मंडला

बलगम की जॉच तक सीमित है विभाग

2025 तक टीबी मुक्ति करने का है लक्ष्य

2 min read
Mar 27, 2022
बलगम की जॉच तक सीमित है विभाग

मंडला. आदिवासी बाहुल्य जिले में गरीबी, नशा और कमजोर इम्यूनिटी की वजह से टीबी रोग तेजी से बढ रहा है। हर रोज नए मरीज मिल रहे हैं। हड्डी, पेट और ब्रेन को टीबी रोग जकड़ रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग सिर्फ बलगम की जांच कराने तक सीमित है। कई महत्वपूर्ण जांच नहीं हो रही है। मरीजों की बायोप्सी जांच के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। स्थिति यह है कि समय पर जांच न होने की वजह से टीबी रोग बढ़ जाता है और मरीजों की मौत हो जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, कई डॉक्टर बार मरीजों की टीबी रोग की मरीजों पहचान कर पाना भी मुश्किल हो रहा है। पिछले पांच वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, जिले में लगातार टीबी जांच न होने के नए मरीज चिन्हित हुए हैं। 2018 टीबी रोग में 1876 टीबी रोग के मरीज मिले थे। 2021 की स्थिति में 1526 टीबी के मरीज मिले है। जबकि प्रशासनिक स्तर पर कई कार्य किए जा रहे है। लेकिन इसका असर जमीन पर दिखाई नहीं देता है। विभाग की माने तो स्वास्थ्य विभाग का अमला मैदानी स्तर पर गांव-गांव जाकर लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक करने के साथ ही विभिन्न प्रकार के शिविर लगाए जाते है। लेकिन इन सब का असर दिखाई नहीं देता है।
संपर्क में आने वाले को दी जा रही टीपीटी
अच्छा खान-पान न करने वालों को टीबी ज्यादा होती है क्योंकि कमजोर कमजोर इम्यूनिटी से उनका शरीर बैक्टीरिया का वार नहीं झेल पाता। यह किसी को भी हो सकता है क्योंकि यह एक से दूसरे से संक्रमण से फैलता है। स्मोकिंग करने वाले को टीबी का खतरा ज्यादा होता है। डायबीटीज के मरीजों, स्टेरॉयड लेने वाले समेत जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उन्हें यह बीमारी जल्द ही अपनी चपेट में ले लेती है। यदि एक परिवार में किसी को टीबी है तो परिवार के अन्य सदस्यों की जांच कराने के बाद यदि उन्हें टीबी नहीं है तो परिजनों को इस बीमारी के संक्रमण से बचाव के लिए उन्हें टीबी प्रवेंटय्यूट टï्रीटमेंट दिया गया जाएगा। जिसमें टीबी मरीज के परिजनों को 5 एमजी प्रत्येक व्यक्ति को डोज दिया जाना है। जिसमें संपर्क में रहने वाले लोग इस बीमारी से बच सकें। मंडला जिला क्षय अधिकारी डॉ जेपी चीचाम ने बताया कि जिले को 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य है। इसके लिए टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान को सफल बनाने के लिए घर-घर जाकर टीबी की पहचान कराई जा रही है। उन्हें टीबी का उपचार दिलाया जा रहा है।
पांच साल में मरीज और उपचार की स्थिति
वर्ष जनसंख्या चिन्हित केस स्वस्थ्य ऑन ट्रीटमेंट
2018 1148212 1876 1727 0
2019 1205016 1692 1510 0
2020 1224230 1424 1216 0
2021 1243818 1526 832 516
2022 1243818 355 0 322

(नोट- कुल 1640 टीबी मरीजों के कॉन्टेक्ट को टीपीटी दी जा चुकी है।)

Published on:
27 Mar 2022 10:46 am
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