मंदसौर.
जिले में रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की सरकारी खरीदी २५ मार्च से शुरु हो रही है। ६८ केंद्रों पर गेहूं की खरीदी का काम शुरु होगा। हालांकि उपार्जन नीति में बदलाव नहीं आया है और पिछले साल की तर्ज पर ही उपार्जन होगा। इसमें किसान स्लॉट से बुक करेंगा और समर्थन पर गेहूं सरकारी को केंद्र पर जाकर बेचने की तारीख वह खुद तय करेगा। मेसेज नहीं आएगा और स्लॉट के आधार पर ही किसान गेहूं बेचने केंद्र पर पहुंचेगा। हालांकि गत वर्ष की अपेक्षा इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन तो कम किसानों ने कराया है लेकिन ओलावृष्टि के बाद अंतिम १५ दिनों में पंजीयन की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ी है उसे देखते हुए माना जा रहा है कि सरकारी खरीदी में भी बेहतर होगी। ६८ केंद्रों पर खरीदी की तैयारियां शुरु कर दी गई है।
चना, मसूर व सरसों की तय नहीं उपार्जन की तिथि
गेहूं की सरकारी खरीदी भले ही २५ मार्च से शुरु हो रही है और इसके लिए विभाग ने तैयारियां शुरु करते हुए ६८ केंद्र बनाने के साथ वहां उपार्जन से जुड़ी तैयारियां शुरु कर दी है। लेकिन चना, मसूर व सरसों की उपार्जन की तारीख अभी तय नहीं हुई है, हालांकि माना जा रहा है कि वह भी मार्च माह के अंतिम दिनों में शुरु हो जाएगी। लेकिन अभी फोकस गेहूं के उपार्जन की तैयारियों पर लगा हुआ है। अधिकांश केंद्र तो गोदामों पर ही बनाए है वहीं जहां नहीं है वहा गेहंू रखने के लिए गोदामों में जगह बनाने के साथ परिवहन के लिए वाहनों की व्यवस्था ओर किसानों को उनकी राशि का खाते में भुगतान करने तक की व्यवस्था की जा रही है।
मंडी में दाम तय करेंगे पंजीकृत किसानों का सरकारी खरीदी में रुचि
वर्ष २०१९ में जिले में बाढ़ के बाद रबी सीजन में बंपर गेहूं का उत्पादन हुआ था और वर्ष २०२० में कोविड के लॉकडाउन केकारण मंडियां बंद थी। ऐसे में सरकारी खरीदी रेकॉर्ड हुई थी। इसके बाद दो सालों में गेहूं के बाजार में दामों के कारण पंजीयन कराने के बाद भी किसान अपना गेहूं सरकारी खरीदी में बेचने नहीं पहुंचे तो साल दर साल पंजीयन कराने में भी किसानों की संख्या कम होती जा रही है। ऐसे मेें इस बार भी मंडियों में मिलने वाले गेहूं, चने के दाम तय करेंगे कि पंजीकृत किसान सरकारी खरीदी में अपनी उपज बेचने पहुंचे या नहीं। वर्तमान में जिले के २५ हजार ४८९ किसानों ने गेहूं के लिए पंजीयन कराया है, जबकि पिछली बार ४१ हजार गेहूं में पंजीयन हुए थे। तो २२ हजार ने ही सरकारी खरीदी में गेहूं बेचा था। गेहूं के साथ चना, मसूर व सरसों में मिलाकर ४४ हजार से अधिक ने पंजीयन कराया था और इस बार ३० हजार ७५७ ही पंजीयन किसानों के हुए है। ऐसे में आंकड़ों को देखे तो बाजार व मंडियों में मिल रहे अधिक दाम के कारण किसानों ने सरकारी खरीदी में किसानों की रुचि तय होती है। जिले में इस बार पर्याप्त बारिश होने के चलते गेहूं का रकबा बढ़ा लेकिन ओलावृष्टि ने फसल में नुकसान कर दिया। हालंाकि दो बार ओलावृष्टि के बाद भी विभाग इस बार रबी सीजन में अच्छी उत्पादन गेहूं में होने की बात कर रहा है।
७७ केंद्रों पर हुआ पंजीयन लेकिन उपार्जन होगा मात्र ६८ केंद्रों पर
सरकारी खरीदी में किसानों का पंजीयन बढ़ाने के लिए जिले में करीब ७७ केंद्र पंजीयन के लिए बनाए गए थे। जहां ६ फरवरी से १० मार्च तक पंजीयन हुआ। लेकिन अब उपार्जन के लिए ६८ केंद्र बनाए गए है। जहां २५ मार्च से उपार्जन शुरु हो रहा है। इस बार गेहूं का प्रति क्विंटल २११५ रुपए मिलेगा। जिले में दो लाख से अधिक किसान है लेकिन अब तक ३० हजार ७५७ ने पंजीयन कराया है, जबकि पिछले साल आंकड़ा ४४ हजार था तो उसके पहले यह आंकड़ा ३६ हजार था। जितने किसान जिले में खेती करते है उसकी अपेक्षा कुछ ही प्रतिशत सरकारी खरीदी में रुचि दिखा रहे है। तो पंजीयन के बाद उपार्जन में रुचि दिखाने वालों की संख्या इससे भी आधी है। जिले में करीब ६४५९७.४६ हेक्टेयर सिंचित रकबा है। ओर इस प किसानों ने अपनी उपज का पंजीयन कराया है लेकिन अब सरकारी खरीदी बाजार के दामों के आधार पर होगी।
जिले में रबी जिंसों के पंजीयन की यह है स्थिति