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दीपोत्सव से पहले उम्मीदों की फसल को आफत की बारिश ने भिगोया

दीपोत्सव से पहले उम्मीदों की फसल को आफत की बारिश ने भिगोया

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दीपोत्सव से पहले उम्मीदों की फसल को आफत की बारिश ने भिगोया

दीपोत्सव से पहले उम्मीदों की फसल को आफत की बारिश ने भिगोया


मंदसौर.
आसमान पर बरस रही आफत की बारिश ने जिले में किसानों की फसलों को बड़े पैमानें पर नुकसान पहुंचाया है। दीपोत्सव से पहले पीला सोना कही जाने वाली खरीफ सीजन की मुख्य फसल जब पककर खड़ी है और कई जगहों पर कटकर निकलने को तैयार है ऐसे दौर में बारिश लगातार हो रही है। खेतों में पानी भरा है और तालाब की तरह खेतों में सोयाबीन तेर रही है। ऐसे में दीप पर्व की खुशियों से पहले किसानों की उम्मीदों को इस बारिश ने धो दिया है। अब हर ओर किसान सर्वे के साथ राहत की मांग कर रहे है। खरीफ में हो रहे नुकसान के अलावा किसानों को रबी सीजन की चिंता भी सताने लगी है। इस बार सोयाबीन खराब होने से अगले साल बीज के लिए भी समस्या होगी। इधर सामान्य से अधिक बारिश जिले में हो चुकी है। तीन दिनों से बारिश का क्रम जारी है। पूरे जिले में फसलों में नुकसान हुआ है। सबसे अधिक नुकसान सोयाबीन में हो रहा है।


गांधीसागर, रेतम व काका गाडगिल खोलना पड़े गेट
इधर जिले में तीन दिन से लगातार हो रही झमाझम बारिश के बाद जलस्रोतों में फिर से पानी की आवक बढऩे लगी है। गांधीसागर बांध में केचमेंट एरिए में आवक के कारण शनिवार को ५ स्लूज गेट खोले गए। लेवल मेंटेन करने के लिए गेट खोले तो वहीं मल्हारगढ़ क्षेत्र में काका गाडगिल सागर का एक और रेतम बैराज के भी तीन गेट १०-१० सेमी तक खोले गए। वहीं तालाब सहित नदियों में पानी की आवक बढ़ी। शनिवार को भी दोपहर के समय करीब २० मिनट तक तेजी बारिश हुई तो वहीं बीती रात को भी मंदसौर शहर सहित पूरे जिले में झमाझम बारिश हुई। इसके चलते अक्टूबर के इस दौर में सावन जैसा आलम जिले में दिखाई दे रहा है।


४८ घंटे में जिले में औसत २ इंच बारिश, कुल ४२ इंच
जिले में पिछले तीन दिनों से बारिश का क्रम जारी है। अब तक जिले में ४२ इंच औसत बारिश हो चुकी है। जो सामान्य से ९ इंच अधिक है। इधर पिछले ४८ घंटे में जिले में दो इंच औसत बारिश हुई है। पिछले २४ घंटे में मंदसौर में ३८, सीतामऊ में ४७, सुवासरा में ३५, गरोठ में ५०, भानपुरा में २८, मल्हारगढ़ में २६, धुधडक़ा में १७, शामगढ़ में १८, संजीत में ५१ मिमी बारिश हुई है। तो वहीं मानसून की इस अवधि में मंदसौर में ४२.५६, सीतामऊ में ३६, सुवासरा में ४७, गरोठ में ५९, भानपुरा में ५०, मल्हारगढ़ में ३२, शामगढ़ में ५२ इंच से अधिक बारिश हो चुकी है। वहीं गांधीसागर बांध का जलस्तर शनिवार को १३११.७४ फीट तक पहुंच गया था।


मंत्रियों से लेकर विधायक ने सर्वे कर राहत का मुद्दा उठाया
खरीफ सीजन में दीपोत्सव से पहले बारिश से फसलों में बड़े पैमानें पर जिले में नुकसान हुआ है। इसके बाद वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा व पर्यावरण मंत्री हरदीपसिंह डंग ने कलेक्टर से बात कर राजस्व अमले से फसल नुकसानी के सर्वे के निर्देश दिए। इधर विधायक यशपालसिंह सिसौदिया व देवीलाल धाकड़ ने भी मुख्यमंत्री से फसल नुकसानी का सर्वे कराकर किसानों को राहत देने की मांग की। जिले के जनप्रतिनिधियों की ओर से सर्वे व नुकसानी के आंकलन का मुद्दा उठाया। इधर कलेक्टर ने पटवारियों सहित राजस्व अमले को फील्ड में भेजकर प्रारंभिक नेत्राकंन सर्वे के निर्देश दिए। जनप्रतिनिधियों ने स्वयं को सक्रिय दिखाते हुए सर्वे की मांग व निर्देश की जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट की। बारिश के दिनों में भी नुकसानी की बात पर सर्वे की मांग उठी थी तो वित्तमंत्री के निर्देश पर जिले में सर्वे हुआ था लेकिन उस समय सर्वे रिपोर्ट में नुकसान नहीं बताया गया था, लेकिन अब तक लगातार हो रही बारिश से किसान ७० से ८० फीसदी नुकसान बता रहे है।


जिले में भारी बारिश का पूर्वानुमान
तीन दिनों की बारिश से पूरे जिले में पहले से ही फसल चौपट हो गई और अभी ओर बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने अगले २४ घंटों में जिले में भारी बारिश का पूर्वानुमान के साथ अलर्ट जारी किया है। इस दौरान हवाओं के भी तेज चलने की बात कही गई है। बारिश के चलते मौसम भी ठंडा हो गया है।
सोयाबीन की फसल तरबतर होने से किसानों को आर्थिक नुकसान
खरीब की मुख्य फसल सोयाबीन जिले में कई खेतों में खड़ी है वहीं कुछ खेतों में कटी हुई हैं। बारिश के कहर से फसल घर आने से पहले ही तरबतर हो गई है। किसान नेता अमृतराम पाटीदार, खूबचंद शर्मा, सुरेश पाटीदार, रामेश्वर आर्य और तुलसीराम माली ने बताया कि लगातार भारी बारिश होने से खेतो में काम करना मुश्किल हो रहा है। सोयाबीन, उड़द खेतों में पड़े हुए हैं। उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है। किसान नेताओं ने कहा कि आर्थिक रूप से किसान की माली हालात बहुत खराब है महंगाई की मार से और अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिलने से परेशान हैं। कमलनाथजी की सरकार में पीडि़त किसानों को बिना सर्वे के मुआवजा प्रदान किया गया था।
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किसानों का पीला सोना खेतों में हो रहा खराब, उत्पादन के साथ गुणवत्ता पर भी पड़ेगा असर
नगरी.
पीला सोना कही जाने वाली सोयाबीन बारिश के बाद खेतों मे ही सडक़र खराब हो रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण क्षेत्र में किसानों की फसलों पर बड़े पैमानें पर नुकसान हुआ है। ऐसे में धरतीपुत्र अब मुश्किल में है। किसानों ने अपने खेतों खलिहानों में सोयाबीन फसल काट कर रख रखी है। ऐसे ऐन वक्त पर बारिश ने खेतों में पानी भराव की स्थिति निर्मित होने से कटी हुई एवं खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल खराब होने लगी है। किसानों की माने तो खेतों में कटकर रखें सोयाबीन की फसल पर लगातार दो दिनों से जारी बारिश से करीब 60 फिसदी से ज्यादा नुकसान होगा। खेतों में पानी भर जाने से सोयाबीन के दाने खराब हो रहे हैं। सोयाबीन के पानी में खराब हो चूके दाने अगले साल की फसल के लिए बीज लायक भी नहीं रहेगें। बारिश से सोयाबीन के दाने काले हो जाने से फसल के उत्पादन के साथ ही गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। किसान शिवनारायण चचावद, प्रभूलाल धाकड़, सूर्यकिरण धाकड़ ने बताया कि पिछली दो रात्रि में हुई तेज बारिश से खेतों में पानी भर जाने से सोयाबीन खराब हुई है। एक दिन रात में बारिश के बाद खेतों में कटी सोयाबीन की कोरियां पलटाई की। वही अगली रात्रि में फिर बारिश से सारे किए कराए पर पानी फिर गया। आखिरी के दो दिनों में कुदरत ने तीन महीने की मेहनत को बेकार कर दिया।


पशुओं के भूसेे की भी समस्या का सामना करना पड़ेगा किसानों को
बारिश से सोयाबीन की फसल तो खराब हुई है साथी पशुओं को खिलाने के लिए भूसे की समस्या भी आगामी दिनों में रहेगी। बारिश में भिगने से खलिहानों में रखा पशु चारा. भूसा भी खराब हो रहा है। किसानों का कहना है कि पशुओं के लिए सोयाबीन का भूसा खाने में सबसे बेहतर होता है। किंतु बारिश से किसानों के साथ ही पशुओं के मुहं में आया निवाला भी छिन जाने की स्थिति बन रही है।