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वित्त वर्ष 2019 में सबसे ज्यादा हो सकता है कच्चे तेल का आयात बिल, पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक

कच्चे तेल के आयात का बिल बढ़कर जा सकता है 115 अरब डॉलर के करीब पिछले साल 2017-18 के आयात बिल 88 अरब डॉलर से 30 फीसदी अधिक है वित्त वर्ष 2015 में तेल आयात बिल 112.74 अरब डॉलर था

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Saurabh Sharma

Apr 16, 2019

Crude oil

वित्त वर्ष 2019 में सबसे ज्यादा हो सकता है कच्चे तेल का आयात बिल, पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक

नई दिल्ली।कच्चे तेल की कीमत में आई हालिया तेजी से भारत के कच्चा तेल का आयात बिल पिछले पांच साल में नई ऊंचाई पर जा सकता है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2018-19 में कच्चे तेल के आयात का बिल बढ़कर 115 अरब डॉलर के करीब जा सकता है, जोकि पिछले साल 2017-18 के आयात बिल 88 अरब डॉलर से 30 फीसदी अधिक है।

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मोदी कार्यकाल का सबसे ऊंचा स्तर
एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, "हालिया अनुमान बताता है कि तेल आयात का बिल वित्त वर्ष 2019 में 115 अरब डॉलर तक जा सकता है या इसे पार भी कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राजग सरकार ( राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ) के पांच साल के कार्यकाल में यह तेल आयात का सबसे ऊंचा स्तर है। मोदी सरकार में शुरुआत में वित्त वर्ष 2015 में तेल आयात बिल 112.74 अरब डॉलर था। हालांकि बाद के वर्षो में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट आने से इसमें कमी आई।" हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल ( पीपीएसी ) ने अपनी हालिया समीक्षा में तेल आयात बिल 2017-18 के 88 अरब डॉलर से 27 फीसदी की वृद्धि के साथ 112 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया है।

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यहां हैं थोड़ी राहत
दिलचस्प बात यह है कि पीपीएसी का आकलन भारत के कच्चे तेल बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 57.77 डॉलर प्रति बैरल और डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य 70.73 रुपए प्रति डॉलर के आधार पर है, जबकि कच्चे तेल का भाव भारत के तेल बास्केट में काफी समय पहले ही 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हो गया है। थोड़ी राहत की बात यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपए में मार्च में थोड़ी मजबूती आई है जोकि जनवरी और फरवरी में 70-70 रुपये प्रति डॉलर चल रहा था।

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