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इस गांव में कच्चे मकान में जीवन यापन कर रहे ग्रामीण, आवागमन के नहीं है साधन

इस गांव में कच्चे मकान में जीवन यापन कर रहे ग्रामीण, आवागमन के नहीं है साधन

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इस गांव में कच्चे मकान में जीवन यापन कर रहे ग्रामीण, आवागमन के नहीं है साधन

मंदसौर.
कच्चे मकान और झोपडिय़ा शौचालय भी नहीं। आवागमन के साधन भी नहीं। पैदल और अपने साधनों से ही आने-जाने को मजबूरी। पानी भी कई कोस दूर से कुएं से सिर पर उठाकर लाना पड़ रहा है। शौचालय स्वीकृति जिनके हुए, उन्हें अब भी राशि का इंतजार है। किसी की दो तो किसी की चार बीघा जमीन के किसान इस गांव में रहते है। यह कहानी है मल्हारगढ़ विधानसभा के चिपलाना पंचायत के गांव लुहारी की। जो जिला मुख्यालय के नजदीक है। इस गांव में विकास कई सालों के बाद भी नहीं पहुंचा है। न ही यहां के लोगों को आसरा नसीब हुआ है और न यहां के लोगों के अच्छे दिन आए। गांव में 80 परिवार ऐसे है, जिन्हें आवास का इंतजार है तो 40 परिवार ऐसे है, जिन्हें शौचालय मिलने का इंतजार है। तो 50 परिवार ऐसे है, जिन्हें शौचालय बनने के बाद राशि मिलने का इंतजार है। ग्रामीणों की इस गांव के साथ अपनी किस्मत बदलने का कई सालों से इंतजार है। प्रधानमंत्री आवास योजना में हर गरीब को घर देने का दावा तो स्वच्छ भारत अभियान में शौचालय बनाने के साथ पेयजल की आपूर्ति सहित विकास के तमाम बड़े दावे इस गांव में आकर खोखले साबित हो रहे है।


दो साल में मात्र 14 मकान गांव में आए
गांव के देवीलाल गुर्जर जिनके पास १ बीघा से भी कम जमीन है। पर उन्हें न आवास का लाभ मिला, न शौचालय का। नारायण गुर्जर को भी आवास व शौचालय दोनों मिलने का इंतजार है। पन्नालाल गुर्जर को भी आवास का इंतजार है। कंवरलाल गुर्जर, भुवानलाल गुर्जर भी कच्चे मकान में रहकर जीवन व्यापन कर रहे है, उन्हें भी आवास नहीं मिला। तो मानसिंह गुर्जर, प्रकाश गुर्जर, बापूलाल गुर्जर को भी आवास का इंतजार है। गांव में दो साल में मात्र १४ आवास आए, वह भी अधूरे है। कई को राशि का इंतजार है तो ८० परिवार ऐसे है जो कच्चे मकान या झोपडिय़ों में रहने को मजबूर है और फिर भी आवास नहीं मिला है। गांव के मुकेश पिता नवलराम को शौचालय के लिए राशि अब तक नहीं मिली। ४० हजार की लागत से शौचालय बनाया, लेकिन १२ हजार की राशि अब तक नहीं मिली। ऐसे एक नहीं अनेक हितग्राही है, जो शौचालय बनाने के बाद राशि का इंतजार कर रहे है। तो ४० परिवार तो ऐसे है कि उन्हें शौचालय मिला ही नहीं।


चुनाव रे बाद आया था, फेर अबार तक नी आया
चौपाल पर बैठे ग्रामीणों ने कहा कि नेताजी तो पेला चुनाव में आया था, नाग बावजी मंदिर पर पार्टी गांव वारा दी थी, वेरे बाद अबार तक नी आया। छोटो गांव है, तो कोई ध्यान बी नी दे और नेता लोगा के बाते महत्व भी नी राखें। अनी रोड ती निकरे तो गाडिय़ा रा कांच भी नीचे नी उतारे। कागज तो सब साब लोगों ने दिया, पर न तो मकान मलियो और नी शौचालय। पाणी री भी कई व्यवस्था कोनी। कई मालव कदी अणी गांव री किस्मत बदलेगा। काम बी गांव में कई कोनी।


फेक्ट फाईल
गांव की आबादी- ७००
गांव में मतदाता-४००
गांव- लुहारी, पंचायत चिपलाना
विधानसभा-मल्हारगढ़
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चार बीघा जमीन है
मात्र चार बीघा जमीन में जीवन यापन कर रहे है और मकान भी कच्चा है। सभी दस्तावेज व पात्रता होने के बाद भी अब तक आवास नहीं मिला है। -प्रकाश गुर्जर


छत डालना बाकी है
आवास का लाभ नहीं मिला है। पात्रता है। छोटे किसान है। जैसे-तैसे काम तो शुरु कर दिया था, लेकिन अब तक राशि का इंतजार है। राशि मिले तो छत डालने सहित अन्य काम पूरा करेंगे। -बापूलाल गुर्जर


सपना नहीं हुआ पूरा
सोचा था सरकार की इस योजना में मकान का सपना पूरा होगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। आज भी कच्चे मकान में रह रहे है। और न हीं कभी कोई आकर यहां की सुध लेता है। एक नहीं अनेक परेशानियों के बीच गा्रमीण जीवन यापन कर रहे है। -नारायण गुर्जर


कच्चे मकान में रहता हूं
कच्चे मकान में रहता हु। मांगे गए सभी दस्तावेज दे दिए है। फिर भी अब तक आवास नहीं मिला। सरकार की योजना में उम्मीद थी कि अब पक्के घर का सपना पूरा होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। -पन्नालाल गुर्जर
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