
मगरे पर स्थित कालका माता के इस दर पर मिलती है असाध्य रोगों से मुक्ति
मंदसौर.
कभी विरान पहाड़ी पर स्थित कालका माता का मंदिर आज जनआस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। अब यहां भव्य मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। असाध्य रोगों से पीडि़त को यहा रोगों से मुक्ति मिलती है। नवरात्रि में कालका माता के इस दर पर बड़ी सड्डख्या में भक्त अपनी मुरादें लेकर पहुंचते है। चैत्र नवरात्रि के समय यहां मेला भी कोविड के पिछले दो सालों के बाद अब लगा तो भक्त भी इस बार अधिक पहुंच रहे है। इसी कारण दिनोंदिन यहां भक्तों का का कारवां बढ़ता चला जा रहा है। वर्ष २०१८ में यहां ११ लाख ११ हजार ११ सो दीपक जलाने का दीपदान महोत्सव गिनीज बुक में रिकॉर्ड हुआ। इसके बाद से मंदिर पर भक्तों की डोर मजबूत होने के साथ भक्तों की संख्या भी अधिक होती चली जा रही है। और समय के साथ आकोदड़ा मगरे पर विराजी कालका माता का यह स्थान भव्यता लेता जा रहा है।
दलौदा तहसील से 12 किमी दूर स्थित कालिका माता (मगरा माताजी) मंदिर आकोदड़ा का एक अतिप्राचीन एवं दिव्य मंदिर है जो हजारों भक्तों की आस्था और का केंद्र हैं। 24 गांवों के बीच मंदिर (पहाड़ी) पर स्थित होने के कारण यहां आसपास के दर्शनार्थी अपनी मन्नते मुरादे लेकर आते हैं। कहा जाता है कि यहां अनेक प्रकार की बीमारियों से लोगों को मुक्ति मिली है। साथ ही यह भी माना जाता है कि इस क्षेत्र पर माताजी की कृपा होने से प्राकृतिक आपदाओं का असर नहीं के बराबर होता हैं और यह क्षेत्र बैमोसम बरसात, औलावृष्टि, शीतलहर जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचा हुआ रहता है। यहां से जुड़े भक्तों की मानें तो मालवा में नीमच जिले के ***** माता मंदिर के बाद यह स्थान भी ऐसा है जो आने वाले लोगों को असाध्य रोगों से निजात मिलता है। इसी कारण यह स्थान भक्तों की आस्था का केंद्र बन गया है।
गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ मंदिर
अतिप्राचीन मंदिर होने के कारण दूर दराज से लोग यहां दर्शन करने आते है। लकवा, मिर्गी, अंधत्व एवं अध्याय रोगों से ग्रसित मरीज यहां नियमित आते हैं और ठीक होकर घर जाते हैं। चार पहिए पर लाए गए मरीज भी यहां से ठीक होकर घर अपने पैरों पर चलकर गए है। इस स्थान पर वर्ष 2018 में ग्यारह लाख ग्यारह हजार ग्यारह सौ ग्यारह दीपक जलाने का आयोजन लाखों लोगों की उपस्थिति में हुआ था। जो गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया। ग्राम पंचायत एवं कालिका माता ट्रस्ट द्वारा मेले का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार और रविवार को भक्तों का ताता लगा रहता है। शारदीय नवरात्री पर भी भक्त और मरीज दर्शन करने आते है।
२४ गांवों के बीच स्थिति है कालका माता का यह स्थान
आकोदड़ा के मगरे पर स्थित कालका माता का यह स्थान 24 गांवों के बीच स्थिति है। ऐसे में कहा जाता है कि कालका २४ गांवों पर विराजमान है। नवरात्रि में यहा इस पर मेले का आयोजन भी हो रहा है। हर दिन अनेक कार्यक्रम हो रहे है। नवरात्र में दूरस्थ जगहों से भक्त यहां पहुंच रहे है। हर दिन माता का अलग-अलग श्रृंगार किया जा रहा है। कई पीडि़त व बीमार लोग यहां बीमारियों से छूटकारें के लिए पहुंचते है और स्वस्थ होकर जाते है। इस बार कावि सम्मेलन से लेकर अन्य आयोजन भी किए जा रहे है। तो भजन संध्या भी होगी। सालों पुराने इस माता के मंदिर से कई लोगों की आस्था की डोर जुड़ी हुई है। यहां पर नवरात्रि के पावन पर्व पर आसपास के गांव से चुनरी यात्रा डीजे के साथ यात्रा आती है। कहा जाता है कि हर मनोकामना पूरी होती है इसलिए हर रविवार को भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। यहा पर ठहरने से लेकर अन्य सभी बेहतर इंतजाम भी मौजूद है।
Published on:
09 Apr 2022 10:40 am
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