
अप्रेल-मई में होगी उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा, पॉलीथिन-डिस्पोजल पर रहेगा पूरी तरह प्रतिबंध
मंडला. वर्ष 2024 में नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा का सामूहिक आयोजन दो बार किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि यह परिक्रमा सिर्फ चैत्र माह में ही की जाती है और इस परिक्रमा में महाराष्ट्र के नर्मदा भक्तों की संख्या अधिक होती है। महाराष्ट्र के हिन्दी माह हिन्दू प्रदेशों के हिन्दी माह से 15 दिन बाद प्रारंभ माने जाते हैं। इसीलिए जब प्रदेश का चैत्र माह समाप्त हो जाएगा तो उसके 15 दिन बाद भी परिक्रमा का क्रम जारी रहेगा। जिसमें महाराष्ट्र के वासियों को पूर्ण रूप से अवसर मिल सकेगा और इसी कालखंड में दूसरी सामूहिक परिक्रमा रखी गई है। जिसमें स्थानीय नर्मदा भक्तों के अलावा महाराष्ट्र के नर्मदा भक्त भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। ज्ञात हो कि पिछले वर्ष सामूहिक परिक्रमा का आयोजन समिति द्वारा एक ही समय किया गया था अब यह आयोजन सभी की सहमति से 02 बार किया जा रहा है पहली सामूहिक परिक्रमा 20 अप्रेल शनिवार को सुबह प्रारंभ होगी और 21 अप्रेल को संपन्न होगी। दूसरी सामूहिक परिक्रमा 4 मई को प्रारंभ होकर 5 मई को संपन्न होगी।
बैठक में समाजसेवी हुए शामिल
मां नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा को लेकर एक आवश्यक बैठक का आयोजन किया जनपद पंचायत के सभागार में किया गया। जिसमें समिति सदस्यों के अलावा अन्य गणमान्यजन तथा नर्मदा भक्त एवं समाजसेवी उपस्थित रहे इनमें प्रकाश दीक्षित, नरेश कछवाहा, अखिलेश कछवाहा, संतोष सोनू भलावी, अभिनव चौरसिया, श्याम श्रीवास, रेणुका परमार, तृप्ति शुक्ला, सुधीर कांसकार, मुकेश सोनी, वैशाखू नंदा, निकेश्वर पटेल, ओमप्रकाश धामेजा, डॉक्टर गजेंद्र गुप्ता, योगेन्द्र परमार, गुड्डा अग्रवाल, सोनल बर्मन, बैशाखू नंदा आदि शामिल थे।
बैठक में विशेष रूप से परिक्रमा पथ को लेकर व्यापक चर्चा की गई फोकस इस बात को लेकर किया गया कि परिक्रमा ज्यादा से ज्यादा मां नर्मदा के तट के समीप से हो ताकि परिक्रमा के दौरान मां नर्मदा के दर्शन परिक्रमावासियों को होते रहें। परिक्रमा के दूसरे दिन जब तट परिवर्तन के बाद बबैहा से मंडला परिक्रमा यात्रा आती है तो मुख्य मार्ग से आना पड़ता है जो व्यवहारिक रूप से एक कठिन अनुभव है। चूंकि दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही इस मार्ग से होती है एवं अप्रेल तथा मई माह में गर्मी भी अधिक होती है लिहाजा पैदल चलना ऐसे मार्गो पर दुष्कर होता है लिहाजा नर्मदा जी के किनारे-किनारे वैकल्पिक मार्ग तलाशने का प्रयास भी जारी है।
परिक्रमा आयोजन को लेकर विभिन्न समितियों का भी गठन किया गया और इनके प्रभारी भी अलग-अलग नियुक्त किए गए हैं। जिन समितियों का गठन किया गया उनमें आवास समिति, परिवहन, स्वच्छता, संत संपर्क, धन संग्रह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भोजन एवं अल्पहार तथा झांकी निर्माण शामिल हैं।
संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस बार परिक्रमा में शामिल होने वालों की संख्या अत्याधिक होगी लिहाजा स्वच्छता को मद्देनजर रखते हुए पॉलीथिन एवं डिस्पोजल पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया है।
Published on:
09 Jan 2024 01:17 pm
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