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बेहतर खेती करने को लेकर जैविक खेती की ओर बढ़ रही महिलाएं

उन्नत तकनीक से तैयार की जा रही राई की फसल

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बेहतर खेती करने को लेकर जैविक खेती की ओर बढ़ रही महिलाएं

बेहतर खेती करने को लेकर जैविक खेती की ओर बढ़ रही महिलाएं

मंडला. जिले में जैविक खेती को बढ़ाया दिया जा रहा है। जिसके लिए प्रशिक्षण के साथ किस से खेती की जानी है इसकी जानकारी कृषि विभाग के अधिकारी व स्वयं सेवी संगठन प्रदान कर रहे हैं। जैविक खेती में महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर अपनी भागीदारी निभा रही हैं। विकासखंड नारायणगंज में आजीविका मिशन और प्रदान संस्था ने महिला किसानों के साथ कार्य योजना बनाकर जैविक खेती को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। ग्राम जेवरा की महिला किसान द्रौपदी जो की समूह की स्थाई सदस्य हैं। जैविक पद्धति से राई की फसल तैयार कर रही हैं। द्रौपदी ने बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर की ट्रेनिंग लेने के बाद इनको जैविक खेती की जानकारी प्राप्त की। जिसके बाद जैविक खेती की तरफ अपना रूख कर लिया। द्रोपदी ने इस वर्ष राई की फसल में प्रोसेस्ड गोबर खाद का इस्तेमाल किया है और आज इनकी फसल पहले से ज्यादा बेहतर है। इसके पूर्व तैयार राई के बीज को किसान आजीविका मिशन एवं प्रदान संस्था के माध्यम से लोकल मार्केट में 60 से 70 रुपए प्रति किलो के उचित मूल्य पर बेच पा रहे है। इसके साथ ही इसका इस्तेमाल स्वयं की के लिए भी कर पा रहे है।

ट्रीटमेंट के बाद बीज ज्यादा प्रभावशाली

अनुरुद्ध शास्त्री ने बताया की किसी भी फसल में देशी बीजों को जैविक उपचार करने के बाद बोने पर पहले से ज्यादा बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं, इसके साथ ही जैविक कीटनाशक का प्रयोग करने से फसल सुरक्षा में अलग से केमिकल युक्त दवाईयों का खर्चा भी नहीं रहता। आज के बदलते परिवेश में जहां हर तरफ रसायनिक खाद का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ा हैं। जिसके कारण जमीनों की उर्वरता लगातार कम हो रही है। जब किसान रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर आता है तो मिट्टी से जहरीले कैमिकल्स को हटने में करीब तीन साल का समय लगता है, जो कन्वर्जन पीरियड कहलाता है। इस दौरान किसानों को धैर्य रखने और सहारे की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों की मदद के लिए कई उद्यमी, सरकारी और गैर सरकारी संगठन किसान की मदद करते है। जिससे इनका जैविक खेती की तरफ रूझान बढ़े और पौष्टिक खाद्य पदार्थ लोगों को मिल सके। आजीविका मिशन के समूहों में जुड़ी महिलाएं देशी बीज को उपचार करके कारगार उन्नत खेती की ओर अग्रसर हैं। जेवरा की महिला किसान द्रौपदी ने जैविक खेती को अच्छे समझ कर राई की फसल तैयार की है जो कि खेतों में लहलहा रही है। जिससे दूसरे किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।