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29 करोड़ के शिवना शुद्धिकरण प्रोजेक्ट पर अफसरो की अनदेखी लगा रही पलीता

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मंदसौर.
दो दशक से शिवना नदी का शुद्धिकरण क्षेत्र की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा। अब जब केंद्र के क्लीन गंगा प्रोजेक्ट में करीब २९ करोड़ की लागत से प्रोजेक्टी मंजूरी के बाद इस पर काम शुरु हुआ तो अब इसकी गुणवत्ता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे है। बावजूद अफसर गंभीरता नहीं दिखा रहे है। यहां तक की विभागीय मंत्री व सांसद ने तक फटकार लगाई फिर भी असर नहीं दिख रहा है। मॉनीटरिंग व अनदेखी के कारण २९ करोड़ के प्रोजेक्ट को पलीता लग रहा है। जहां ओपन ड्रेनेज की बात हुई थी वहां छोटी साईज के पाईप डाले जा रहे है। शिवना प्रोजेक्ट पर निगरानी ओर सुझावों के लिए कमेटी बनी थी लेकिन वह सिर्फ कागजों में ही अब सीमट गई है। वहीं ८ किमी क्षेत्र जिसमें खानपुरा के तीन छत्री बालाजी मंदिर के समीप से पाईप बिछाना है। इसमें घाटों का सौंदर्यीकरण, रैलिंग से लेकर ट्रीटमेंट प्लांट सबकुछ शामिल है लेकिन पाईप में ही उठते सवालों का जवाब ना जिला प्रशासन दे पा रहा है और ना ही पीआईयू। बड़ी विडबंना तो यह है जिस मुद्दें पर बरसों से राजनीति हुई उस मुद्दें पर दोनों दलों के नेताओं ने अब तक चुप्पी साध रखी है।
ऐसे समझें शिवना प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर उठते सवालों का कारण


डाले जा रहे पाईप पर सीमेंट का स्लोप
जो पाईप शिवना प्रोजेक्ट में शिवना के किनारें पर बिछाए जा रहे है। उन्हें खुदाई कर फिर लेवल मिलाकर पानी की निकासी के हिसाब से डालकर उसके ऊपर सीमेंट कांक्रीट का स्लोप बनाया जा रहा है। वहीं तय दूरी पर चैंबर बनाए जा रहे है।
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पाईप को मिट्टी डालकर कर रहे है बंद तो जुड़ाव वाली जगह से बह रहा पानी
स्लोप डालना है लेकिन पाईप डालने के साथ कुछ जगहों पर सिर्फ मिट्टी ही डाली जा रही है। ऐसे दो पाईप को जोडऩे वाली जगह को सीमेंट से पैक करने के साथ उसका लेवल और प्लेटफॉर्म भी बनाना है लेकिन ऐसा कुछ नहीं करते हुए मिट्टी से भर रहे है इस कारण पानी अभी से ही रिसकर बाहर भी आता दिख रहा है।
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पानी में तेर रहे है पाईप
जो पाईप डाले जा रहे है वह इतने छोटे है कि नदी का बहाव बारिश के दौरें में यह सह नही पाएंगे ऐसा आम चर्चा हो रही है। वहीं जगहों पर अभी से ही पाईप पानी में तेरते दिख रहे है। इसी कारण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे है। विभाग का दावा सही काम का है लेकिन काम सही है तो प्रोजेक्ट की जानकारी अब तक शिवना के लिए काम करने वाली समिति व संगठनों के सामने नहीं रखी जा रही है यह भी सवाल खड़े कर रहा है।


स्लोप डालना है लेकिन कुछ जगह लगा दिए पैंबद
जो पाईप बिछाए जा रहे है उनके ऊपर सीमेंट का स्लोप डाला जा रहा है। बताया जा रहा है स्लोप डालना ही सही तो फिर कुछ जगहों पर पाईप को जोडऩे वाली जगहों पर सीमेंट के पैंबद लगाकर ही जोड़ा जा रहा है। यह भी सवाल खड़े कर रहा है। तकनीकि रुप से डीपीआर के अनुसार इसमें क्या काम होना है और जो काम हो रहा है यह शिवना में पानी के बहाव के बीच टीक पाएगा या नहीं इन्हीं सवालों के बीच विभागीय या प्रशासनिक अमला इस पर स्थिति ही स्पष्ट नहीं कर रहा है।
इन सवालों के कारण शिवना प्रोजेक्ट पर उठ रहे सवाल, जिनके जवाब अफसरों के पास नहीं
नमामि गंगे प्रोजेक्ट में जब शिवना के लिए २९ करोड़ की मंजूरी मिली और डीपीआर तैयार हो रही थी तब तत्तकालीन कलेक्टर गौतमसिंह ने समिति का गठन किया था और शिवना के लिए समिति और इसके लिए काम करने वालेे लोगों की बैठक हुई थी। काम शुरु होने और अधिकारी के जाने के बाद पूरी समिति सिर्फ कागजों तक सीमट गई। वहीं प्रोजेक्ट में जो काम हो रहा है विभाग व अधिकारी उस प्रोजेक्ट को सार्वजनिक भी नहंी कर रहे है। वहीं पहले कलेक्टर ने कहा था कि ओपन ड्रेनेज यानी बड़ा नाला बनेगा जो जेसीबी से साफ हो जाएगा अब यहां पाईप डाले जा रहे है और वह भी छोटी साईज के जहां अधिक पानी आने पर वहां निकासी और गंदगी जमा होने पर सफाई की समस्या होगी। वहीं ८ किमी क्षेत्र में पाईप बिछाना है उसमें भी कमी की जा रही है। पाईप के ऊपर कही स्लेब डाला जा रहा है तो कही पैबंद तो कही सिर्फ मिट्टी डाली जा रही है। शिवना के लिए काम करने वाले लोगों को कहना है कि काम डीपीआर के अनुसार नहीं हो रहा है और गुणवत्ता भी ऐसी है कि बारिश का बहाव यह पाईप नहीं झेल पाएगा और गंदगी और कचरा जमा होने पर निकासी ही अवरुद्ध हो जाएगी। ऐसे में इस प्रोजेक्ट के बाद भी शिवना प्रदूषण से मुक्त नहीं हो पाएगी।


विभाग के मंत्री और सांसद की फटकार का भी नहीं पड़ा असर
पिछले दिनों निगरानी समिति की बैठक में पर्यावरण मंत्री हरदीपसिंह डंग व सांसद सुधीर गुप्ता ने समीक्षा के दौरान शिवना प्रोजेक्ट पर उठ रहे सवालों के बीच पीआईयू से लेकर जिला प्रशासन को फटकार लगाते हुए इसे गंभीरता से लेकर इसकी जानकारी देने की बात कही थी। लेकिन विभागीय मंत्री व सांसद की फटकार का भी पीआईयू व जिला प्रशासन के अफसरों पर अब तक असर नहीं हुआ है। जिस शिवना के नाम से शहर की राजनीति दो दशक से चली आ रही है उसमें भी लापरवाही ओर अनदेखी भारी पड़ रही है।