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चित्रगुप्त मंदिर में कायस्थ समाज ने की आराध्य देव की पूजा अर्चना

चित्रगुप्त मंदिर में कायस्थ समाज ने की आराध्य देव की पूजा अर्चना

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चित्रगुप्त मंदिर में कायस्थ समाज ने की आराध्य देव की पूजा अर्चना

चित्रगुप्त मंदिर में कायस्थ समाज ने की आराध्य देव की पूजा अर्चना

मंदसौर.
स्वामी सच्चिदानंदन भगवान चित्रगुप्त भगवान की कायस्थ समाज ने मंदिर पर पूजा-अर्चना की। हर वर्ष की तरह समाज ने इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार आयोजन किया। इस वर्ष यम द्वितीया भाई दूज का पावन पर्व भगवान श्रीगणेश, नारायण, शंकर, जगदंबा मां के साथ किया गया।

भगवान चित्रगुप्त का पूजन, स्रोत भजन, चालीसा एवं मंत्र जाप कर उल्लास के साथ दवात कलम अक्षर तूलिका का पूजन पर्व चित्रगुप्त मंदिर में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर कायस्थ समाज जिलाध्यक्ष रविशराय गौड़ ने कहा भगवान चित्रगुप्त न्यायब्रह्म हैं। यह यमलोक के मध्य संयमनीपुरी में रहते हैं। संयमनीपुरी में ऋषि देव तथा दानव प्रवेश नहीं कर सकते क्योंकि वहीं नरकलोक में चित्रगुप्त के बनाए नियमों के अनुसार ऋषिदेव तथा दानवों को उनके पाप कर्मों का दंड दिया जाता है। यमलोक में


प्रवेश नहीं कर सकते हैं क्योंकि यमलोक सृष्टि का न्यायालय एवं कारागार है जो ऋषि, देव, दानवों के लिए ही है। यमलोक ऋषि, देव, दानवों से अभेद्य है। तपस्या के बिना न्यायब्रह्म भगवान चित्रगुप्त के पास पहुंचना संभव ही नहीं है। चित्रगुप्त को केवल तपस्या से ही देखा जा सकता है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्व काल में यमुना ने यमराज को अपने घर पर सत्कार पूर्वक भोजन कराया था। उस दिन नारकीय जीवों को यातना से छुटकारा मिला और उन्हें तृप्त किया गया। वे पाप.मुक्त होकर सब बंधनों से छुटकारा पा गए और सब के सब यहां अपनी इच्छा के अनुसार संतोष पूर्वक रहे।

उन सब ने मिलकर उत्सव मनाया जो यमलोक के राज्य को सुख पहुंचाने वाला था। इसीलिए यह तिथि तीनों
लोकों में यम द्वितीया के नाम से विख्यात हुई। जिस तिथि को यमुना ने यम को अपने घर भोजन कराया था, उस तिथि के दिन जो मनुष्य अपनी बहन के हाथ का उत्तम भोजन करता है। उसे उत्तम भोजन समेत धन की प्राप्ति भी होती है। पुराण में कहा गया है कि कार्तिक शुक्लपक्ष की द्वितीया को पूर्वाह्न में यम के आराध्य चित्रगुप्त की पूजा करके यमुना में स्नान करने वाला मनुष्य यमलोक को नहीं देखता अर्थात उसको मुक्ति मिल जाती है। पूजा में मुख्य यजमान डॉ श्रवण श्रीवास्तव एवं अरविंद गौड़ रहे। हेमलता भटनागर ने सुमधुर भजन वंदना प्रस्तुत की। संचालन एडवोकेट सुनील रायजादा ने किया। इस अवसर पर कायस्थ समाज अध्यक्ष रविशराय गौड़, राजेश कुलश्रेष्ठ, शैलेंद्र माथुर, डॉ सतीश गौड़, दीपेश श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष शिव राजेंद्र शास्ता, किशोरराय गौड, बीआरसी मनिष गौड़, प्रोफेसर सुधीर रायजादा, सत्यनारायण श्रीवास्तव, आशीष गौड़, चंद्रशेखर निगम, अरुण गौड़ मौजूद थे। जानकारी समाज के मीडिया प्रभारी पंकज श्रीवास्तव ने दी है।
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