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ग्रहण के बाद फिर बिखरी दीप पर्व की खुशिया, हर दिन पूजा-अर्चना का चला दौर

ग्रहण के बाद फिर बिखरी दीप पर्व की खुशिया, हर दिन पूजा-अर्चना का चला दौर

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ग्रहण के बाद फिर बिखरी दीप पर्व की खुशिया, हर दिन पूजा-अर्चना का चला दौर

ग्रहण के बाद फिर बिखरी दीप पर्व की खुशिया, हर दिन पूजा-अर्चना का चला दौर

मंदसौर.
दीपोत्सव के बाद सूर्यग्रहण आया। ग्रहण का असर हटा तो एक दिन बाद ही सही लेकिन दीप पर्व की फिर से जिले में रंगत नजर आई। बुधवार को समूचे जिले में गोधन की पूजा पशुपालको व सामाजिक संस्थाओं ने की तो महिलाओं ने विभिन्न जगहों पर पहुंचकर गोवर्धन की पूजा अर्चना की। मान्यताओं के अनुसार गोवर्धन पूजा के साथ पड़वा मनाया गया तो वहीं गायों को मेहंदी लगाने के साथ सजाया गया और पूजा-अर्चना की गई। वहीं आज भाई-दूज मनाई जाएगी। ग्वाला समाज द्वारा गायों की पूजा-अर्चना के बाद गायों की दौड़ का आयोजन परंपरा अनुसार शहर में किया गया। आज दीप पर्व का समापन होगा। जिलेभर में बुधवार को दिनभर मेल-जोल का दौर जारी रहा। सोशल मीडिया से लेकर लोगों ने आपस में मिलकर एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी।


पशुपालको ने गोधन को पूजा तो महिलाओं ने गोवर्धन की पूजा की
दीपोत्सव के दौर में बुधवार को जिले में गोवर्धन पूजा की गई तो वहीं गोधन भी पूजें गए। किसानों ने गोवर्धन पूजा के साथ दीपावली मनाई। पांच दिवसीय दीपावली के त्योहार में चौथे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। किसानों पशुपालकों के लिए गोवर्धन पूजा का बड़ा महत्व है।दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है लेकिन इस बाद सूर्यग्रहण की वजह से एक दिन बाद यह त्योहार मनाया जा रहा है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने घर के बाहर गोबर से गोवर्धन पर्वत बना कर पूजा अर्चना करते हुए सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पशुपालक गोवर्धन पूजा से पहले मेहंदी लगाते है। इसके बाद सुबह पशुओं को नहलाकर उन्हें सजाया जाता है। गोवर्धन पूजा के साथ ही गायो की पूजा भी की जाती है। गोवंश की पूजन के बाद आतिशबाजी भी की जाती है।


आज मनाई जाएगी भाई-दूज
दीपोत्सव के अंतिम दिन भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक भाई दूज पर्व मनाया जाएगा। गुरुवार को यह पर्व परंपरा के साथ मनाया जाएगा। बहनें भाई की ललाट पर मंगल तिलक कर आरती उतारेगी तो बहनों का भाई रक्षा का वचन देंगे। इसके साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव का आज समापन होगा। भाई दूज का पर्व यम-यमुना सहित प्राचीन मान्यताओं के कारण अहम है। इसी के चलते दीपोत्सव के साथ यह पर्व मनाया जाता है।