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शिवना में पानी और जलकुंभी के बीच बैठी कुलदेवी को पूजन पहुंचा दशोरा समाज

शिवना में पानी और जलकुंभी के बीच बैठी कुलदेवी को पूजन पहुंचा दशोरा समाज

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शिवना में पानी और जलकुंभी के बीच बैठी कुलदेवी को पूजन पहुंचा दशोरा समाज

शिवना में पानी और जलकुंभी के बीच बैठी कुलदेवी को पूजन पहुंचा दशोरा समाज


मंदसौर.
शिवना नदी के बीच में दशोरा समाज की कुलदेवी विराजित है। यहां साल में एक बार प्रदेश के विभिन्न शहरों में बसे समाजजन व अन्य राज्यों में बसे समाज के लोग पहुंचते है और कुलदेवी की पूजा अर्चना करते है। मुक्तिधाम क्षेत्र से पहले गहरी जलकुंभी और शिवना के पानी के बीचो-बीच कुलदेवी विराजित है। यहां तक पहुंचने के लिए भी भक्तों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। नावों में बैठकर नदी का रास्ता पार कर देवी तक पहुंचते है और विधि-विधान से पूजा करते है। नदी पर पर्यटन व मौज-मस्ती ने नहीं बल्कि आस्था व भक्ति के साथ पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन पहुंचते है। सोमवार को भी दशोरा समाज के लोगों ने इसी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की इस दौरान आरती से लेकर हवन, पूजन व अभिषेक हुए।
दशौरा नागर समाज द्वारा सोमवार को बडी पूल के नींचे मध्य टापू पर विराजमान समाज की कुलदेवियों दशामाता का वार्षिक पूजन किया गया। सुबह से यहां समाजजनों के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया था। कुलदेवी पूजन के अवसर पर देशभर से 3 हजार से अधिक समाज के लोग यहां पर जमा हुए। सुबह ७ बजे हाटकेश्वर पशुपतिनाथ पूजन के बाद अभिषेक हुआ। फिर ९ बजे यज्ञोपवित संस्कार व हवन का आयोजन हुआ। ११ बजे कुलदेवी पूजन एवं महाआरती की गई। बताया जाता है समाज के लोग अलग-अलग जगहों पर जाकर स्थापित हो गए लेकिन कुलदेवी का स्थान शहर में शिवना के बीच है। ऐसे में हर साल हर जगह से समाज के लोग यहां एकत्रित होकर पूजा-अर्चना सहित अन्य धार्मिक क्रियाएं पूरी करते है। नदी के बीच नावों से देवी की पूजा के लिए पहुंचने का नजारा भी अनोखा होता है।