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आजादी के बाद पहली बार खेती के लिए जमीन बढ़ी, तीन लाख 47 हजार से अधिक में होगी बोवनी

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मंदसौर.
आजादी के बाद पहली बार इस बार जिले में खरीफ सीजन की बोवनी के लिए अधिक जमीन मिली। वर्ष २०१९ में आई बाढ़ के बाद जिले में रबी-खरीफ सीजन का उत्पादन भी बढ़ा है तो बोवनी का क्षेत्रफल भी बढ़ा है। इस बार तीन लाख ४७ हजार ५० हेक्टेयर में खरीफ सीजन में बोवनी होगी। जो अब तक की सबसे अधिक है। इतना ही नहीं खरीफ सीजन में सोयाबीन में अफलन व पीलापन की समस्या को खत्म करने के लिए विभाग इस बार खरीफ सीजन में तीन नई किस्म की सोयाबीन की बोवनी जिले में कराएगा। ऐसे में मानसून के पहले किसान जहां खेतों में अगली फसल के लिए तैयार कर रहा है तो वहीं विभाग भी अपनी तैयारियां पूरी कर चुका है। बोवनी का क्षेत्रफल बढऩे के साथ उत्पादन भी बढ़ रहा है। वहीं इस बार सोयाबीन का रकबा दलहन को बढ़ावा देने के लिए कम किया जा रहा है।
सोयाबीन के लिए अनुकूल जिला फिर भी अन्य को बढ़ावा
खरीफ सीजन में जिले की मुख्य फसल सोयाबीन ही होती है। जिले के अधिकांश किसान अपने खेतों में सोयाबीन की ही खेती करते है। लेकिन इस बार कृषि विभाग ने जिले में दलहन की फसलों को बढ़ावा देने के लिए सोयाबीन का रकबा कम कर दिया है। और दलहन से जुड़ी फसलों के साथ खरीफ सीजन की अन्य फसलों का रकबा बढ़ाया है। ऐसे में इस बार जिले में सोयाबीन की कम व दलहन फसलों की बोवनी अधिक होगी। हालांकि जिले में सोयाबीन की फसल के लिए तमाम प्रकार की अनुकूलता है लेकिन अन्य फसलों को बढ़ावा देने के लिए विभाग यह नवाचार कर रहा है। वहीं खाद व बीज की पर्याप्तता का दावा विभाग द्वारा किया जा रहा है। और अग्रिम भंडारण पूरा कर लिया गया है।
सोयाबीन को कम कर इन फसलों को बढ़ावा देगा जिले में विभाग
जिले में खरीफ सीजन में इस बार ३ लाख ४७ हजार ५० हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी होगी। इसमें से सबसे अधिक ३ लाख ३४ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बोवनी होगी। इस बार भी सबसे अधिक सोयाबीन की बोवनी होगी लेकिन पिछले साल ३३७.६७ हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई थी। और वर्ष २०२० में २८९.६५ हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बोवनी हुई थी। ऐसे में इस बार सोयाबीन का रकबा कम किया गया है। वहीं पिछले साल के मुकाबले मक्का सहित ज्वार, उड़द, मूंगर, तिल, मूंगफली की फसलों का रकबा बढ़ाया गया है। इसमें मक्का ५.५० हेक्टेयर, तो ज्वार .०५, उड़द ५.५०, मूंग .२०, तिल .०३, मूंगफली १.५० हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी की जाएगी। जबकि इन फसलों की पिछले सालों में जिले में या तो बोवनी नहीं हुई थी या नाममात्र की हुई थी लेकिन इन सभी फसलों का रकबा इस बार बढ़ाया गया है। यानी किसान जो परंपरागत ढंग से सोयाबीन की खेती करते आ रहे है उसमें बदलाव की कोशिश विभाग ने इस बार की है।
खरीफ में भी बंपर होगा उत्पादन, विभाग का दावा
कृषि विभाग ने शासन को बोवनी व उत्पादन की संभावनाओं को पिछले सालों की औसत व जिले की संभावनाओं के आधार पर जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें बंपर उत्पादन होना बताया है। पिछले साल की तुलना में खरीफ सीजन की सभी फसलों में उत्पादन अधिक माना गया है। इसमें मक्का १२.९३, बाजरा ०.१८, ज्वार ०.६ तुअर ०.४० उड़द ४.७९, मूंग ०.१२ सोयाबीन ३१७.३०, मुंगफली १.३५, तिल ०.०२ मैट्रिक का औसत उत्पादन माना है।
मानसून की दस्तक के पहले बोवनी के लिए तैयार है खेत
जिले में धीरे-धीरे ही सही लेकिन मानसून एक्टिव हो रहा है। प्री-मानसून एक्टिविटी के साथ ही खेतों पर बोवनी की तैयारियों शुरु हो गई है। आसमान पर बादलों के छाने से लेकर हवाओं का दौर चल रहा है। प्री-मानसून की बारिश जिले में हुई है। हालांकि जिले में मानसून के सक्रिय होने से पहले ही किसानों ने अपने खेतों को बोवनी के लिए तैयार कर लिया है। पर्याप्त बारिश के बाद बोवनी का दौर शुरु होगा। वर्तमान में किसान बोवनी से पहले खाद व बीज की जुगाड़ में लगे हुए है। मानसून के आने के साथ किसान बोवनी की तैयारियां भी करने में जुट गया है।
सोयाबीन में तीन किस्म आएगी नई, दो पहली बार
सोयाबीन में पिछले सालों में अफलन व पीलापन की समस्या जिले में अत्यधिक रही है। ऐसे में विभाग ने सोयाबीन में तीन नई किस्मों की बोवनी कराने की तैयारी की है। इसमें दो पहली बार होगी और एक का प्रयोग पिछले साल शुरु हुआ। इसमें २०९८, राजसोया २४, २०३४ किस्मों की सोयाबीन की बोवनी होगी। इसमें बेहतर उत्पादन से लेकर रोगों की समस्या कम और अफलन व पीलापन भी नहीं होगा।

तीन नई किस्में होगी सोयाबीन की फसल में
इस बार दलहन व तिलहन को बढ़ावा देने के लिए इनका रकबा बढ़ाया है तो परंपरागत चली आ रही सोयाबीन का रकबा कम किया है। वहीं मक्का का रकबा भी बढ़ाया गया है। इस बार ३ लाख ४७ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी होगी जो अब तक की सबसे अधिक होगी। वहीं सोयाबीन में अफलन व पीलापन की रोकथाम के लिए तीन नई किस्मों की सोयाबीन की बोवनी इस बार की जाएगी। खाद-बीज से लेकर विभाग की खरीफ सीजन को लेकर तैयारियां पूरी है। -डॉ एके बड़ोनिया, उपसंचालक, कृषि