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भवन गिरने के बाद अब विभागों में उलझी यह भूमि

भवन गिरने के बाद अब विभागों में उलझी यह भूमि

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भवन गिरने के बाद अब विभागों में उलझी यह भूमि

मंदसौर.
भानपुरा नगर के नवीन बस स्टैंड पर स्थित 60 वर्ष पुराने गांधी सार्वजनिक वाचनालय का भवन विगत 25 जुलाई को भरभराकर धराशाही हो गया था। भवन गिरने के बाद भूमि से मलबा तो हटा लिया गया, परंतु भूमि को लेकर प्रशासन द्वारा अब तक कोई निर्णय लिया गया है। ग्रामीण जहां शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनाने की बात कर रहे हैं, वहीं यह भूमि किस विभाग के पास है, यह तय नहीं कर पा रहा है। हालांकि खाली पड़ी भूमि पर कुछ व्यापारियों ने गुमटी लगाकर व्यापार शुरू कर दिया है।


२५ जुलाई को भवन गिरने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे भवन के मलबे को 24 घंटे में साफ कर वहां पर जाली आदि लगा दी। भानपुरा की इस सबसे बेशकीमती भूमि पर बने भवन की ऊपरी मंजिल पर सार्वजनिक वाचनालय बना हुआ था एवं नीचे वाचनालय की दुकानें बनी हुई थी। भवन गिरने के बाद इन दुकानों में किराया देकर व्यापार कर रहे लोगों के सामने अब रोजगार का संकट भी खड़ा हो गया है।


१० वर्ष से उद्योग विभाग के पास था वाचनालय
वाचनालय रहते हुए वाचनालय की देखरेख का जिम्मदा जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के पास था। इस देखरेख से संबंधित आदेश विभाग को करीब १० वर्ष पूर्व मिला था। इस संबंध में महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र प्रकाश इंदौरे का कहना है कि 10 वर्ष पूर्व एक आदेश में नए चुनाव ना होने तक प्रशासक नियुक्त किया था, ना कि हमारे पास इसे देखने का अधिकार था। आदेश 10 साल पुराना हंै। वैसे भी शासकीय भवनों की देखरेख राजस्व विभाग के पास ही रहती है और अभी हमारा विभाग भी बदल गया है और अब यह लघु व सूक्ष्म उद्योग विभाग हो गया है। वहीं राजस्व विभाग केअधिकारियों का कहना है कि भूमि का अधिकार उन्हें सौंपा जाए तो ही वे कुछ कर सकते हैं। इसी के व्यवस्था के तहत अनुविभागीय अधिकारी अनुकूल जैन ने उक्त भवन के मलबे को हटाने के बाद तहसीलदार नारायण नांंदेड़ा को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की बात कही थी। नांदेड़ा ने कहा था कि गांधी सार्वजनिक वाचनालय की भूमि पर बने भवन की दुकानों के किराएदारों को नोटिस दिया जा रहा हैं। नगर के इस गांधी सार्वजनिक वाचनालय की भूमि पर बीती रात पुराने किराएदारों ने अपनी गुमटियां, मिनी बस आदि खड़ी करके जगह पर कब्जा कर लिया एवं कुछ ने अपना व्यापार व्यवसाय भी शुरू कर दिया है। इस मामले में तहसीलदार नांदेड़ ने बताया कि उपरोक्त भूमि पर उद्योग विभाग द्वारा देखरेख की जा रही है इनकी रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी मैं चाहता हूं कि यह भूमि राजस्व विभाग को दी जाए।
उल्लेखनीय है कि विगत 25 जुलाई को इस भवन के जर्जर अवस्था में गिरने के बाद यहां की गई सफाई एवं आगामी कार्रवाई के रुप में यह उम्मीद जताई थी। इस पूरी भूमि को खाली करवाया जाकर यहां यात्री प्रतीक्षालय, सार्वजनिक गांधी वाचनालय एवं अन्य व्यवसायिक कांप्लेक्स बनाया जाकर इस पर पूर्व में काबिज जरूरतमंद दुकानदारों को रियायतदर पर दुकानें उपलब्ध करवाई जाए। शेष दुकानों की नीलामी की जाकर गांधी सार्वजनिक वाचनालय की व्यवस्थाओं को सुचारु रुप से चलाया जाए। इस तरह से इस भूमि पर मंगलवार एवं बुधवार की दरमियानी रात में किए गए कब्जे को लेकर नगरवासी शासन की ओर आशा भरी निगाहों से पर्याप्त एवं सक्षम कार्यवाही की आस लगाए बैठे हैं।
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