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पूरे देश में केवल यहां पूजा जाता है रावण, जमाई भी है…

पूरे देश में केवल यहां पूजा जाता है रावण, जमाई भी है...

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पूरे देश में केवल यहां पूजा जाता है रावण, जमाई भी है...

मंदसौर.

मंदसौर में लोग रावण को अपना दामाद मानते है। मंदसौर का असली नाम दशपुर था, और यह रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी का मायका था. इसलिए इस शहर का नाम मंदसौर पड़ा। चूंकि मंदसौर रावण का ससुराल था, और यहां की बेटी रावण से ब्याही गई थी, इसलिए यहां दामाद के सम्मान की परंपरा के कारण रावण के पुतले का दहन करने की बजाय उसे पूजा जाता है. मंदसौर के रूंडी में रावण की मूर्ति बनी हुई है, जिसकी पूजा की जाती है।


नामदेव वैष्णव समाज सुधारक समिति खानपुरा के तत्वावधान में दशहरे पर रावण वध का कार्यक्रम आयोजित होगा। समाज के अध्यक्ष अशोक बघेरवाल ने बताया कि देश में सभी जगह रावण का दहन किया जाता है लेकिन सिर्फ नामदेव समाज द्वारा ही रावण का वध किया जाता है। खानपुरा क्षेत्र में स्थित 41 फीट ऊंची अति प्राचीन रावण की प्रतिमा चमत्कारी भी है। कई भक्त अपनी मनोकामना लेकर रावण के पांव पर लच्छा बांधते है। कहा जाता है कि नामदेव समाज के लोग मंदोदरी को मंदसौर की बेटी और रावण को जमाई मानते हैं। इस नाते नामदेव समाज प्राचीन परम्परा का निर्वहन करते हुए करीब 1५0 साल से भी अधिक समय से रावण का वध करता आ रहा है। वहीं रावण की प्रतिमा के सामने से जब भी महिलाएं गुजरती है तो जमाई के प्रति सम्मान देते हुए घुंघट डालकर निकलती है। रावण की प्रतिमा के पैर में एकातरा बुखार आने पर लच्छा बांधा जाता है, इससे लोगों का बुखार ठीक हो जाता है। संतान प्राप्ति के लिए भी लोग रावण की पूजा करते हैं। दशहरा पर्व पर सुबह रावण प्रतिमा की पूजा की जाती है और शाम को प्रतीकात्मक वध किया जाता है।

शहर सहित जिले भर में १९ अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान कहीं दशानन के पुतलों का दहन तो कहीं रावण का वध कर उसका अभिमान तोड़ा जाएगा। मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में रावण पूजन के बाद वध होगा, वहीं ग्राम धमनार में भी रावण वध होगा। इसके साथ ही जिले में करीब 10 स्थानों पर रावण के पुतले जलेंगे। दशानन के पुतले कहीं गर्दन हिलाएंगे तो कहीं आवाजें निकालकर दर्शकों को लुभाएंगे। रंग-बिरंगी आतिशबाजी भी आकर्षण का केन्द्र रहेगी।