगी है। देश के एक हजार क्षय रोगी रोज मर जाते हैं यानि हर दो मिनट में तीन रोगी की मृत्यु हो रही है। बजट में टीबी रोगियों को 500 रुपए प्रतिमाह देने को ऐलान पहले ही हो चुका है। क्षय रोग चिकित्सक डॉ आरएल बंसोड़ का कहना है कि इस योजना से टीबी रोगी उचित पोषण आहार की व्यवस्था कर सकते हैं। जांच व इलाज के लिए आने-जाने से संबंधित वाहन किराया भी दे सकेंगे। इससे भी टीबी रोग उन्मूलन में तेजी आएगी।
क्षय कार्यक्रम पर सरकार बहुत जोर दे रही है। निजी चिकित्सकों को कार्यक्रम से जोडऩा रोगी के इलाज और क्षय उन्मूलन में सहायक होगा। समस्त नर्सिंग होम संचालक एवं निजी चिकित्सक अब इलाज कर सकते हैं।
डॉ एसएन सिंह, सीएमएचओ, मंडला।
Published on:
25 Feb 2018 07:20 pm
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