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बाघ की अंबे माता का धाम बना जनआस्था का केंद्र

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शामगढ़.
तहसील की ग्राम पंचायत हतुनिया में गांव से 500 फीट दूर बाघा की अंबे माता के नाम से माता का स्थान है। जो विरानी में है लेकिन वर्तमान में जनआस्था का केंद्र बन गया है। गांव से मंदिर जाने का मार्ग जर्जर होने के साथ ही इस मार्ग पर पुलिया नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मां दुधाखेड़ी माता का यह स्थान करीब 150 साल पुराना है। नवरात्र के दौर में मंदिर पर बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे है। नवरात्रि महोत्सव प्रारंभ होने के साथ मंदिर पर भीड़ आ रही है। भक्त यहां मन्नतें लेकर पहुंच रहे है।
मान्यताओंं के कारण बना जनआस्था का केंद्र
मान्यता है कि इंदौर की एक महिला ने संतान नहीं होने पर मन्नत मांगने आई थी। मन्नत पूरी हुई और उसके पश्चात कुछ सालों बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और वह अस्पताल में भर्ती हुई उस समय सपनों में माताजी ने उसे दर्शन दिए और अपनी मन्नत याद दिलाई महिला ठीक होने के बाद इकलौते बेटे के साथ गांव हतुनिया देवी स्थान पर आई और मां की पूजा अर्चना की। वही मंदिर निर्माण की आधारशिला भी रखी गई। कई सालों से इस देवी मंदिर पर कई भक्त मनोकामनाएं लेकर पहुंच रहे है। अब यह स्थान क्षेत्र ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के माता के भक्तों के लिए भी आस्था का केंद्र बना हुआ है। शायद कुंवर चंद्रावत ठिकाना मुंडला ने बताया कि 80 से 90 हजार उपचार पर खर्च किए थे उन्हें गर्दन एवं हाथ पैरों में कुछ भी सूजन कम नहीं हो रहा था गांव के किसी महिला ने मुझे बताया कि इस स्थान पर आने से सभी रोग से मुक्ति मिलेगी तो मैं यहां पहुंची और समस्या का निराकरण हुआ।
१५० साल पुराना है इतिहास
पंडित शंभूनाथ रावल ने बताया कि मंदिर का इतिहास डेढ़ सौ साल पुराना है एवं दुधाखेड़ी माता मंदिर के बाद में गांव का यह मंदिर प्रचलित हुआ एवं साल के 12 महीनों के हर दिन यहां भक्तजन आते हैं एवं कुंड के जल से स्नान करते है। माता के दर्शन करने से कुछ ही दिनों के अंदर जितने भी दुख तकलीफ हैं सभी दूर हो जाती हैं। वही कई लोग चारपहिया वाहनमें खटिया पर आते हैं और मां के दरबार से अपने पैरों पर चलकर अपने घर जाते हैं ।
जर्जर पुलिया होने के कारण भक्त हो रहे परेशान
मंदिर नव निर्माण को लेकर 1995 में गांव के प्रमुखजनों की 11 सदस्यों की एक समिति बनाई गई। इसमें मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार की गई वही एक 100 सदस्यों की समिति भी बनाई गई। दोनों समितियों द्वारा अभी तक मंदिर में कई निर्माण कार्य करवाए वही जमीन भी खरीदी आसपास समिति के अध्यक्ष मोहनलाल पाटीदार ने बताया कि मंदिर में मां अंबे नौ रूपों में विद्यमान हैं वही मुहूर्त अति प्राचीन है दूर-दूर से भक्त लोग अपनी पीड़ा लेकर आते हैं और हंसते कैसे खेलते यहां से ठीक होकर जाते हैं। नवरात्रि पर गरबा महोत्सव भी आयोजित होते है।