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जीविका की चिंता करने वाला बुद्धू होता है

जीविका की चिंता करने वाला बुद्धू होता है

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जीविका की चिंता करने वाला बुद्धू होता है

मंदसौर.
संवत्सरी के दिन नई आबादी आराधना भवन में गुरुवार को मेवाड़ मालव ज्योति चंद्रकला श्रीजी ने कहा कि जीविका की चिंता करने वाला बुद्धू होता है। साध्वी चंद्रकला श्रीजी ने यह बात सुदर्शना श्री जी की उपस्थिति में कहीं। साध्वी ने बारसा सूत्र के वाचन के बीच कहा कि दुनिया आपसे पूछती है आपके पास क्या है। संत आपसे पूछते हैं कि आपके साथ क्या है। अपने जीवन का मूल्यांकन करे कि हम किस श्रेणी में आते हैं। संतों से एक व्यक्ति मिला तो संतों ने पूछा कहा से आ रहे उसने कहा कि जीवन बीमा करा कर। जीविका की चिंता नहीं की अपनो की चिंता की। जो जीविका की चिंता करता है वह बुद्धू होता है। उस व्यक्ति ने संतों से कहा कब क्या हो जाए पता नहीं। जीवन का भरोसा नहीं इसलिए मैंने 35 वर्षों की जिंदगी में बीमा करा लिया। प्रभु महावीर ने कहा है बुढ़ापा आता है तो इंद्रियों की शक्तियां क्षीण हो जाती है। रोग आकर शरीर को घेर लेते हैं इस अशक्त समय में आराधना कैसे कर सकेंग।


सूत्र के कराए वाचन
साध्वी भगवंत ने बारसा सूत्र के वाचन के समय 24 तीर्थंकर के जन्म से लेकर मोक्ष प्राप्ति तक की चित्रावली के दर्शन पूरे सूत्र के वाचन के दौरान करवाएं। साध्वी ने कहा कि यह जो गर्भ ट्रांसफर विधि आज की नहीं है यह भगवान महावीर के काल की है। भगवान महावीर का जीव पहले देव की कुक्षी में आया था उस महावीर के जीव को देवताओं ने त्रिशला नंदन की कुक्षी में स्थापित किया। साध्वी ने बताया कि बावीसवें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथजी की बारात जब जा रही थी, तब उन्होंने एक पिंजरे के अंदर सैकड़ों पशु देखें। उन्होंने अपने सारथी से पूछा कि ये जीव पिंजरे में क्यों कैद कर रखे हैं तब सारथी ने कहा कि आपका जो विवाह होने जा रहा है उसकी खुशी में इन सभी पशुओं को मारकर इनका मांस खिलाया जावेगा। यह सुनकर भगवान नेमिनाथ को इतना दुख हुआ और वह उसी वक्त विवाह के लिए जिस रथ मैं बैठ कर आए थे उससे उतरकर पलट गए व दीक्षा ग्रहण कर गिरनार पर्वत पर चले गए और वहां से मोक्ष प्राप्त किया। साध्वी जी ने बताया कि संवत्सरी के दिन हर श्रावक को सिर पर टोपी या पगड़ी व उत्तरासन धारण कर प्रवचन सुनना चाहिए। आठों दिन धारण कर प्रवचन सुनना सोने में सुहागा जैसा है। आपने बारसा सूत्र के बीच में कई उदाहरण दिए। 3 घंटे से ऊपर तक बारसा सूत्र का वाचन हुआ।


चेत्य परिपाटी निकली
बारसा सूत्र वाचन के बाद साध्वी भगवंत की पावन निश्रा में सहस्त्र फणा पाश्र्वनाथ मंदिर से चैत्य परिपाटी निकली। ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र चौरडिय़ा व श्रीसंघ के अध्यक्ष बाबूलाल जैन ने कहा कि 14 सितबंर को सामूहिक क्षमापना होगा। आराधना भवन श्रीसंघ का पारणा शांतिलाल बंबोरिया परिवार प्रतापगढ़ वाले द्वारा दशरथ नगर स्थित सोहनलाल मगनलाल चौरडिय़ा जैन मांगलिक भवन पर होगा।