
150 वर्ष पुराना है माता ज्वाला व मां नर्मदा का मंदिर
150 वर्ष पुराना है माता ज्वाला व मां नर्मदा का मंदिर
मंडला . उपनगरीय क्षेत्र महाराजपुर में नाव घाट में लगभग 150 वर्ष पुराना माता ज्वाला व मां नर्मदा का मंदिर है तथा दोनों ही प्रतिमाएं स्थापित है। कहा जाता है कि इस क्षेत्र में कोई भी मंगल कार्य इनकी अनुमति के बगैर संपन्न नहीं होता। वर्षो पुरानी इन प्रतिमाओं को देखकर लगता है कि जैसे मां अपने भक्तों को देख रही है। वर्तमान समय में मंदिर को नया रूप दे दिया गया है लेकिप स्थापित प्रतिमा का स्थान नहीं बदला गया। माता की प्राचीन मूर्ति आज भी स्थापित है। माना जाता है कि मां ज्वाला भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है। तब से पुरानी मढिय़ा के अंदर ही माता की प्रतिमाएं स्थापित है और वर्षो से यहां अखंड जोत प्रज्जवलित है। मंदिर के पुजारी बताते है कि माता का श्रृंगार हर दिन किया जाता है व उन्हें नए वस्त्र धारण कराए जाते है। नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रृद्धालु इस मंदिर में आते है और मनोकामनाएं मांगते है। भक्तों का कहना है कि माता उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।
क्षेत्र के बुजुर्ग बताते है कि हमारे पूर्वजों ने बताया कि संगम घाट में मौनी बाबा का स्थान था जो मां नर्मदा के अनन्य भक्त थे और लोग उन्हें भगवान के जैसे पूजते थे। एक समय उन्हें माता ने स्वप्न दिया कि मुझे नर्मदा की अथाह गहराई से बाहर निकालो। जिस समय यह घटना घटी उस वक्त नर्मदा में भारी बाढ़ थी। परंतु मौनी बाबा नाव घाट से नर्मदा में कूदे और मॉं ज्वाला व मॉं नर्मदा की सुंदर सफेद संगमरमर के पत्थर की बनी प्रतिमाएं उनके कंधे पर थी। जिन्हें नाव घाट में ही स्थापित किया गया और तभी से तिवारी परिवार के द्वारा माता की पूजा अर्चना की जा रही है।
होती है मनोकामनाएं पूरी:
लोगों का मानना है कि जो भी श्रृद्धालु माता की सेवा में लग जाता है उसकी मनोकामनाएं कभी अधूरी नहीं जाती, वे पूरी होती है। क्षेत्र में बसे हजारों लोग है जो मॉं ज्वाला व नर्मदा की सेवा से समाज में ऊंचा स्थान प्राप्त किए हुए है। यहां के लोगों को माता कभी अपने से दूर नहीं करती। जिससे लोग अगर शहर से बाहर भी है तो वे समय निकालकर महीने में एक बार माता की सेवा में पहुंचते है। मॉं ज्वाला व माता नर्मदा का करूणामयी रूप याकायाक भक्तों को अपनी ओर खींचता है।
होते है आयोजन:
वर्ष भर माता की पूजा अर्चना होती है। जिसके लिए दूर दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर माता के दर्शन को आते है लेकिप नवरात्रि के समय विशेष पूजा आराधना की जाती है। जहां जवारों के साथ कलश भी रखे जाते है। लोगों ने बताया पहले दोनों वक्त की आरती के समय नगाड़ों के साथ आरती की जाती थी। लेकिन समय के साथ वे कलाकार नहीं रहे जो नगाड़ा बना सके। परंतु आरती व पूजा अर्चना आज भी जारी है।
Published on:
08 Oct 2021 09:08 am
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