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VIDEO देश की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है बांके बिहारी जी के हिंडोले का इतिहास, जानिए रोचक तथ्य

हरियाली तीज पर बांके बिहारी जी ने हरे रंग वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। - भगवान बांके बिहारी ने जिस हिंडोले में विराजमान होकर दर्शन दिए उस हिंडोले का इतिहास देश की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।

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मथुरा

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Amit Sharma

Aug 13, 2018

Banke Bihari

VIDEO देश की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है बांके बिहारी जी के हिंडोले का इतिहास, जानिए रोचक तथ्य

मथुरा। वृन्दावन के भगवान बांके बिहारी मंदिर को हरियाली तीज पर देश विदेश लाए गए फूलों से सजाया गया है। हरियाली तीज पर बांके बिहारी जी ने हरे रंग वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। भगवान बांके बिहारी ने जिस हिंडोले में विराजमान होकर दर्शन दिए उस हिंडोले का इतिहास देश की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि देश जब स्वतंत्र हुआ था उसी दिन इस हिंडोले पर बिहारी जी को विराजमान किया गया था।

स्वतंत्रता के साथ जुड़ा है इतिहास

संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी महाराज के लड़ेते जन-जन के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी महाराज की भक्ति से प्रभावित होकर हरियाणा के भक्त हरगुलाल बेरीवाला ने आजादी से पूर्व सन् 1942 में ठाकुर बांके बिहारी के लिए भव्य झूला निर्माण का जिम्मा बनारस के कारीगर लल्लन रॉय एवं उनके सहयोगियों को सौंपा। झूला निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सीसम की लकड़ी के लिए कनकपुर के जंगल खरीदे गये। वृहद स्तर पर सोने व चांदी की खरीदारी की गयी। पांच वर्ष के अथक परिश्रम के उपरांत बेशकीमती झूले का निर्माण किया गया। जिसमें करीब एक हजार तोला सोना व दो हजार तोले चांदी की नक्काशी कुशल कारीगरोंं द्वारा की गयी। कला की दृष्टि से अद्‌भुत इस झूले के निर्माण में विविध बिन्दुओं का विशेष ध्यान रखा गया। झूले के मध्य में लता पताओंं एवं मयूरों से अंकित मुख्य भाग के अलावा दोनों ओर अष्ट खम्बे एवं अष्ट सखियों को स्थापित किया गया है। मध्य भाग में जब ठाकुर बांके बिहारी विराजमान होते हैंं तो रजत निर्मित पंखे लिए आदमकद सखियों की प्रतिमाएं एकदम जीवंत प्रतीत होती हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ही ठाकुर बांके बिहारी प्रथम बार इस अद्भुत झूले पर विराजमान हुए थे। इस हिण्डोले को देखने के लिए देश के विभिन्न प्रांतो से लाखोंं की संख्या में श्रध्दालु वृन्दावन पहुचते हैं। वर्ष में मात्र एक बार श्रावण मास की तृतीया तिथि को सांय काल ठाकुर बांके बिहारी महाराज इस हिण्डोले मेंविराजमान होकर श्रध्दालुओं को कृतार्थ करते हैंं।

एक रात्रि पूर्व स्थापित किया जाता है हिंडोला

मंदिर सेवायत मयंक गोस्वामी बंटू के अनुसार वर्तमान में करोड़ों की कीमत के इस नायाब हिण्डोले की देखरेख की व्यवस्था विशेष रूप से की जाती है। तृतीया तिथि से एक सप्ताह पूर्व रूई एवं मखमली कपड़ों में सुरक्षित रखे गये इसके विभिन्न भागों को निकालकर विभिन्न प्रकार के द्रव्यों से साफ किया जाता है। तदोपरांत उन्हें एक-एक कर संयोजित किया जाता है। सम्पूर्ण झूले को मंदिर परिसर में एक रात्रि पूर्व स्थापित किया जाता है। इसके लिए मंदिर प्रबंध कमेटी के साथ-साथ समस्त सेवायत परिवार अपना विशेष सहयोग प्रदान करते हैं। गोस्वामी ने बताया कि हरियाली तीज पर्व पर ठाकुर बांके बिहारी जी को विशेष रूप से हरी पोशाक धारण कराकर स्वर्ण एवं मोतियों से अलंकृत जेवरात धारण कराऐ जाते हैंं एवं विशेष रूप से तैयार किए गये इत्र से मालिश कर विभिन्न प्रकार के सुगंधित पेय पदार्थ एवं व्यंजन भोग लगाये जाते हैं।