
हवन, यज्ञ और विद्यारंभ संस्कार के साथ मनाया बंसत उत्सव
मंडला. बसंत पंचमी महोत्सव के अवसर पर जगह-जगह धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिरों के साथ शासकीय व निजी विद्यालयों में विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन कर बसंत पंचमी मनाई गई।
जिला मुख्यालय के सिविल लाइन स्थित गायत्री मंदिर में सरस्वती पूजन एवं पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ के साथ ही पुंसवन व विद्यारंभ संस्कार भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह विधिवत मंत्रोपचार व युग संगीत के साथ गायत्री महायज्ञ व सरस्वती पूजन से हुई। विद्यादायिनी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ ही बच्चों का विद्यारंभ संस्कार कराया गया। गायत्री परिवार के जयंत वर्मा ने बताया कि पौराणिक मान्यतानुसार गर्भवती मां को आध्यात्म से विशेष रूप से जुड़े रहना चाहिए, जिससे आने वाली संतान संस्कारवान बनें। इस निमित्त पुंसवन संस्कार करने की परंपरा है। बसंत पंचमी पर गायत्री पीठ में गर्भवती महिलाओं का पुंसवन संस्कार कराया गया। दोपहर को सामूहिक भोग-भंडारा का आयोजन हुआ। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इसमें खिचड़ी का भोग सभी को दिया गया।
श्रीराम शर्मा आचार्य का आध्यात्मिक जन्मदिवस
बसंत पंचमी पर गायत्री परिवार अपने संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का आध्यात्मिक जन्मोत्सव भी मनाता है। गायत्री पीठ के सदस्यों ने बताया कि 1926 में पं श्रीराम शर्मा आचार्य ने हिमालय में तपस्या के दौरान साढ़े 7 सौ वर्षीय गुरु सर्वेश्वरानंद के दर्शन हुए थे। उन्हें एक ज्योति की लौ में दर्शन हुआ था। तब से आचार्य ने इस दिन को ही अपना जन्मदिन माना और तब से पर्व पर उनका जन्म दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
मंडला. बसंत पंचमी महोत्सव के अवसर पर जगह-जगह धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिरों के साथ शासकीय व निजी विद्यालयों में विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन कर बसंत पंचमी मनाई गई।
जिला मुख्यालय के सिविल लाइन स्थित गायत्री मंदिर में सरस्वती पूजन एवं पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ के साथ ही पुंसवन व विद्यारंभ संस्कार भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह विधिवत मंत्रोपचार व युग संगीत के साथ गायत्री महायज्ञ व सरस्वती पूजन से हुई। विद्यादायिनी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ ही बच्चों का विद्यारंभ संस्कार कराया गया। गायत्री परिवार के जयंत वर्मा ने बताया कि पौराणिक मान्यतानुसार गर्भवती मां को आध्यात्म से विशेष रूप से जुड़े रहना चाहिए, जिससे आने वाली संतान संस्कारवान बनें। इस निमित्त पुंसवन संस्कार करने की परंपरा है। बसंत पंचमी पर गायत्री पीठ में गर्भवती महिलाओं का पुंसवन संस्कार कराया गया। दोपहर को सामूहिक भोग-भंडारा का आयोजन हुआ। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इसमें खिचड़ी का भोग सभी को दिया गया।
श्रीराम शर्मा आचार्य का आध्यात्मिक जन्मदिवस
बसंत पंचमी पर गायत्री परिवार अपने संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का आध्यात्मिक जन्मोत्सव भी मनाता है। गायत्री पीठ के सदस्यों ने बताया कि 1926 में पं श्रीराम शर्मा आचार्य ने हिमालय में तपस्या के दौरान साढ़े 7 सौ वर्षीय गुरु सर्वेश्वरानंद के दर्शन हुए थे। उन्हें एक ज्योति की लौ में दर्शन हुआ था। तब से आचार्य ने इस दिन को ही अपना जन्मदिन माना और तब से पर्व पर उनका जन्म दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
Published on:
15 Feb 2024 12:53 pm
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