
मंदसौर.
तेलिया तालाब नक्शों के फेर में उलझा हुआ है। मूल नक्शा याचिकाकर्ता द्वारा अब सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया है। जबकि मूल नक्शे के अलावा एक और नक्शा इसमें होने के कारण यह स्थिति बनी है। तेलिया तालाब बचाओ समिति के अध्यक्ष कांतिलाल राठौर ने तेलिया तालाब की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया कि 21 सितंबर 2020 को एनजीटी मुख्य बेंच नईदिल्ली द्वारा एक निर्णय तेलिया तालाब के डूब क्षेत्र को बचाने के लिए पारित किया गया है। इस आदेश के पालनार्थ कलेक्टर द्वारा 26 अक्टूबर 2020 को तेलिया तालाब के सीमांकन के लिए एक समिति बना कर जल संसाधन के पास उपलब्ध मूल नक्क्षे एवं नगर पालिका के पास उपलब्ध नक्क्षे का मिलान कर सीमांकन के संबंध में स्थायी चिन्ह लगाने का आदेश दिया था।
एनजीटी के निर्देश के बाद जो सीमांकन हुआ वह मूल नक्शे पर नहीं हुआ
लेकिन यह सीमांकन नगरपालिका के पास उपलब्ध नक्क्षे के आधार पर ही किया गया। यह नक्क्षा मूल नक्क्षा न होकर एफटीएल की उंचाई एक फीट बढ़ाए जाने पर होने वाली स्थिति के आकलन के लिए बनाया गया प्रस्तावित नक्क्षा था एवं यह प्रस्तावित नक्क्षा ही एनजीटी में लगाया गया। जब सीमांकन शुरू हुआ तब यह गलत होने की वजह से डॉ संतोष राठौर द्वारा इस सीमांकन के विरुद्ध कलेक्टर एवं सीएमओ नगर पालिका के सम्मुख आपत्ति दर्ज की थी एवं साथ में तेलिया तालाब का जल संसाधन विभाग से प्राप्त मूल नक्क्षे की प्रति देते हुए उस मूल नक्क्षे के अनुसार सीमांकन करने की मांग की थी।
आपत्ति के बाद सीएमओ ने मूल नक्शे की मांग की थी
सीएमओ नगर पालिका द्वारा इस आपत्ति पर संज्ञान लेते हुए जलसंसाधन विभाग से उनके पास उपलब्ध तेलिया तालाब के मूल नक्क्षे की मांग की एवं वह प्राप्त होने पर मूल नक्क्षे का नगर पालिका के पास उपलब्ध नक्क्षे एवं नगर पालिका के पास उपलब्ध दस्तावेजों से मिलान करने पर उनमें व्यापक अंतर पाया गया। इस पर कलेक्टर को इस बारे में पत्र 19 मार्च 2021 द्वारा लिखते हुए इसकी सूचना दी गई। और बताया कि दोनों नक्शों में अंतर है। इसके बाद नगर पालिका एवं जल संसाधन विभाग के मध्य पत्राचार में फिर जल संसाधन विभाग ने पत्र 23 सितंबर 2021 के माध्यम से मूल नक्क्षे के बारे में बताया था कि यह मूल नक्क्षा सन 1978 में बना है। इस नक्क्षे पर जल संसाधन विभाग के 3 अधिकारियों, उप यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन तथा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जलसंसाधन एवं राजस्व विभाग के 3 अधिकारियों कस्बा पटवारी, राजस्व निरीक्षक एवं तहसीलदार के संयुक्त हस्ताक्षर है। इसमें एफटीएल 1449.5 फीट एवं एमडब्ल्यूएल 1452.5 फीट बताया गया है एवं इसी आधार पर रेखांकित भी किया गया है। यह नक्क्षा 2 पेजे में है। पहले पेज पर डूब में आने वाली शासकीय भूमि के सभी सर्वे नंबर लिखे है एवं द्वितीय पेज पर डूब में आने वाली समस्त निजी भूमि के सभी सर्वे के नंबर, उनके भूमि स्वामियों के नाम, सर्वे नंबर का कुल रकबा एवं उस सर्वे नंबर की कितनी भूमि डूब में आ रही है इसका विवरण है। इसी को लेकर 31 जनवरी-2022 को एसडीएम जो कि स्वयं कोर्ट मैटर्स में ओआईसी है उनके द्वारा कलेक्टर को लिखा है जिसमे अंतिम पेश में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि सीएमओ तथा जल संसाधन विभाग के द्वारा किए गए विभिन्न पत्राचारो से यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि एनजीटी के समक्ष नगरपालिका परिषद द्वारा प्रस्तुत एलएन बडगोतिया अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन विभाग द्वारा हस्ताक्षरित नक्क्षा मूल नक्क्षा ना होकर वर्ष 2002 में तेलिया तालाब के बांध की उंचाई को एक फीट बढ़ाने के प्रस्ताव से संबंधित है।
जल संसाधन विभाग द्वारा 30 जुलाई 2021 को प्रस्तुत नक्क्षा जिस पर कार्यपालन यंत्री अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन विभाग, उपयंत्री जल संसाधन विभाग, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी के हस्ताक्षर बने है और इस नशे में एमटीएल और एफटीएल में आने वाली भूमियों का स्पष्ट विवरण अंकित है कि मूल नक्क्षा है।
ऐसे में उन्होंने नक्शे की वस्तुस्थिति से एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराते हुए जल संसाधन विभाग के मूल नक्क्षे को उक्त न्यायालयों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए इसी नक्क्षे के आधार पर तेलिया तालाब का सीमांकन किए जाने की मांग की।
Published on:
05 Jul 2022 10:39 am
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