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अक्षय तृतीया पर बांके बिहारी के दर्शन से मिलता है बद्रीनाथ धाम का पुण्य

अक्षय तृतीया पर बांके बिहारी के होते हैं खास दर्शन, प्रसाद में मिलता है चरणों का चंदन।

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मथुरा। पूरे देश में अक्षय तृतीया का पर्व बड़े धूम धाम से मनाया जा रहा है। इस दिन बांके बिहारी के खास दर्शन के लिए लाखों भक्त देश विदेश से वृंदावन आए हैं। अक्षय तृतीया के दिन बांके बिहारी के चरणों के दर्शन भक्तों को कराए जाते हैं, जबकि बाकी दिन उनके चरण कपड़ो व फूलों से ढंके रहते हैं। वहीं उनके शरीर पर चंदन का लेप किया जाता है। यही चंदन भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में बंटता है। बिहारी जी के चरणों की एक झलक पाने को दूर दूर से आए भक्त लालाहित रहते हैं।

ऐसे शुरू हुई चंदन के लेप की परंपरा
अक्षय तृतीया वाले दिन प्रभु बांके बिहारी जी को पांव में पाजेब पहनाया जाता है। उनके चरणों में चन्दन के गोले रखे जाते हैं। साथ ही उनके पूरे शरीर पर चन्दन का लेप किया जाता है। इस प्रथा को लेकर मान्यता है कि आज से करीब 500 वर्ष पूर्व स्वामी हरिदास जी ने गर्मी के प्रकोप से अपने आराध्य को बचाने के लिए प्रभु बांके बिहारी जी के श्री विग्रह पर चन्दन का लेप किया था। तभी से ये परंपरा चलती आ रही है। अक्षय तृतीया से ही उनकी पंखा सेवा शुरू हो जाती है।

बांके बिहारी के दर्शन से मिलता है बद्रीनाथ का पुण्य
माना जाता है कि अक्षय तृतीया ही दिन ही त्रेता युग की शुरुआत हुई थी और बद्रीनाथ धाम में में नर-नारायण का अवतार भी हुआ था। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन जो पुण्य बद्रीनाथ धाम में नारायण के दर्शन करके प्राप्त होता है, वही पुण्य वृंदावन के बांके बिहारी क दर्शन से प्राप्त होता है। आज के दिन कमाए गए पुण्य का कभी क्षय नहीं होता।

चंदन का प्रसाद होता है वितरित
भगवान बांके बिहारी मंदिर के सेवायत गोस्वामी आशीष ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान बांके बिहारी के चरणों को चंदन के लेप से ठंडक प्रदान की जाती है और शीतलता पहुंचाने वाली चीजें उनके समक्ष रखी जाती हैं। उन्हें सत्तू के लड्डू, शरबत, ककड़ी और आमरस का भोग लगाया जाता है। ठाकुर जी के चरणों के चंदन का लेप भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है और भक्त उसे बड़े आनंद के साथ ग्रहण करते हैं।