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अब भी अधूरा है डिजिटल इंडिया का सपना

7 साल बाद भी डिजिटल इंडिया नहीं बन पाई पंचायतें

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अब भी अधूरा है डिजिटल इंडिया का सपना

अब भी अधूरा है डिजिटल इंडिया का सपना

मंडला. ग्राम पंचायतों को डिजिटल इंडिया से जोडऩेे की शुरुआत वर्ष 2006 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेश के साथ शुरु हुई थी। उसके बाद जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया लांच किया गया था। साथ में ग्राम पंचायतों के सचिवों को कम्प्यूटर सिस्टम के साथ अन्य सामग्री भी सौंपी गई थी। जिससे गांव के लोगों को कल्याणकारी योजनाओं की पूरी जानकारी और ऑनलाइन सुविधाएं ग्राम पंचायत मेें ही मिल सकें। लेकिन वह योजना शोपीस बनकर रह गई है। उसे परस्पर लाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण डिजिटल योजना सपना बनकर रह गई है। जिले में 486 ग्राम पंचायतें है। प्रत्येक ग्राम पंचायतों को डिजिटल इंडिया से जोडऩे के लिए इंटरनेट सुविधाएं और ब्रॉडवैंड कनेक्शन और कम्प्यूटर सिस्टम दिए गए थे। लेकिन उनका उपयोग आज तक नहीं किया गया है। सरकार द्वारा निर्धारित कम्पनी द्वारा राशि को तो जमा करवा लिया गया, लेकिन उसे चालू कराने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहे है। जिससे ग्राम पंचायतों को दिए गए इंटरनेट सिस्टम शोपीस बने है। जिसके कारण प्रत्येक ग्राम पंचायत के जिम्मेदार सभी कार्यो को निजी दुकानों को करवाकर हजारों रुपए के बिल लगा रहे है। जो सरकारी खजाने की राशि खर्च हो रही है।
यह है ग्राम पंचायतों की स्थिति
वर्ष 2015 में डिजिटल इंडिया के तहत ग्राम पंचायतों को जोड़ा गया था। जिन्हें ब्राडबैंड के साथ इंटरनेट का कनेक्शन दिया गया था। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में सचिवों को काम करने के लिए कम्प्यूटर सिस्टम दिया गया था। जिसमें पिं्रटर, स्कैनर भी शामिल था। जिसकी कीमत जिला पंचायत और जनपद पंचायत में एक लाख के करीब बताई गई है। वह सामान कुछ दिनों तक तो ग्राम पंचायतों में रखा रहा। लेकिन धीरे-धीरे वहां से गायब हो गए। कोई सामग्री सरपंच के घर की शोभा बढ़ा रहा है तो कोई सचिव और रोजगार सहायक के घर की शोभा बढ़ा रही है। ग्राम पंचायत भवनों में जिम्मेदारों का नियमित नहीं आने से हमेशा ताला लगा रहता है।
चार और तीन साल पहले लगाए गए ब्राडबैंड के बॉक्स
जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में चार और तीन साल के बीच ब्राडबैंड कनेक्शन के लिए नए बॉक्स लगाए गए। कुछ समय तक को सही सर्विस दी। लेकिन कुछ समय बाद वह अपने आप बंद हो गए। ग्राम पंचायतों के सचिवों का कहना था कि उनकी शिकायत किससे करें। जो चालू करवाए। जिसके कारण पंचायत संबंधी कार्यो को निजी दुकानों से करवाना पड़ रहा है।
सपना बनकर रह गया डिजिटल इंडिया
डिजिटल इंडिया के तहत ग्राम पंचायतों के लोगों को कल्याण कारी योजनाओं से जोडऩा था। जिसके लिए सरल और सस्ता इंटरनेट सुविधा देने के प्रयास किए गए थे। लेकिन वह डिजिटल इंडिया सपना बनकर रह गया है। वहां पर इंटर नेट की सुविधा तक चालू नहीं की गई है। जिसके कारण कुछ अर्जेंट कायों को मोबाइल से करते है। दूरस्थ ग्रामों के सरपंचो का कहना है कि अगर ग्राम पंचायतों को डिजिटल बनाया गया तो सारी सुविधाएं कार्यालय से होगी। जनपद पंचायत और निजी दुकानों पर जाना कम और जनता के बीच में कार्यो को किया जाएगा।