मंदसौर.
जिले की रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की खेती को देखने के लिए दिल्ली आईआरआई के वैज्ञानिको का दल पहुंचा। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ( आईआरआई) के कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रशांत बाबु ने मंदसौर के चांगली और लाल घाटी क्षेत्र में लगी रबी सत्र की गेहूं फसल का यहां के अधिकारियों के साथ पहुंचकर निरीक्षण किया। डॉ प्रशांत बाबु जिले में दो दिनों दौरे पर पहुंचे थे। ष
उन्होंने चांगली व लालघाटी मे संयुक्त कृषि षोध केंद्र सिपानी कृषि अनुसंधान फॉर्म परिक्षेत्र मे लगी गेहूं की फसल की विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया। साथ ही वेलाल घाटीगांव में स्थित लालघाटी गेहूं अनुसंघान केंद्र पर भी पहुंचे। लाल घाटी अनुसंधान केंद्र परआईएआरआई द्वारा प्रदत्त नई प्रजातियों के गेहुं का परीक्षण सिपानी कृषि अनुसंघान फॉर्म के साथ मिलकर किया जा रहा है। यहां आईएआरआई द्वारा विकसित की गई गेहुं की उन्नत किस्म एचडी 3410 को भी परीक्षण के लिए लाया गया। इस किस्म की विषेशता बताते हुए डॉ प्रशांक बाबु ने कहा कि यह किस्म उत्पादन में प्रति हेक्टेयर 65-70 क्विंटल तक की पैदावार देती है। इसका दिल्ली एनसीआर प्रदेश में लगाने की अनुमति मिली है। भविष्य में परीक्षण के आधार पर मध्यभारत के किसानों के लिए भी उपल्ब्ध होगी। इस किस्म के गेहूं की खेती करने से किसानों को उत्पादन बेहतर मिलेगा। इससे किसानों की अधिक आमदानी होगी। इसमें तापमान व नमी को ध्यान में रखते हुए किसानों को अक्टूबर के अंतिम सप्ताह व नवंबर केपहले सप्ता में बोवनी के लिए करनी चाहिए। डॉ प्रशांत बाबु के साथ इस दौरे में आईएआरआई फेलो और एसकेएएफ के डारेक्टर नरेंद्र सिंह सिपानी,आईएआरआई के रिसर्च एसोसिएट डॉ रामराज सेन मौजूद थे।