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आरटीई में स्कूल तो मिला लेकिन प्रवेश नहीं, बच्चों ने दिया धरना

पोर्टल पर दिखा स्कूल, आरटीई में लॉटरी में मिला अब नहीं दे रहे प्रवेश, विभाग की गलती पात्रता में नहीं होने के बाद भी पोर्टल पर दिख रहा स्कूल, अब खामियाजा भुगत रहे नन्हें बच्चे

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विभाग की गलती पात्रता में नहीं होने के बाद भी पोर्टल पर दिख रहा स्कूल, अब खामियाजा भुगत रहे नन्हें बच्चे

मंदसौर. आरटीई में प्रवेश की प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल से हुई। अभिभावकों ने भी पूरी प्रक्रिया का पालन किया। लॉटरी में स्कूल मिला लेकिन योजना में स्कूल में प्रवेश अब तक नहीं। बच्चों के अभिभावक प्रवेश के लिए अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों की दहलीज तक पहुंचे भी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसी कारण नवतपा की भीषण गर्मी में साढ़े 3 साल से लेकर पांच साल उम्र के बच्चों ने धरना दिया। कांग्रेस नेताओं के साथ कलेक्ट्रेट में बच्चे सुबह 11.30 बजे धरने पर बैठे। इससे विभाग से लेकर प्रशासन में हडक़ंप मच गया। अफसर भी दौड़े-दौड़े पहुंचे और मनाने की कोशिश की। बाद में आश्वासन पर धूप से उठकर वह छाया में जाकर बैठे। तीन घंटे से अधिक समय तक चले धरने में विभागीय प्रक्रिया की पोल खुली तो अफसरों ने आश्वासन से इसे दबाया।


अभिभावकों के साथ छतरी लेकर धरने पर बैठे बच्चे
मंगलवार को बच्चे कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर माता-पिता और जिला पंचायत सदस्य के साथ छतरी लेकर दोपहर तक प्रदर्शन करते रहे। मामला सेंट थॉमस स्कूल में नर्सरी प्रवेश से जुड़ा है। अभिभावकों का कहना था कि योजना के तहत चयन होने के बाद भी निजी स्कूल में प्रवेश नहीं दिया गया। इस दौरान तहसीलदार, एसडीएम और अपर कलेक्टर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी व डीपीसी पहुंचे और समझाने और आश्वासन देने की कोशिश की। दोपहर 1.15 बजे कलेक्टर ने जिला पंचायत सदस्य और कुछ पालकों को चर्चा के लिए कक्ष में बुलाया। करीब आधे घंटे चली बैठक के बाद दीपक सिंह गुर्जर ने बताया कि कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया है। समाधान का आश्वासन दिया। इस पर धरना खत्म किया।


यह है पूरा मामला
सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया में बच्चों का चयन हुआ था। मोबाइल पर 15 अप्रेल 2026 तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने का मैसेज भी मिला था। पोर्टल से सेंट थॉमस स्कूल मिला। जब वहां प्रवेश के लिए पहुंचे तो स्कूल प्रबंधन ने स्वयं को इसके लिए पात्रता में नहीं होना बताया। यह बात लेकर विभागीय अधिकारियों के पास पहुंचे तो उन्होंने भी सही माना। लेकिन विभाग ने पोर्टल पर स्कूल को बंद नहीं किया इसलिए स्कूल दिखा तो लॉटरी में यही स्कूल मिला। अब लॉटरी में आने के बाद भी प्रवेश नहीं मिला और पालकों को आवंटन निरस्त होने का संदेश मिला। धरने पर बैठे लोगों ने बताया कि इस मामले में कलेक्टर कार्यालय, जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके अलावा स्थानीय विधायक,, सांसद सुधीर गुप्ता और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से भी मुलाकात की गई, लेकिन बच्चों को अब तक स्कूल में प्रवेश नहीं मिला। इसी कारण इस गर्मी में धरने पर बैठने का कदम उठाना पड़ा।


अफसरों की गलती
जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर ने बताया कि कलेक्टर ने कुछ स्कूलों की सूची भी देखी और करीब 10 दिन का समय मांगा है। पालकों से चर्चा के बाद आश्वासन दिया गया कि संबंधित स्कूलों में आरटीई योजना के तहत प्रवेश दिलाया जाएगा। पोर्टल पर स्कूल दर्शाया और आरटीई में स्कूल मिला अब स्कूल प्रवेश नहीं दे रहा। वह इसके लिए पात्र नहीं था तो यह किसकी जवाबदारी। अफसरों की लापरवाही के कारण साढ़े 3 से लेकर पांच साल की उम्र के बच्चों को इस भीषण गर्मी में धरना देना पड़ा।


तकनीकि गलती से नहीं हुआ
आरटीई में स्कूल में प्रवेश नहीं होने के कारण बच्चों के साथ धरना हुआ। जो स्कूल इन्हें मिला वह आरटीई में नहीं है। यह पोर्टल पर नहीं होना था। पोर्टल पर होने से वह स्कूल मिल गया। प्रशासनिक अधिकारी व विभागीय स्तर पर मामले का हल निकाला जा रहा है। -टेरेसा मिंज, जिला शिक्षा अधिकारी, मंदसौर