
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में बने बांके बिहारी मंदिर के नाम दर्ज जमीन को कब्रिस्तान दर्ज किए जाने के मामले में सुनवाई की। इस मामले में हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए मंदिर की जमीन की सरकारी दस्तावेजों में गलत तरीके से हुई सभी एंट्रियों को रद्द कर दिया है। साथ ही, कोर्ट ने जमीन को 30 दिनों में बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के नाम दर्ज किए जाने का आदेश दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…
मुस्लिम कब्रिस्तान कहते हैं तो हिंदू मंदिर कहते हैं
दरअसल, मथुरा के पास शाहपुर गांव है। इस गांव में एक पुराना चबूतरा है, जिसके ऊपर मजार बनी हुई है। चबूतरे के पास हर वक्त दो पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। ऐसा इसलिए क्यूंकि गांव में रहने वाले हिंदू चबूतरे को बांके बिहारी मंदिर का अवशेष मानते हैं, जिसे मुगल बादशाह औरंगजेब ने तोड़ दिया था। वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग इस जगह को कब्रिस्तान बताते हैं।
कागजों में किया गया हेर-फेर
राम अवतार गुर्जर ने इस मामले में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। इनके मुताबिक, बांके बिहारी मंदिर को हथियाने के लिए 70 साल से साजिश चल रही है। गांव में पहले सिर्फ हिंदू रहते थे, बाद में हरियाणा से मुसलमान आकर बस गए। उनका कहना है कि जमीन पर कब्जा करने की कोशिश 1970 में शुरू हुई थी। ये बात एक न्यूज वेबसाइट के रिपोर्ट के आधार पर लिखी हुई है।
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ऐसे सामने आई सच्चाई
न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, राम अवतार ने बताया कि सपा के एक स्थानीय नेता ने लेखपाल के साथ कागजों में हेरा-फेरी की। अक्टूबर, 2019 में एक दिन मुस्लिम पक्ष के लोग इस स्थान पर बुलडोजर लेकर आए और चबूतरे के पास बने कुएं को तोड़ दिया। इसके बाद 15 मार्च, 2020 को चोरी-चुपके चबूतरे पर बना बिहारी जी का सिंहासन तोड़ दिया गया और मजार बना दी गई। ये मामला फिर पुलिस और प्रशासन के हाथ में चला गया। तब से ही मजार पर यहां पुलिसवाले तैनात हैं। फिलहाल, हाई कोर्ट ने इस जमीन को बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के नाम दर्ज किए जाने का आदेश दिया है।
Published on:
16 Sept 2023 12:15 pm
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