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आज शिवना तट पर जुटेंगे दीपदान करने हजारों श्रद्धालु

आज शिवना तट पर जुटेंगे दीपदान करने हजारों श्रद्धालु

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आज शिवना तट पर जुटेंगे दीपदान करने हजारों श्रद्धालु

आज शिवना तट पर जुटेंगे दीपदान करने हजारों श्रद्धालु

मंदसौर.
भगवान पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र में शिवना नदी के तट पर आज आस्था का जनसैलाब उमड़ेगा। कार्तिक माह की पूर्णिमा को दीपदान के महत्व के तहत आज दीपदान करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचेगे। टाटिया विसर्जित करने की परंपरा के चलते शिवना के तटों पर टाटियां की दुकानें सज गई। तमाम सुरक्षा इंतजामों के बीच पूर्णिमा के साथ यहां चल रहे मेले की रौनक भी लौटेगी। हालांकि इस बार पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का साया होने के कारण कम लोग पहुंचेगे लेकिन एक दिन बाद भी कई लोग टाटिया प्रभावित करने से लेकर दीपदान करने के लिए पहुंचेगे। वहीं कोविड की तमाम बंदिशों को हटाने के बाद यहा चल रहे कार्तिक मेले में भी अब भीड़ बढ़ेगी। मेले की रंगत और पूर्णिमा पर आने वाली भीड़ पर भी संकट के बादल खड़े कर दिए है। शिवना नदी में वर्तमान में पानी जमा है और नदी और तटों पर जमा हुई गंदगी भी साफ कीगई। इसके चलते नदी में दीपदान करने के लिए लोगों की भीड़ आज उमड़ेगी।


सुरक्षा के रहेंगे पुख्ता इंतजाम, तट से लेकर मंदिर पर रहेगी नजर
पूर्णिमा पर आने वाली भीड़ के चलते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। शिवना नदी के घाटों पर और मेला परिसर के साथ ही मंदिर क्षेत्र में पुलिस का सख्त पहरा रहेगा। पुलिस के सख्त पहरे के बीच जिलेवासी आस्था के साथ दीपदान कर पशुपतिनाथ का दर्शन करेंगे और मेले में भी पहुंचेगे। वहीं बड़ी पुलिया क्षेत्र से लेकर छोटी पुलिया व दोनों और किनारों पर पुलिस की निगाह रहेगी। वहीं पार्किंग से लेकर अन्य तमाम इंतजामों को भी पुख्ता गुरुवार को ही किया गया है।


पशुपतिनाथ के दर्शन करने पहुंचेगे भक्त तो मेले की रौनक भी बढ़ेगी
कार्तिक पूर्णिमा के चलते शिवना नदी में दीपदान करने के लिए आने वाले भक्तों के साथ मंदिर पर भी बाबा पशुपतिनाथ के दर्शन करने के लिए भीड़ उमड़ेगी। ऐसे में मंदिर में विशेष इंतजाम पूर्णिमा के चलते किए गए है। कार्तिक पूर्णिमा और कार्तिक माह में पशुपतिनाथ मंदिर व प्रतिमा की स्थापना के चलते इसका महत्व भी अधिक रहता है। ऐसे में मंदिर पर दर्शनार्थ आज भीड़ उमड़ेगी।


कार्तिक पूर्णिमा महत्व
कार्तिक का महीना भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय महीना है। मान्यता है कि कार्तिक माह में भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। साल में कुल 12 पूर्णिमा होती है। इनमें कार्तिक माह की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। पूर्णिमा को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति किसी पवित्र नदी में स्नान करने की मान्यता है। भगवान विष्णु के दस अवतारों में पहला अवतार मत्स्य अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य रूप धारण किया था। नारायण के पहला अवतार कार्तिक पूर्णिमा के दिन होने की वजह से वैष्णव मत में इसका विशेष महत्व है। मान्यता यह भी है कि कार्तिक मास में नारायण मत्स्य रूप में जल में विराजमान रहते हैं और इस दिन मत्स्य अवतार को त्यागकर वापस बैकुंठ धाम चले जाते हैं।
तुलसी का प्राकट्य
पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि को देवी तुलसी का भगवान के शालिग्राम स्वरूप से विवाह हुआ था और पूर्णिमा तिथि को देवी तुलसी का बैकुंठ में आगमन हुआ था। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवी तुलसी की पूजा का खास महत्व है। मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही देवी तुलसी का पृथ्वी पर भी आगमन हुआ है। इस दिन नारायण को तुलसी अर्पित करने से अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।