
मंदसौर.
जिले में अफीम की खेती में सीपीएस सिस्टम में पहली बार तौल शुरु होने जा रहा है। अब तक नियमित पट्टों पर अफीम की खेती करने वाले काश्तकारों का तौल चल रहा था। जो अब पूरा होने जा रहा है। अब ऐसे में सीपीएस में अफीम की खेती करने वाले किसानों का तौल शुरु होगा। दो खंडों के लिए तौल मंदसौर नारकोटिक्स कार्यालय में होगा तो तीसरे खंड के लिए तौल सीतामऊ में होगा। लेकिन सीपीएस में तौल की प्रक्रिया लंबी है और इसमें विभाग का काम भी बढ़ गया है। किसान अपना काटा गया अफीम का पौधा डोडे सहित लेकर यहां पहुंचेगा। इसके बाद इसे खाली करवाकर सत्यापन होगा कि चीरा तो नहीं लगा है। इसके बाद इसका तौल होगा। फिर इसे विभाग को अपने बैग में पैक कर फैक्ट्री भेजना होगा। वहीं किसान को २०० रुपए प्रतिकिलो मान से राशि का भुगतान किया जाएगा।
इसलिए सीपीएस का तौल है अहम
अफीम उत्पादक मालवा के इस जिले में अफीम की खेती तो सालों से किसान करता आ रहा है और तौल हो रहा है, लेकिन पहली बार अफीम की खेती में सीपीएस सिस्टम लाकर इसका प्रयोग किया गया है। इसमें डोडो पर चीरा लगाने पर प्रतिबंध है। ऐसे में पहली बार इसका तौल भी होने जा रहा है। इसी कारण यह अहम है और इसे लेकर विभाग भी कई प्रकार की उलझन में है। सीपीएस की तौल प्रक्रिया में किसानों द्वारा लाया गया अफीम डोडा यहां खाली करवाने के बाद इसका तौल किया जाएगा। इसके पहले विभाग यह देखेगा कि किसानों ने इनमें से किसी डोडे पर चीरा तो नहीं लगाया है। इसके बाद तौल होगा और विभागीय के अपने बैग में इसे पैक किया जाएगा और फिर से इसे फैक्ट्री भेजना पड़ेगा। अफीम तो यहां पर रखी जा सकती है लेकिन डोडा अब नहीं रखा जा सकेगा। इसलिए इस फैक्ट्री भेजा जाएगा।
तीसरे खंड का सीतामऊ पहले व दूसरे का मंदसौर में होगा
अफीम के नियमित पट्टेधारियों का तौल पूरा हो चुका है। इसके बाद अब सीपीएस वाले किसानों के अफीम के ८ इंच तक काटे गए डोडो का तौल पूरा होगा। इसमें भी तौल होने के साथ इसकी पूरी रिपोर्ट बनेगी। ६ ऑरी के दिए गए पट्टे के आधार पर तौल की सीमा पूरी करनी होगी। अफीम का पहले व दूसरे खंड का तौल तो नारकोटिक्स कार्यालय परिसर में ही होगा तो वहीं तीसरे खंड का सीपीएस तौल सीतामऊ में होगा। पहले खंड का २५ अप्रेल से तो दूसरे खंड का २४ अप्रेल से व तीसरे खंड का २४ अप्रेल से तौल शुरु होगा जो ५ मई तक जारी रहेगा।
कई दिनों से कर रहे थे किसान इंतजार
अफीम नीति में सीपीएस ने इस बार अफीम किसानों को खूब परेशान किया है, लेकिन फिर भी किसानों इस खेती को अपनाया है। डोडे पर चीरा भले ही नहीं लगाना है लेकिन इसमें से दाना निकालने के लिए छेद कर निकालने की अनुमति थी। नीति में बाद में पट्टें मिले तो बोवनी से लेकर खेती भी लेट हुई फिर गर्मी ने भी खूब परेशान किया। वहीं अब नियमित पट़्ों वाला का तौल होने के बाद इनका नंबर आया। वहीं लंबे समय तक इसकी प्रकिया और इसकी मिलने वाली राशि भी नहीं पता थी। ऐसे में किसान लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे थे। हालांकि तीनों ही खंडों में सीपीएस वाले किसानों की संख्या बहुत कम है। इसलिए हर दिन कम ही किसानों को यहां बुलाया जाएगा, लेकिन प्रक्रिया लंबी होने के कारण इसमें विभाग का काम बढ़ गया है।
फैक्ट फाइल...
जिले के तीनों खंडों में यह है स्थिति
अफीम खंड - १
सीपीएस वाले काश्तकार-७६२
४.२ से अधिक मार्फिन में वितरित हुए पट्टें- ४८२१
प्रथम खंड में गांव -157
सीपीएस का तौल - २५ अप्रेल से ५ मई तक
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अफीम खंड - २
सीपीएस वाले काश्तकार-८२२
द्वितीय खंड में शामिल गांव-१३७
सीपीएस में तौल -२४ अप्रेल से ५ मई तक
...
अफीम खंड - ३
सीपीएस और पिछले दो सालों में कटे पट्टें जो होंगे वितरित-६७१
४.२ से अधिक मार्फिन में वितरित हुए पट्टें- करीब ४०००
द्वितीय खंड में शामिल गांव-२३७
सीपीएस वाले काश्तकार-७५२
सीपीएस में तौल -२५ अप्रेल से ५ मई तक सीतामऊ में
गरोठ में सीपीएस वाले किसान- ३५५
Published on:
24 Apr 2022 08:49 am
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