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अब सुगम, सुविधा और समाधान एप से होगा चुनाव

अब सुगम, सुविधा और समाधान एप से होगा चुनाव

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अब सुगम, सुविधा और समाधान एप से होगा चुनाव

मंदसौर । विधानसभा चुनाव के दौरान राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों को सभा के लिए मैदान की अनुमति लेने, रैली निकलवाने, हेलीपैड के लिए अनुमति लेने के लिए अब निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी अनुमतियों के लिए अब ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। निर्वाचन कार्य के लिए निर्वाचन आयोग ने सुगम सुविधा व समाधान नामक तीन एप बनाए है, जिनसे उक्त सभी कार्य सम्पन्न किए जाएंगे। एप पर 72 घंटे पूर्व ऑनलाइन आवेदन करना होगा। चुनाव आयोग ने पारदर्शिता के मद्देनजर किसी भी कार्य की अनुमति लेने के लिए राजनैतिक दलों के लिए निर्वाचन आयोग ने पहले आओ पहले पाओ की सुविधा दी है। इसके तहत जो पहले ऑनलाइन आवेदन करेगा, उसे पहले अनुमति दी जाएगी। वाहनों के अधिग्रहण करने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाएगी।
बैंकों के लेन-देन पर रहेगी नजर
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर विधानसभा चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता को बनाए रखने के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय बैंकों से किए जा रहे संदेहास्पद नकद लेन.देन पर नजर रखेंगा। संबंधित बैंक से लेन.देन के संबंध में सूचना भी प्राप्त की जाएगी। जिला निर्वाचन अधिकारी बैंकों से जो जानकारी प्राप्त कर सकेंगे उनमें पिछले दो माह में जमा या निकासी के उदाहरण के बिना निर्वाचन के दौरान एक लाख रूपये से अधिक की असामान्य एवं संदेहजनक राशि की निकासी या बैंक खाते में डालना, जिले अथवा निर्वाचन क्षेत्र में हुए ऐसे अंतरण जिसमें आरटीजीएस के माध्यम से एक बैंक खाते में विभिन्न व्यक्तियों के खाते में राशि का असामान्य रूप से अंतरण हो, शामिल रहेगा। इसके साथ ही अभ्यर्थियों या उनकी पत्नी या उनके आश्रितों ;शपथ पत्र में उल्लेखितद्ध के बैंक खाते में एक लाख रूपये से अधिक की नकद राशि जमा करने या निकालने की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी।
मतदाताओं को धमकाकर वोट मांगने पर होगी कार्रवाई
विधानसभा निर्वाचन के अंतर्गत मतदान 28 नवंबर को कराया जाएगा। इस मतदान में मतदाताओं को डराने धमकाने पर दंडात्मक कार्रवाईकी व्यवस्था दी गई है। सार्वजनिक एवं लोकहित में जनसामान्य से अपील की गई है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 171 ख के अनुसार जो कोई निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान किसी व्यक्ति को उसके निर्वाचन अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्प्रेरित करने के उद्देश्य से नगद या वस्तु रूप में कोई परिपोषण देता है या लेता है तो वह एक वर्ष तक के कारावास या जुर्माने या दोनो से दंडनीय होगा।
प्रमाणन कराने की नहीं होगी आवश्यकता
स्वयं के सोशल मीडिया एकाउंट पर पोस्ट होने वाले कंटेंट के प्रमाणन की आवश्यकता नहीं
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रचार अभियान के दौरान वेबसाईट, ब्लॉग अथवा ट्विटर, फेसबुक जैसे स्वयं के सोशल मीडिया एकाउंट पर पोस्ट और अपलोड की जाने वाली राजनैतिक सामग्री मसलन मैसेज, कमेंट्स, फोटो एवं वीडियो का पूर्व प्रमाणन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।