
किवंदती है कि जब भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र पर पुल का निर्माण किया, उस दौरान बंदर जगह-जगह से पहाड़ों की शिलाएं लेकर आए। नल और नील ने पुल का निर्माण किया। हनुमानजी द्रोणागिरी पर्वत को लेकर ब्रज क्षेत्र से होकर गुजर रहे थे। तब तक पुल का निर्माण कार्य पूरा हो गया। पुल का निर्माण कार्य पूरा होते ही भगवान श्रीराम ने आदेश दिया कि जिसके हाथ में जहां पर शिलाएं हैं उन्हें वहीं छोड़कर आ वापिस आ जाएं।
हनुमानजी ने गिरिराज द्रोणागिरी पर्वत को ब्रज क्षेत्र में उतार दिया। मान्यता है कि तब गिरिराजजी ने हनुमानजी से श्रीराम के दर्शन की इच्छा जाहिर की। हनुमानजी ने गिरिराजजी का संदेश श्रीराम के पास पहुंचाया तो उन्होंने द्वापर में गिरिराजजी की इच्छा पूरी करने का वचन दिया। द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने गिरिराजजी का पूजन करके अपने वचन निभाया।
भव्य फव्वारे और रोशनी से जगमगाता झाड़ी हनुमान मंदिर
सिद्ध स्थली झाड़ी हनुमान मंदिर पर तीन जून (आज) से 11 दिवसीय प्रभु प्रेम पर्व शुरू होगा। सोमवार को हनुमानजी का अभिषेक होगा। कल मंगलवार को कस्बा नौहझील से झाड़ी हनुमान मंदिर तक श्रीमद भागवत कलश यात्रा निकाली जाएगी। व्यास पीठ से भागवताचार्य इन्द्रेश महाराज प्रवचन देंगे।
Updated on:
03 Jun 2019 12:37 pm
Published on:
03 Jun 2019 06:00 am
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