नारायणगंज. नारायणगंज क्षेत्र की सबसे बड़ी मड़ई प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी 22 नवंबर बुधवार से 3 दिन के लिए लगेगी। यहां लगने वाली मड़ई में बाहर के बहुत से व्यापारी आते हैं। बताया गया कि नारायणगंज क्षेत्र की सबसे बड़ी मड़ई कही जाती है। यहां परंपरा के अनुसार नारायणगंज के आसपास कई अन्य गांव से अहीर चंडी लेकर मड़ई ब्याहने यहां पहुंचते है। मड़ई में खिलौने, मिठाई, चूड़ी, कपड़े, बर्तन एवं अन्य सामग्रियों की दुकान लगाई जाती हैं। मड़ई के लिए विगत एक पखवाड़े से दुकान तैयार में जुटे हुए है। बाहर के व्यापारी मड़ई स्थल में पहले ही पहुंच चुके है। सभी व्यापारी अपनी-अपनी दुकानें सजाना शुरू कर दिए हैं।
बता दें कि स्थानीय मड़ई किसी त्योहार से काम नहीं होती है, क्योंकि यहां आयोजित होने वाली मड़ई में बाहर से मेहमान मड़ई का लुफ्त लेने अपने रिश्तेदारों के घर पहुंचते हैं। नारायणगंज क्षेत्र की मड़ई के बाद से शादी विवाह का सिलसिला शुरू होता है। जिसको देखते हुए भी लोग शादी की खरीददारी के लिए भी मड़ई पहुंचते हैं। वहीं मड़ई में लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों को घर में बुलाकर आदर सत्कार करते हैं। उनके साथ मड़ई का आनंद उठाते हैं।
नारायागंज में आयोजित होने वाली मड़ई में सभी वर्गों के लिए कुछ ना कुछ खास के साथ मनोरंजन और कई आवश्यक सामग्री की दुकान लगाई जाती है। मड़ई में सिंघाड़े, मिठाई का महत्व एवं गन्ने की दुकान मड़ई में जान डाल देते है। आयोजित होने वाली मड़ई में मझगांव, खमरिया, मैली, पटेहरा, मानेगांव, चुटका, खमरिया, सगोड़ा, खेड़ा, टाटी घाट, पदमी, मलार, कुंभा, किकारिय, टिकरिया, चिरईडोंगरी, परतला, बबलिया, सुखराम, बनार, डालाखापा समेत पूरे जिले के लोग मड़ई का आनंद लेने पहुंचते है।
अमगंवा में मड़ई, लोगाें ने की खरीदारी
सोमवार ग्राम अमगंवा की मड़ई ब्याही गई। अहीरों की टोलियों से गांव की सड़कें व्यस्त नजर आई। आसपास अहीरों की टोलियां पहुंची। चंडी पूजा के बाद लोक गीतों और नृत्य के साथ अहिरों की टोली घर-घर पहुंची। मड़ई में पदमी, घुघरा, खड़देवरा, मधुपुरी आदि गांव से सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे। मेले का आनंद लिया खेल खिलौने, सौंदर्य सामग्री व अन्य जरूरी सामग्रियां खरीदी।