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Janmashtami 2018: बांके बिहारी जी से है पाकिस्तान के पठानों का खास लगाव, पढ़िये रोचक कहानी

Krishna Janmashtami 2018 हिन्दू ही सिर्फ उल्लास से नहीं मनाते बल्कि पडोसी देश पाकिस्तान के पठान भी बांके बिहारी के दीवाने हैं। ये संबंध अभी का नहीं, बल्कि सदियों पुराना है।

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Banke bihari

Banke bihari

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की जिस तरह जन्मभूमि मथुरा में तैयारी चल रही है, कुछ वैसा ही नजारा वृंदावन धाम का भी है। यहां भी Janmashtami पर विशेष आयोजन किया जाता है। बांके बिहारी प्रभु अपने हर वक्त की मनोकामना पूरी करते हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान के पठान भी बांके बिहारी के दीवाने हैं। ये संबंध अभी का नहीं, बल्कि सदियों पुराना है। देखिये पत्रिका की स्पेशल रिपोर्ट ...

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बांके बिहारी मंदिर का जानें इतिहास
संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी भगवान श्री कृष्ण के भक्त थे। स्वामी हरिदास ने अपने संगीत को भगवान को समर्पित कर दिया था। वृंदावन में स्थित श्री कृष्ण की रासस्थली निधिवन में बैठकर भगवान को अपने संगीत से रिझाया करते थे। उनकी भक्ति और गायन से रीझकर भगवान श्री कृष्ण इनके सामने आ जाते। हरिदास जी मंत्रमुग्ध होकर श्री कृष्ण को दुलार करने लगते। एक दिन एक शिष्य के कहने पर उन्होंने भजन गाकर राधा कृष्ण की युगल जोड़ी को प्रकट किया। हरिदास जी ने उन दोनों की अपने पास रहने की इच्छा प्रकट की। हरिदास जी ने कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं तो संत हूं। आपको लंगोट पहना दूंगा लेकिन माता को नित्य आभूषण कहां से लाकर दूंगा। भक्त की बात सुनकर श्री कृष्ण मुस्कुराए और राधा कृष्ण की युगल जोड़ी एकाकार होकर एक विग्रह रूप में प्रकट हुई।हरिदास जी ने इस विग्रह को Banke Bihari नाम दिया।

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जानिये किस तरह पाकिस्तान से है संबंध
गुरू स्वामी हरिदास जी जिनके कारण Banke Bihari प्रकट हुये, उनके पिता का नाम गुरू स्वामी आशुधीर जी था। वे मुल्तान के रहने वाले थे, जो आज पाकिस्तान के लाहौर में है। बांके बिहारी मंदिर के सेवादार मदन गोपाल गोस्वामी ने बताया कि धीर जी वहां से अलीगढ़ और खैर के बीच में खेरेश्वर महादेव पर रहे। वहीं स्वामी हरिदास जी का जन्म संम्वत 1535 में हुआ था। कृष्ण भक्ति में हरिदास जी इतने लीन हो गये, कि वहां से वृंदावन आ गये थे। बता दें कि आज भी खेरेश्वर मंदिर पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। यहां पर दाऊजी के नाम से भव्य मेला लगता है।

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अकबर के समय से शुरू हुई ये कहानी
बांके बिहारी मंदिर के सेवादार मदन गोपाल गोस्वामी ने बताया प्रसिद्ध गायक तानसेन स्वामी हरिदास जी के शिष्य थे। सम्राट अकबर इनके दर्शन करने वृंदावन आये थे, तभी से ये परंपरा शुरू हुई है। उन्होंने बताया कि आज भी पाकिस्तान के पठान बांके बिहारी मंदिर में आते हैं। वर्ष में ये लोग कभी भी बांके बिहारी मंदिर के दर्शन करने के लिए आ जाते हैं।

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